UPI पेमेंट को लेकर सरकार के फैसले पर विवाद बढ़ता जा रहा है. व्यापारियों और विपक्षी दलों के विरोध के बीच सरकार ने संकेत दिया है कि 2,000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर लगने वाला 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट वापस नहीं लिया जाएगा. PTI के मुताबिक, इस फैसले पर दोबारा विचार करने की कोई योजना नहीं है.

इस फैसले का व्यापारियों, दुकानदारों और कई राजनीतिक दलों ने विरोध किया है. कुछ विपक्षी दलों ने इसे ‘मोदी टैक्स’ नाम दिया है. कांग्रेस समेत कुछ पार्टियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी दबाव में फैसला लेने का आरोप भी लगाया है.
सरकार ने क्या तर्क दिया?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, MDR लागू करने का फैसला UPI सिस्टम को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उसकी सुरक्षा बेहतर करने के मकसद से लिया गया है. सरकार का कहना है कि नया चार्ज UPI इकोसिस्टम को लंबे समय तक अपने दम पर चलने में मदद कर सकता है. सरकार ने मंगलवार को बताया था कि ग्रामीण और छोटे शहरों में UPI का विस्तार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन दिए जाएंगे. साथ ही, UPI को कॉम्पटेटिव बनाए रखने और ज्यादातर ट्रांजेक्शन पर चार्ज नहीं लिया जाएगा.
सरकार पर बढ़ रहा था दबाव
संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने अपनी 32वीं रिपोर्ट में कहा था कि UPI पर किसी तरह का चार्ज नहीं लेने से सरकार पर फाइनेंशियल बोझ बढ़ रहा था. लंबे समय तक UPI के बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए एक टिकाऊ कमाई का मॉडल जरूरी है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि जीरोMDR नीति से जुड़े प्रोत्साहन कार्यक्रम के लिए सरकार हर साल लगभग 2,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही थी.
आम ग्राहकों पर क्या असर होगा?
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों को UPI पेमेंट करने पर कोई चार्ज नहीं देना होगा. 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट पेमेंट पर लगने वाला MDR चार्ज व्यापारियों के पेमेंट सिस्टम के भीतर लागू होगा, ग्राहकों पर नहीं. इसके अलावा, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले पेमेंट और छोटे लेनदेन पर जार्ज नहीं लगेगा. आम यूजर्स को UPI का अनलिमिटेड फ्री इस्तेमाल जारी रहेगा. इसमें कोई मासिक सीमा, ट्रांजैक्शन वॉल्यूम लिमिट या फ्री पेमेंट की अलगअलग कैटेगरी नहीं होगी.