कैंसर का नाम सुनते ही सबसे पहले जो प्रतिक्रिया आती है, वह होती है, डर, घबराहट और जल्द से जल्द कुछ करने की बेचैनी। परिवार हो या मरीज, सभी का पहला ध्यान इस बात पर होता है कि इलाज तुरंत शुरू हो जाए। लेकिन कैंसर का इलाज सिर्फ दवाइयों या प्रक्रियाओं का नाम नहीं है। यह एक पूरी यात्रा है शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक। अगर शुरुआत सही समझ के साथ की जाए, तो यह यात्रा ज्यादा संतुलित और प्रभावी हो सकती है। कैंसर हीलर सेंटर में डायरेक्टर डॉ. तरंग कृष्णा बता रहे हैं कि कैंसर का इलाज शुरू करने से पहले मरीज और उसके घर वालों को किन बातों का समझना ज़रूरी है?

कैंसर का इलाज शुरू करने से पहले इन बातों को समझना है जरूरी
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कैंसर का प्रकार और स्टेज: सबसे पहले आपको अपने कैंसर के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। अक्सर मरीज सिर्फ इतना जानते हैं कि उन्हें कैंसर है, लेकिन यह नहीं जानते कि कैंसर किस प्रकार का है, शरीर के किस हिस्से में है, किस स्टेज में है, कितनी तेजी से बढ़ रहा है। हर कैंसर एक जैसा नहीं होता। दो मरीजों का एक ही नाम का कैंसर भी अलग तरह से व्यवहार कर सकता है। इसलिए डॉक्टर से खुलकर पूछें। अगर जरूरत लगे तो दूसरी राय लेने में भी हिचकिचाएं नहीं।
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इलाज के विकल्प और उसका प्रभाव: कैंसर के इलाज के कई तरीके होते हैं, जैसे सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन, टार्गेटेड थेरेपी आदि। हर ट्रीटमेंट का अपना महत्व है, लेकिन हर उपचार के साथ कुछ प्रभाव और साइड इफेक्ट्स भी जुड़े होते हैं। इलाज शुरू करने से पहले यह समझना जरूरी है कि, यह इलाज क्यों दिया जा रहा है, इसके साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं और इलाज कितने समय तक चलेगा। यह जानकारी आपको मानसिक रूप से तैयार करती है। अक्सर मरीज इलाज के दौरान घबरा जाते हैं क्योंकि उन्हें पहले से बताया नहीं गया होता कि क्या अनुभव हो सकता है। अगर पहले से जानकारी हो, तो उस स्थिति को संभालना आसान हो जाता है।
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शरीर की क्षमता और इम्यून सिस्टम का ध्यान रखें: कैंसर का इलाज सिर्फ बीमारी पर नहीं, शरीर पर भी प्रभाव डालता है। इसलिए शरीर को मजबूत रखना भी इलाज का हिस्सा है। सही पोषण, मानसिक संतुलन, शरीर की ऊर्जा। ये सब चीज़ें ट्रीटमेंट के दौरान बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। जब शरीर कमजोर होता है तो मरीज इलाज को सहन नहीं कर पाता। लेकिन जब शरीर को सहारा मिलता है, तो वही इलाज ज्यादा प्रभावी ढंग से काम करता है।
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मानसिक तैयारी है ज़रूरी: कैंसर सिर्फ शारीरिक बीमारी नहीं है। यह मानसिक रूप से भी व्यक्ति को प्रभावित करता है। इलाज शुरू करने से पहले मरीज और परिवार दोनों को यह समझना चाहिए कि, डर और चिंता आना सामान्य है, हर दिन एक जैसा नहीं होगा, धैर्य रखना जरूरी है। अगर मानसिक तैयारी नहीं होती, तो मरीज जल्दी टूट जाता है। पर जब मरीज मानसिक रूप से तैयार होता है, वह इलाज को बेहतर तरीके से स्वीकार करता है।
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Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है





