Make in India: दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाला हर चौथा आईफोन अब भारत में बन रहा है. ये बात जितनी बड़ी उपलब्धि लगती है, विदेशी मीडिया का एक हिस्सा इसे अलग चश्मे से देख रहा है. हाल ही में ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में भारत के मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग मॉडल पर सवाल खड़े किए थे. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुद मोर्चा संभाला है. उन्होंने सोशल मीडिया पर सीधे आंकड़ों के जरिए बताया कि कैसे सरकार की नीतियों ने देश के खजाने से लेकर आम लोगों के रोजगार तक में बड़ा योगदान दिया है.

आईफोन निर्माण पर ब्लूमबर्ग ने उठाए थे सवाल
विवाद की शुरुआत ब्लूमबर्ग की एक खबर से हुई. पत्रकार एंडी मुखर्जी के एक लेख के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि आज दुनिया के चार में से एक आईफोन भारत में बन रहे हैं. लेकिन इसके साथ ही ये दावा भी किया गया कि बाहर से मंगाए जाने वाले महंगे पार्ट्स के अलावा भारी सरकारी सब्सिडी की वजह से ये सफलता उतनी सीधी नहीं है जितनी दिखती है. रिपोर्ट में एक आईफोन के अलगअलग हिस्सों का उदाहरण देते हुए ये समझाने की कोशिश की गई कि चीन के मैन्युफैक्चरिंग मॉडल की नकल करना भारत के लिए शायद फायदे का सौदा साबित न हो.
Mobile PLI stats as follows:
Government incentive paid: Rs 19,000 Cr.
Direct tax collected: Rs 25,000 Cr.
GST collected: Rs 3,00,000 Cr.
Electronics manufacturing employs 25 Lakh people; mobile manufacturing alone employs 12 Lakh.Cope harder!!
— Ashwini Vaishnaw October 27, 2026
अश्विनी वैष्णव ने रखा सरकारी सब्सिडी के बदले कमाई का हिसाब
विदेशी मीडिया के इस दावे पर की जा रही चर्चा के बीच केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मोबाइल पीएलआई स्कीम के आधिकारिक आंकड़े सामने रख दिए. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में जिस सरकारी सब्सिडी को महंगा बताया जा रहा था, वैष्णव ने उसी का पूरा गणित समझाया है. उनके द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, सरकार ने मोबाइल पीएलआई स्कीम के तहत कंपनियों को अब तक 19,000 करोड़ रुपये का इंसेंटिव यानी सब्सिडी दी है.
अगर कोई सिर्फ इस एक आंकड़े को देखे तो ये रकम बड़ी लग सकती है. लेकिन इसके बदले में सरकारी खजाने में जो पैसा आया, वो इससे कई गुना ज्यादा है. अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस सेक्टर से सरकार ने 25,000 करोड़ रुपये का डायरेक्ट टैक्स वसूला है. बात यहीं खत्म नहीं होती. जीएसटी के रूप में सरकार के पास 3,00,000 करोड़ रुपये का भारीभरकम टैक्स आया है. यानी 19 हजार करोड़ रुपये खर्च करके सरकार ने सिर्फ डायरेक्ट टैक्स से ही अपनी लागत से ज्यादा रकम वसूल ली, जबकि तीन लाख करोड़ रुपये का जीएसटी अलग से मिला.
लाखों लोगों की रोजीरोटी का जरिया बना मोबाइल सेक्टर
किसी भी सरकारी स्कीम की कामयाबी सिर्फ टैक्स के आंकड़ों से तय नहीं होती, बल्कि इस बात से भी होती है कि उससे कितने घरों का चूल्हा जला. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में जहां सिर्फ सब्सिडी के खर्च की बात की गई थी, वहीं अश्विनी वैष्णव ने रोजगार के आंकड़े रखकर तस्वीर का दूसरा पहलू भी दिखाया.
मंत्री द्वारा दिए गए डेटा के अनुसार, देश के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने कुल 25 लाख लोगों को रोजगार दिया है. इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों की है. अकेले मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने 12 लाख लोगों को नौकरी दी है. यानी कुल इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लगभग आधे रोजगार सिर्फ मोबाइल बनाने के काम से पैदा हुए हैं.