DharamViral

गलत दिन व्रत रखना पड़ सकता है भारी, पुरुषोत्तम एकादशी पर न करें ये गलती, जानिए सही व्रत नियम

Ekadashi Vrat Niyam: पुरुषोत्तम मास में आने वाली पुरुषोत्तमी एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। लेकिन धार्मिक ग्रंथों में यह भी बताया गया है कि गलत तिथि पर किया गया एकादशी व्रत शुभ फल की जगह नुकसानदायक भी हो सकता है। जानिए एकादशी व्रत करने के सही नियम। 

गलत दिन व्रत रखना पड़ सकता है भारी, पुरुषोत्तम एकादशी पर न करें ये गलती, जानिए सही व्रत नियम
गलत दिन व्रत रखना पड़ सकता है भारी, पुरुषोत्तम एकादशी पर न करें ये गलती, जानिए सही व्रत नियम

पुरुषोत्तमी एकादशी का खास महत्व

पुरुषोत्तम मास में आने वाली एकादशी को बेहद पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस साल यह व्रत 27 मई 2026 को रखा जाएगा। श्रद्धालुओं के बीच इसे लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है।

क्यों खास है पुरुषोत्तम मास

धार्मिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने मलमास को अपना नाम देकर इसे पुरुषोत्तम मास बनाया था। इसी कारण इस महीने में किए गए दान, तप, यज्ञ और व्रत का फल कई गुना अधिक माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान किया गया हर शुभ कार्य विशेष पुण्य प्रदान करता है।

Khabar Monkey

दशमी विधा एकादशी से क्यों बचना चाहिए

धर्म ग्रंथों में दशमी विधा एकादशी को त्यागने की बात कही गई है। मान्यता है कि अगर दशमी तिथि का प्रभाव मध्यरात्रि के बाद तक बना रहे, तो अगले दिन की एकादशी दशमी से संयुक्त मानी जाती है। ऐसे में उस दिन व्रत नहीं करना चाहिए। शास्त्रों में द्वादशी युक्त एकादशी को श्रेष्ठ माना गया है।

महाभारत से जुड़ी एक मान्यता के अनुसार, गांधारी ने दशमी विधा एकादशी का व्रत किया था, जिसके कारण उनके सौ पुत्रों का विनाश हुआ। इसी वजह से धार्मिक जानकार सही तिथि देखकर ही एकादशी व्रत करने की सलाह देते हैं।

क्या होता है मध्यरात्रि वेध

ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अगर दशमी तिथि रात 12 बजे के बाद तक रहती है, तो उस एकादशी को वेधग्रस्त माना जाता है। ऐसी स्थिति में अगले दिन यानी द्वादशी तिथि में एकादशी व्रत करना शुभ माना जाता है। यही कारण है कि पंचांग देखकर व्रत रखने की परंपरा रही है।

एकादशी व्रत का आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक विद्वानों के अनुसार, एकादशी का संबंध मन और इंद्रियों को नियंत्रित करने से माना गया है। यह व्रत व्यक्ति को भक्ति, संयम और आत्मशुद्धि की ओर ले जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियम से किया गया एकादशी व्रत धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति कराता है।

अगर कोई व्यक्ति निर्जला या पूरा उपवास नहीं कर सकता, तो वह फलाहार करके भी व्रत रख सकता है। धार्मिक मान्यता में भावना और श्रद्धा को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। इसलिए नियम और भक्ति के साथ किया गया व्रत शुभ फल देने वाला माना जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

khabarmonkey@gmail.com

Leave a Reply