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चंडीगढ़ की बेटी का पापा की दुकान से टीम इंडिया तक सफर: यॉर्कर से चमकीं नंदनी शर्मा अब वर्ल्ड कप का हिस्सा

नितिन शर्मा। चंडीगढ़ की गलियों से निकलकर टीम इंडिया तक का सफर तय करने वाली नंदनी शर्मा अब वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा बन गई हैं। कभी पिता के लौटने का इंतजार करने वाली छोटी सी बच्ची, जो हर शाम क्रिकेट अकादमी में दाखिला दिलाने की जिद करती थी, आज अपने उसी सपने को जी रही है। मेहनत, जुनून और यॉर्कर की धार के दम पर नंदनी ने वह मुकाम हासिल किया जो हर युवा क्रिकेटर का सपना होता है।

चंडीगढ़ की बेटी का पापा की दुकान से टीम इंडिया तक सफर: यॉर्कर से चमकीं नंदनी शर्मा अब वर्ल्ड कप का हिस्सा
चंडीगढ़ की बेटी का पापा की दुकान से टीम इंडिया तक सफर: यॉर्कर से चमकीं नंदनी शर्मा अब वर्ल्ड कप का हिस्सा

श्याम सुंदर शर्मा को आज भी वह समय याद है, जब उनकी बेटी नंदनी उनसे बार-बार गुजारिश करती थी कि वह उसे किसी क्रिकेट अकादमी में दाखिला दिलवा दें। यह साल 2011 की बात है और नंदनी उस समय चौथी कक्षा में पढ़ रही थी। यह पहली बार नहीं था जब उसने यह गुजारिश की थी।

नंदनी की थी सिर्फ एक ही मांग

लगभग हर शाम, श्याम सुंदर जब चंडीगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र में अपनी स्पेयर पार्ट्स की दुकान से घर लौटते थे तो वह उनसे यही मिन्नत करती थी। शनिवार दो मई 2026 को श्याम सुंदर शर्मा घर लौटे ही थे कि नंदनी ने उनका स्वागत किया और उन्हें बड़ी खबर सुनाई। 24 साल की इस तेज गेंदबाज को महिला T20 वर्ल्ड कप के लिए 15-सदस्यीय भारतीय टीम में चुन लिया गया है।

श्याम सुंदर शर्मा ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘‘जब नंदनी बहुत छोटी थी तो मुझसे उसकी बस एक ही मांग होती थी कि मैं उसे किसी क्रिकेट अकादमी में दाखिला दिलवा दूं। उसने क्रिकेट खेलने का पक्का मन बना लिया था। किसी भी दूसरे माता-पिता की तरह हम भी यही चाहते थे कि वह जो कुछ भी करना चाहे, करे। हमने एक पल के लिए भी यह नहीं सोचा कि उसे दाखिला न दिलवाएं।’’

श्याम सुंदर शर्मा के मुताबिक, ‘‘मैं भी अपने जवानी के दिनों में क्रिकेट खेला करता था, लेकिन उसे खेलते हुए देखकर मैं हमेशा भावुक हो जाता था। अब जब उसे T20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में चुन लिया गया है तो यह हमारे और नंदनी की कड़ी मेहनत व क्रिकेट के प्रति उसके जुनून के लिए सबसे बड़े इनामों में से एक है।’’ नंदनी ने भी उस समय को याद किया जब उन्होंने भारत के लिए वर्ल्ड कप खेलने का सपना देखा था।

नंदनी को अब भी नहीं यकीन

नंदनी शर्मा ने बताया, ‘‘मैं अब भी घबराई हुई हूं और साथ ही उत्साहित भी। मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा है। थाइलैंड में हुए ‘राइजिंग स्टार्स टूर्नामेंट’ में इंडिया A और UAE A के मैच के बाद मुझे चोट लग गई थी। पिछले कुछ महीनों में मैंने अपने भाइयों (आकाश वत्स और शुभम वत्स) के साथ अपनी गेंदबाजी पर काम किया है। आकाश और शुभम पंजाब के लिए खेल चुके हैं। उन्होंने मेरी लय लौटाने में मेरी मदद की। इंग्लैंड में गेंदबाजी करना एक चुनौती होगी, लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं।’’

युवराज के कोच से भी सीखे गुर

नंदनी ने शुरुआत में अपने स्कूल में ट्रेनिंग ली और फिर चंडीगढ़ के सेक्टर 26 में LIC क्रिकेट अकादमी में कुछ समय बिताया। इसके बाद जल्द ही पंजाब की जूनियर टीम में जगह बना ली। चंडीगढ़ के लिए खेलने से पहले नंदनी ने U-19 एनसीए कैंप में हिस्सा लिया और पंजाब की U16 और U19 टीमों के लिए खेला। शुरुआत में उसने कोच जतिन, राजेश पाथा और दीपक के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग ली। उसके बाद सुखविंदर बावा के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग ली। सुखविंदर बावा युवराज सिंह के पूर्व कोच और U19 वर्ल्ड कप विजेता राज अंगद बावा के पिता हैं।

10 साल में हैरान करने वाला प्रदर्शन

सुखविंदर को याद है कि कैसे युवा नंदनी ने अपनी तेज गेंदबाजी से उनकी अकादमी के कोचों को प्रभावित किया था। सुखविंदर बताते हैं, ‘‘जब नंदनी हमारी अकादमी में शामिल हुई, तब वह लगभग दस साल की थी। मुझे याद है कि उस उम्र में भी वह काफी तेज गेंदबाजी करती थी, जिसे देखकर दूसरे लड़के-लड़कियां हैरान रह जाते थे। बाद में, जैसे-जैसे वह बड़ी हुई, उसने अपनी यॉर्कर गेंदों पर काम किया। वह हमेशा सही पिचों पर गेंदबाजी करना चाहती थी। हमें भी उम्मीद है कि एक दिन वह मुल्लांपुर स्टेडियम में भारतीय टीम की जर्सी पहनकर खेलेगी।’’

पिछले साल नंदनी शर्मा को 2026 WPL के लिए दिल्ली कैपिटल्स ने 20 लाख रुपये में खरीदा था। उससे पहले नंदनी ने WPL के तीसरे सीजन में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए नेट बॉलर के तौर पर काम किया था। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी एनाबेल सदरलैंड के टूर्नामेंट से हटने के बाद नंदनी शर्मा को दिल्ली कैपिटल्स की प्लेइंग XI में मौका मिला।

डब्ल्यूपीएल (WPL) के दौरान नंदनी शर्मा ने 17 विकेट लिए। यह उपलब्धि सिर्फ गुजरात जायंट्स की सोफी डिवाइन ही दोहरा पाईं। नंदनी शर्मा WPL में हैट्रिक लेने वाली दूसरी भारतीय खिलाड़ी भी बनीं। वह गुजरात जायंट्स के खिलाफ पांच विकेट झटकने के साथ पांच विकेट लेने वाली पहली अनकैप्ड खिलाड़ी भी बनीं।

स्लो बाउंसर और वेरिएशन पर किया काम

सुखविंदर बावा ने बताया,‘‘ जब वह मेरे पास ट्रेनिंग के लिए आई तो हमने स्लो बाउंसर और वेरिएशन पर काम किया। वह बल्ले से भी अच्छी थी। मुझे उम्मीद थी कि उसे WPL में बल्लेबाजी का भी मौका मिलेगा। जिस तरह से उसने WPL में गेंदबाजी की, उससे उसे बहुत आत्मविश्वास मिला।’’ नंदनी भी WPL के अनुभव और उससे मिली सीख को याद करती हैं।

WPL ने दी दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता

नंदनी शर्मा ने बताया, ‘‘WPL ने मुझे दबाव में प्रदर्शन करना सिखाया, साथ ही कुछ सबसे अनुभवी खिलाड़ियों के खिलाफ गेंदबाजी करना भी सिखाया। हमारी कप्तान, जेमिमा रोड्रिग्स ने मेरा बहुत साथ दिया। मैं शेफाली वर्मा और मारिजाने कैप के साथ भी गेंदबाजी के बारे में चर्चा करती थी। मैं हमेशा से भुवनेश्वर कुमार की गेंदबाजी की प्रशंसक रही हूं। उम्मीद है कि इंग्लैंड में उनकी तरह ही गेंदबाजी कर पाऊंगी।’’

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