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कंपनियों की नहीं चलेगी मनमानी, सरकार ने एडिबल ऑयल के लिए तय किए 9 स्टैंडर्ड साइज

कंपनियों की नहीं चलेगी मनमानी, सरकार ने एडिबल ऑयल के लिए तय किए 9 स्टैंडर्ड साइज

सरकार ने खाने के तेल की बिक्री को लेकर नया नियम लागू किया है. अब तेल बनाने और आयात करने वाली कंपनियां अपने उत्पाद केवल तय स्टैंडर्ड पैक साइज में ही बेच सकेंगी. इस कदम का उद्देश्य ग्राहकों को भ्रम से बचाना और अलग-अलग ब्रांडों की कीमतों की तुलना को आसान बनाना है.

Khabar Monkey

कंपनियों की नहीं चलेगी मनमानी, सरकार ने एडिबल ऑयल के लिए तय किए 9 स्टैंडर्ड साइज
कंपनियों की नहीं चलेगी मनमानी, सरकार ने एडिबल ऑयल के लिए तय किए 9 स्टैंडर्ड साइज

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नए नियम के तहत अब खाने के तेल की बिक्री केवल 9 तय स्टैंडर्ड साइज के पैक में ही की जा सकेगी. सरकार का मानना है कि इससे ग्राहकों को अलग-अलग ब्रांडों के बीच कीमतों की तुलना करने में आसानी होगी और कंपनियां पैक साइज के जरिए भ्रम पैदा नहीं कर पाएंगी.

9 स्टैंडर्ड साइज में मिलेगा तेल

नए नियम के अनुसार खाने के तेल की पैकेजिंग को 200 मिलीलीटर से लेकर 20 लीटर तक के 9 मानक साइज तक सीमित कर दिया गया है. फिलहाल बाजार में कई तरह के अलग-अलग साइज के पैक उपलब्ध हैं, जिससे उपभोक्ताओं के लिए सही कीमत का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है.

इन तेलों पर लागू होगा नियम

यह नियम देश में तैयार होने वाले और विदेशों से आयात किए जाने वाले सभी प्रमुख खाने के तेलों पर लागू होगा. इसमें पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल, सूरजमुखी तेल, सरसों तेल और मूंगफली तेल जैसे उत्पाद शामिल हैं. सरकार ने कंपनियों को नए नियम लागू करने के लिए तीन महीने की मोहलत दी है. इसके बाद सभी कंपनियों को निर्धारित पैक साइज में ही उत्पाद बेचने होंगे. साथ ही जिन पैकेटों पर तेल की मात्रा (वॉल्यूम) लिखी होगी, वहां उसके बराबर वजन की जानकारी भी देना अनिवार्य होगा.

छोटे पैक को मिली छूट

सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि कम आय वाले उपभोक्ताओं के लिए छोटे और सस्ते पैक उपलब्ध रहें. इसलिए 200 मिलीलीटर से कम क्षमता वाले कुछ पैक और कुछ विशेष श्रेणी के तेलों को इस नियम से छूट दी गई है. उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुसार यह फैसला तेल उद्योग से जुड़े संगठनों के साथ चर्चा के बाद लिया गया है. जिन उद्योग संगठनों से बातचीत की गई, वे देश के एडिबल ऑयल सेक्टर की लगभग 90 प्रतिशत कंपनियों का प्रतिनिधित्व करते हैं. सरकार का मानना है कि इस कदम से बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी, ग्राहकों को बेहतर विकल्प मिलेंगे और कंपनियों की मनमानी पर रोक लगेगी.

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