Share Market Crash: जिसका अंदेशा था वहीं हुआ… और हफ्ते के पहले ही दिन कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखी गई. क्रूड ऑयल में तेजी, सोने-चांदी में गिरावट के बीच भारतीय शेयर बाजार खुलते ही धड़ाम हो गया. कारोबारी सत्र की शुरुआत में ही सेंसेक्स के 1000 प्वाइंट तक गिरने से निवेशकों के चार लाख करोड़ रुपये खाक हो गए. शुक्रवार को 77,328 अंक पर बंद हुआ सेंसेक्स सोमवार सुबह 76,638 अंक पर खुला लेकिन कुछ देर बार ही यह गिरकर 76,363 अंक पर आ गया. इस दौरान सभी 30 शेयर को लाल निशान के साथ कारोबार करते देखा गया. इसके अलावा निफ्टी सूचकांक भी करीब 300 अंक टूट गया. आइए जानते हैं शेयर बाजार में गिरावट के 5 कारण-

अमेरिका-ईरान शांति वार्ता का फेल हो होना
शेयर बाजार को उम्मीद थी कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच शांति समझौता हो जाएगा, जिससे मिडिल ईस्ट में जारी तनाव कम होगा. इसी उम्मीद में पिछले हफ्ते बाजार में रिकवरी भी देखी गई. लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से ईरान के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करने के कबाद जंग का खतरा बढ़ गया है. इस जियो-पॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tension) के कारण निवेशकों ने बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया है.
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क्रूड ऑयल की कीमत में तेजी
ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता विफल होने और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की आशंका से ब्रेंट क्रूड की कीमत फिर से चढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई. भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है. महंगा तेल मतलब भारत का व्यापार घाटा बढ़ना और कॉर्पोरेट प्रॉफिट में गिरावट आना. इसका सीधा असर आज के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी पर देखा जा रहा है.
पीएम मोदी की अपील और WFH का इशारा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को विदेशी मुद्रा बचाने के लिए देशवासियों से सोना नहीं खरीदने और पेट्रोल-डीजल की बचत करने की अपील की है. उन्होंने कंपनियों से ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) को बढ़ावा देने और लोगों से ज्यादा से ज्यादा पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने के लिए कहा है. इस अपील के बाद ऑटोमोबाइल, ज्वेलरी और रियल एस्टेट सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली देखी जा रही है. इस अपील के बाद बाजार को डिमांड (Demand) में गिरावट का डर सता रहा है.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
ग्लोबल लेवल पर बढ़ते तनाव और डॉलर की मजबूती के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से अपना हाथ खींचना शुरू कर दिया है. डॉलर के मजबूत होने से वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, ऐसे में विदेशी निवेशक उभरते बाजार (Emerging Market) जैसे भारत से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्प का रुख करते हैं.
महंगाई और ब्याज दर बढ़ने का डर
क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमत का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है. भारतीय बाजार में भले ही पेट्रोल-डीजल के रेट महंगे नहीं हुए हैं लेकिन क्रूड ऑयल इसी तरह से महंगा होता रहा तो आने वाले समय में घरेलू बाजार में कीमत बढ़ना तय माना जा रहा है. पेट्रोल-डीजल महंगा होने से बाजार में भी महंगाई आएगी. अगर तेल इसी तरह महंगा रहा तो आने वाले समय में आरबीआई (RBI) को महंगाई काबू करने के लिए ब्याज दर में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है. ऊंची ब्याज दर कंपनियों के लोन को महंगा बनाती है और उनकी ग्रोथ पर असर पड़ता है.





