Gorakhpur: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज अपने गृह जनपद गोरखपुर में आयोजित ‘प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन’ को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने समाज के प्रबुद्ध जनों—डॉक्टरों, इंजीनियरों, शिक्षकों और विचारकों—को समाज की दिशा तय करने वाला सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। इस दौरान सीएम ने भारत की प्राचीन संस्कृति, वैश्विक संकट और उत्तर प्रदेश के बदलते स्वरूप पर बेबाकी से अपनी राय रखी।
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‘प्रबुद्ध वर्ग समाज का मार्गदर्शक’
सीएम योगी ने कहा कि प्रबुद्ध वर्ग समाज का असली मार्गदर्शक है और भारत ने सदियों से विद्वानों का सम्मान किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज को सही दिशा देने में प्रबुद्ध जनों की भूमिका सबसे अहम है। संबोधन के दौरान जब ‘जय श्रीराम’ की गूंज हुई, तो सीएम ने कहा कि आज हर तरफ यह उद्घोष भारत की सांस्कृतिक जागृति का प्रतीक है।
वैश्विक संकट और पीएम मोदी की अपील का जिक्र
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने वैश्विक शांति और स्थिरता की बात की। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए हर नागरिक को ईंधन बचाने के लिए प्रयास करने चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि भारत का दर्शन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का है, जहाँ पूरा विश्व एक परिवार माना जाता है। सीएम ने गर्व से कहा, “भारत की संस्कृति सबसे प्राचीन है और हमने कभी किसी पर जबरन कब्जा नहीं किया।”
2017 से पहले और अब का उत्तर प्रदेश
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले यूपी में न विकास था, न बिजली और न ही नौकरियां। उन्होंने कहा, “पहले यूपी में इंसेफ्लाइटिस का खतरा मासूमों की जान लेता था, लेकिन आज स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार से स्थितियां बदल गई हैं।” उन्होंने कोविड काल का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने अपने हर नागरिक को फ्री वैक्सीन देकर दुनिया के सामने नजीर पेश की है।
मातृभूमि का सम्मान सर्वोपरि
भावुक होते हुए सीएम योगी ने कहा कि “मां और मातृभूमि से बढ़कर कुछ नहीं है।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आज पूरी दुनिया के अंदर भारत का सम्मान बढ़ा है। सम्मेलन में मौजूद प्रबुद्ध वर्ग से उन्होंने अपील की कि वे एक विकसित और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाते रहें।





