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ग्लोबल ट्रेड में मचेगी हलचल! भारत और दक्षिण कोरिया के बीच व्यापार समझौते को नया रूप देने पर मंथन, बैठक शुरू

भारत और दक्षिण कोरिया ने सोमवार को ‘व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते’ (CEPA) को अपग्रेड करने के लिए बातचीत का अगला दौर शुरू हो गया है. यह समझौता जनवरी 2010 में लागू हुआ था. तीन दिनों तक चलने वाली ये बातचीत (25-27 मई) काफी अहम है. भारत ने दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं. सरकारी अधिकारी ने कहा कि यह भारत-कोरिया CEPA अपग्रेड बातचीत का 12वां दौर है.” 20 अप्रैल को, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अपने कोरियाई समकक्ष येओ हान-कू को एक नए बाइलेटरल फ्री ट्रेड डील पर बातचीत करने का प्रस्ताव दिया था. इसका मकसद समझौते को और अधिक समकालीन बनाना और व्यापार घाटे (आयात और निर्यात के बीच का अंतर) से जुड़ी चिंताओं को दूर करना है.

ग्लोबल ट्रेड में मचेगी हलचल! भारत और दक्षिण कोरिया के बीच व्यापार समझौते को नया रूप देने पर मंथन, बैठक शुरू
ग्लोबल ट्रेड में मचेगी हलचल! भारत और दक्षिण कोरिया के बीच व्यापार समझौते को नया रूप देने पर मंथन, बैठक शुरू

कैसा है दोनों देशों का बाइलेटरल ट्रेड

कोरिया को भारत का निर्यात 2024-25 के 5.81 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 3.31 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 6 अरब डॉलर हो गया. 2022-25 के दौरान निर्यात में वृद्धि नकारात्मक रही थी. आयात 2024-25 के 21 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 1.38 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 21.35 अरब डॉलर हो गया. व्यापार घाटा 2025-26 में 15.35 अरब डॉलर, 2024-25 में 15.2 अरब डॉलर, 2023-24 में 14.71 अरब डॉलर, 2022-23 में 14.57 अरब डॉलर और 2021-22 में 9.4 अरब डॉलर रहा. गोयल ने कहा कि मूल CEPA भारत के पक्ष में काम नहीं कर पाया है, और जिस अतार्किक तरीके से 2010 में इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया था, उसके कारण व्यापार का अंतर और बढ़ गया है.

ट्रेड दोगुना करने का प्लान

विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय निर्यातकों को दक्षिण कोरिया में कुछ ‘नॉन-टैरिफ बाधाओं’ का सामना करना पड़ता है. इनमें कड़े मानक, नियम और प्रमाणन संबंधी आवश्यकताएं शामिल हैं, जिनके कारण भारतीय सामानों के लिए दक्षिण कोरियाई बाज़ार में अपनी पैठ बनाना मुश्किल हो जाता है. दोनों देशों का लक्ष्य है कि वे 2030 तक अपने आपसी व्यापार को मौजूदा 27 अरब डॉलर से बढ़ाकर 54 अरब डॉलर तक पहुंचाएं, और साथ ही एक ज़्यादा संतुलित व्यापारिक संबंध भी सुनिश्चित करें.

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क्या है CEPA?

CEPA के तहत, दो या उससे ज्यादा देश आपस में शामिल ज्यादा से ज्यादा सामानों पर लगने वाले कस्टम शुल्क को या तो काफी कम कर देते हैं या पूरी तरह से हटा देते हैं. इसके अलावा, वे सेवाओं के व्यापार को बढ़ावा देने और निवेश को बढ़ाने के लिए नियमों को भी आसान बनाते हैं. आम तौर पर, किसी व्यापार समझौते की समीक्षा या उसे अपडेट करने की प्रक्रिया में ये चीजें उसे लागू करने से जुड़ी समस्याएं, सामान की उत्पत्ति के नियम, सामान की जाँच और उसे जारी करने की प्रक्रिया, कस्टम से जुड़ी प्रक्रियाएं, सामानों के व्यापार को और ज़्यादा उदार बनाना, और व्यापार से जुड़े डेटा को आपस में साझा करना और उसका आदान-प्रदान करना शामिल होती हैं.

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