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छोटे शहरों में ई-स्कूटरों की धूम! महानगरों की सीमा लांघकर आम जनता की पहली पसंद बना ई-स्कूटर

छोटे शहरों में ई-स्कूटरों की धूम! महानगरों की सीमा लांघकर आम जनता की पहली पसंद बना ई-स्कूटर

भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर का चलन अब बड़े शहरों से आगे बढ़ रहा है. जिन बाजारों में पहले इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की सबसे ज्यादा बिक्री होती थी, अब वहां उनकी हिस्सेदारी कम हो रही है. इसका कारण है कि अब छोटे शहरों और ग्रामीण भारत में भी लोग तेजी से इन्हें अपना रहे हैं. इससे पता चलता है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब मास-मार्केट में अपनी जगह बना रही है. यह बदलाव न सिर्फ उन बाज़ारों को बदल रहा है, जहां ई-स्कूटर बिकते हैं, बल्कि यह भी संकेत दे रहा है कि बाजार में कौन सी कंपनी आगे रहेगी. इस सेक्टर की शुरुआती बढ़त के दौरान, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और अलग तरह के प्रोडक्ट की वजह से इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) के क्षेत्र में नई कंपनियां आगे आईं, जिनका दबदबा बड़े शहरों के बाजारों में था. लेकिन जैसे-जैसे ई-स्कूटर शहरी और ग्रामीण भारत में अपनी पैठ बना रहे हैं, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, सर्विस इंफ्रास्ट्रक्चर, फाइनेंसिंग की सुविधा और ब्रांड पर भरोसा जैसी चीजें अहम होती जा रही हैं. ये ऐसी खूबियां हैं जो पारंपरिक रूप से भारत की स्थापित टू-व्हीलर बनाने वाली कंपनियों के पक्ष में रही हैं.

छोटे शहरों में ई-स्कूटरों की धूम! महानगरों की सीमा लांघकर आम जनता की पहली पसंद बना ई-स्कूटर
छोटे शहरों में ई-स्कूटरों की धूम! महानगरों की सीमा लांघकर आम जनता की पहली पसंद बना ई-स्कूटर

छोटे शहरों से बढ़ रही इक्वायरी

इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि हाल के महीनों में, खासकर छोटे शहरों और कस्बों में, मांग बढ़ी है. इसकी वजहें हैं – फ्यूल की बढ़ती कीमतें, ग्राहकों का बढ़ता भरोसा और EV को एक व्यावहारिक विकल्प के तौर पर ज्यादा लोगों का अपनाना. एथर एनर्जी के चीफ बिजनेस ऑफिसर रवनीत एस. फोकेला ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि पिछले दो-तीन क्वार्टर से इंक्वायरी लगातार बढ़ रही है, लेकिन हाल के महीनों में इसमें तेजी आई है, खासकर टियर-2, टियर-3 और टियर-4 शहरों से ऐसा ज्यादा देखने को मिल रहा है. उन्होंने कहा कि यह बदलाव ग्राहकों के व्यवहार में आए बड़े बदलाव को दिखाता है. ई-स्कूटर को अब सिर्फ उन लोगों के लिए नहीं माना जाता जो नई चीजें सबसे पहले अपनाते हैं. आम खरीदार भी अब इन्हें पारंपरिक गाड़ियों के अच्छे विकल्प के तौर पर देख रहे हैं, क्योंकि इन्हें खरीदना और चलाना किफायती है और टेक्नोलॉजी पर भरोसा भी बढ़ रहा है.

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बढ़ रही है सेल्स

पेट्रोल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने इस बात को और मजबूत किया है. यह ट्रेंड पूरे देश में दिख रहा है, लेकिन सबसे तेजी से बढ़ने वाले EV बाजार उन इलाकों से उभर रहे हैं जो पारंपरिक स्कूटर्स के लिए हमेशा से मजबूत गढ़ रहे हैं. बजाज ऑटो के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राकेश शर्मा ने कहा कि जिन इलाकों में ICE (इंटरनल कंबशन इंजन) स्कूटर ज्यादा चलते हैं, वहां ई-स्कूटर की सेल्स भी आम तौर पर तेजी से बढ़ रही है. इससे पता चलता है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अब वही आम ग्राहक अपना रहे हैं जिन्होंने दशकों तक भारत के स्कूटर बाज़ार को आगे बढ़ाया था. इलेक्ट्रिक स्कूटर किसी खास या सीमित वर्ग के प्रोडक्ट के तौर पर विकसित होने के बजाय, अब बड़े स्कूटर बाजार का हिस्सा बन रहे हैं.

EV के नए सब-सेगमेंट

जैसे-जैसे यह बदलाव हो रहा है, दोनों तरह के स्कूटरों के ग्राहकों की प्राथमिकताएं भी एक जैसी होती जा रही हैं. शर्मा के अनुसार आखिरकार, ग्राहक कुछ खास बातों को ध्यान में रखते हुए उन खूबियों को चुनते हैं जो ICE और EV, दोनों तरह के सेगमेंट में एक जैसी होती हैं. उन्होंने कहा कि भले ही EV के नए सब-सेगमेंट सामने आ रहे हैं, लेकिन ग्राहक जिन चीजों को अहमियत देते हैं, उनमें काफी समानता बनी हुई है. पुणे, वडोदरा, सूरत, विशाखापत्तनम और दूसरे शहरी बाज़ारों में डीलर मांग बढ़ने की बात कह रहे हैं. इससे पता चलता है कि भारत के बड़े शहरी केंद्रों से बाहर भी लोग इन्हें अपना रहे हैं.

बड़ी और पुरानी कंपनियों का दबदबा बढ़ा

बाजार के बदलते हालात पहले से ही इंडस्ट्री में लीडरशिप की स्थिति को बदल रहे हैं. EV के शुरुआती दौर में आगे रहने वाली कुछ कंपनियों का दबदबा कम हुआ है, जबकि TVS मोटर, बजाज ऑटो और हीरो मोटोकॉर्प जैसी स्थापित कंपनियों ने अपनी स्थिति मजबूत की है. ऑटोमोटिव कंसल्टेंसी फर्म Jato Dynamics के प्रेसिडेंट रवि भाटिया ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि बाजार को अब सिर्फ टेक्नोलॉजी के शौकीन लोग ही नहीं, बल्कि आम ग्राहक भी तेजी से आकार दे रहे हैं. फैमि​ली सेंट्रिक प्रोडक्ट्स की भी मांग बढ़ रही है, जो ग्राहकों के बढ़ते दायरे को दिखाता है.

रीच के दम पर जीती जाएगी रेस

इंडस्ट्री के लिए इसके बड़े मायने हैं. जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक स्कूटर बड़े शहरों से निकलकर आम बाजार तक पहुंच रहे हैं, देश की सबसे बड़ी टू-व्हीलर कंपनियों को बनाने वाली क्षमताएं उतनी ही अहम हो सकती हैं जितनी उनके वाहनों को चलाने वाली टेक्नोलॉजी. भारत की इलेक्ट्रिक स्कूटर की कहानी का पहला दौर टेक्नोलॉजी के दम पर जीता गया था. जानकारों का कहना है कि अगला दौर शायद लोगों तक पहुंच यानी रीच के दम पर जीता जाएगा.

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