मध्य-पूर्व में तनाव के बीच अप्रैल में भारत की थोक महंगाई दर तेजी से बढ़कर 8.3% हो गई, जो मौजूदा सीरीज में सबसे ज्यादा है. इसकी मुख्य वजह ईंधन और कच्चे तेल की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी है, जिसका असर पूरी इकोनॉमी पर पड़ा है.
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थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई दर मार्च के 3.88% से बढ़कर अप्रैल में 8.3% हो गई. इसकी मुख्य वजह मिनरल ऑयल, कच्चा पेट्रोलियम और नेचुरल गैस, धातु और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी है. ये आंकड़े रिटेल और थोक महंगाई के ट्रेंड्स के बीच बढ़ते अंतर को दिखाते हैं. अब प्रोड्यूसर्स की लागत तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि ग्लोबल कमोडिटी और एनर्जी की ऊंची कीमतें डोमेस्टिक सप्लाई चेन में भी असर डाल रही हैं.
तेल की कीमतों का असर
ईंधन और बिजली की महंगाई दर एक महीने पहले के 1.05% से बढ़कर अप्रैल में 24.71% हो गई. यह जियो-पॉलिटिकल तनाव के बीच ग्लोबल एनर्जी कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी को दिखाता है. कच्चे पेट्रोलियम और नेचुरल गैस की महंगाई दर 67.18% बढ़ गई. आंकड़ों से पता चलता है कि कीमतों का दबाव अब सिर्फ ईंधन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा बढ़ रहा है.
मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई दर मार्च के 3.39% से बढ़कर अप्रैल में 4.62% हो गई. इसमें केमिकल्स, टेक्सटाइल और बेसिक मेटल्स की मुख्य भूमिका रही. बेसिक मेटल्स की महंगाई दर बढ़कर 7% हो गई, जबकि केमिकल्स और केमिकल प्रोडक्ट्स की महंगाई दर बढ़कर 5.09% हो गई.





