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Dharam

कल से सावन की शुरुआत: Shravan Month में कांवड़ यात्रा के कड़े नियमों का करें पालन, वरना अधूरा रहेगा पुण्य​

कल यानी 30 जुलाई 2026 से श्रावण मास की शुरुआत हो रही है। सावन शुरु होते ही कांवड़ यात्रा आरंभ हो जाती है। हिंदू धर्म में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है। इस दौरान शिव भक्त बड़ी संख्या में हरिद्वार पहुंचते हैं और वहां से गंगाजल लेकर अपने घर के नजदीक शिवालयों में शिवलिंग का […]

कल यानी 30 जुलाई 2026 से श्रावण मास की शुरुआत हो रही है। सावन शुरु होते ही कांवड़ यात्रा आरंभ हो जाती है। हिंदू धर्म में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है। इस दौरान शिव भक्त बड़ी संख्या में हरिद्वार पहुंचते हैं और वहां से गंगाजल लेकर अपने घर के नजदीक शिवालयों में शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। 
धार्मिक मान्यता के अनुसार, कांवड़ उठाने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और शिवजी की कृपा भक्तों को प्राप्त हो सकती है। लेकिन धार्मिक ग्रंथों में कांवड़ यात्रा से संबंधित कई कड़े नियम बताए हैं जिनका पालन करना बेहद जरुरी है। अगर आप इस सावन पहली बार कांवड़ उठाने जा रहे हैं, तो पहले इससे जुड़े सभी नियमों को अच्छे से जान लें। ताकि कांवड़ यात्रा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। आइए आपको बताते हैं कांवड यात्रा से जुड़े जरुरी नियम।
कांवड़ यात्रा के 4 प्रकार होते है
 सावन में कांवड़ यात्रा के चार प्रकार होते हैं, इनमें से सामान्य कांवड़, डाक कांवड़, खड़ी कांवड़ और दांड़ी कांवड़। वैसे इनके अलगअलग महत्व और नियम होते हैं। कांवड़ के प्रकार के अनुसार ही शिव मंदिर और घर में तैयारी की जाती है।
असल में सामान्य कांवड़ में शिव भक्त यात्रा के दौरान आराम कर सकते हैं। भक्तों के लिए जगहजगह पर पंडाल की व्यवस्था देखने को मिलती है।
डांक कांवड़ के समय सभी कांवड़िया बिना रुके चलते रहते हैं जब तक की वे अपने घर के पास वाले शिवालय तक न पहुंच जाएं। गौरतलब है कि इसमें कहीं रुका नहीं जाता है।
  खड़ी कांवड में कांवड़िया के साथ कोई न कोई मदद के लिए साथ में जरुर चलता है। जब कांवड़िया आराम करता है तो उनका साथी कांवड़ लेकर चलने के लिए अंदाज में कांवड़ को हिलातेडुलाते रहते हैं।
दांडी कांवड़ सबसे मुश्किल होती है। इसमें शिवभक्त गंगाजी के पास से लेकर अपने क्षेत्र के शिवालय तक दंडवत प्रणाम यानी लेटते हुए जाते हैं। जिस वजह से इस यात्रा में कई बार महीना का समय भी लग जाता है। इसलिए अपनी क्षमता के अनुसार ही कांवड़ यात्रा का चुनाव कर सकते हैं।
कांवड़ यात्रा के दौरान ध्यान रखें ये नियम
माना जाता है कि कांवड़ यात्रियों को गंगा तट से लेकर अपने घर के नजदीक शिवालयों तक कांवाड़ियों को पैदल यात्रा करना चाहिए। ऐसा करने से आपको पुण्य फल प्राप्त होगा। 
कांवड यात्रा के दौरान सबसे जरुरी नियम का विशेष ख्याल रखें कि जब भी आप कहीं पर आराम के लिए रुकें, तो कभी भी कांवड़ को जमीन पर न रखें। जगहजगह पंडालों में इस तरह की व्यवस्था जरुर होती है। 
यदि इस बार आप कांवड़ को उठा रहे हैं, तो भूलकर भी पूरे सावन मास में मांस, मदिरा आदि तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें। मन में सिर्फ शुभ विचार रखें।
कांवड़ यात्रा के समय कांवाड़ियों को मन में शिवजी का स्मरण करना चाहिए। पूरे रास्ते में बम बम भोले व हर हर महादेव के जयकारे लगाने चाहिए। 
  यदि आप कांवड़ यात्रा के दौरान गलती से जमीन पर कांवड़ रख देते हैं,तो आपको फिर से गंगा जी से गंगाजल लेकर आना चाहिए। 
  कांवड़ यात्रा के समय परिवार के सदस्यों को भी सावन से जुड़े सभी नियमों का पालन करना चाहिए। इस अवधि में तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूर रहे हैं। 
शौंच करने के बाद कांवड़िये को स्नान करना बेहद जरुरी है और इसके बाद भी कांवड़ को उठाना चाहिए। दरअसल, बिना स्नान किए कांवड़ यात्रा उठाना उचित नहीं माना जाएगा। 
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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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