कोरोना को मैनेज करने वाले पूर्व नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के पूर्व चीफ सुजीन सिंह ने इबोला को बेहद घातक बताया है. ये नया वेरिएंट और अफ्रीका में तेजी से फैलता संक्रमण दुनिया के लिए चिंता बनता जा रहा है. बताया जा रहा है कि अगर ये वायरस इंसान को चपेट में ले लेता है तो मौत का खतरा 50 फीसदी तक बना रहता है. अफ्रीकी देशों में फैल रहे इबोला वायरस को लेकर भारत में सतर्कता बढ़ा दी गई है.

कोरोना महामारी के दौरान देश में निगरानी और संक्रमण नियंत्रण की जिम्मेदारी संभाल चुके नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) के पूर्व प्रमुख डॉ सुजीत सिंह ने इबोला को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की हैं.
मौत का खतरा 50 फीसदी तक
डॉ सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि इबोला में मौत का खतरा 30 से 50 फीसदी तक हो सकता है. इस बार डीआर कांगो में फैला संक्रमण इसलिए ज्यादा चिंता का विषय है क्योंकि इसमें वायरस का नया वेरिएंट सामने आया है. उन्होंने बताया कि यह प्रकोप ऐसे दूरदराज इलाकों में फैला है जहां स्वास्थ्य सुविधाएं और टेस्टिंग व्यवस्था बेहद कमजोर है. अब तक 900 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन असली संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है क्योंकि कई मरीजों की जांच तक नहीं हो पा रही.
डॉ सुजीत सिंह ने बताया कि संक्रमण डीआर कांगो से युगांडा और फिर सूडान तक पहुंच चुका है. यही वजह है कि दुनिया भर के देशों को सतर्क रहने और अपनी तैयारियों की समीक्षा करने को कहा गया है. भारत में भी एयरपोर्ट स्क्रीनिंग, अस्पतालों की तैयारी, आइसोलेशन रूम, क्वॉरेंटाइन सुविधा और टेस्टिंग सिस्टम की समीक्षा लगातार की जा रही है.
इबोला और कोरोना में बड़ा फर्क
उन्होंने कहा कि इबोला और कोरोना में बड़ा फर्क है. कोरोना हवा के जरिए तेजी से फैलता था, जबकि इबोला संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के स्राव या सीधे संपर्क से फैलता है. राहत की बात यह है कि इबोला में लक्षण आने से पहले संक्रमण नहीं फैलता. इसलिए थर्मल स्क्रीनिंग और समय पर जांच से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.
डॉ सुजीत सिंह ने 2014-16 के इबोला संकट का उदाहरण देते हुए बताया कि उस दौरान भारत में एक मरीज मिला था. उसके शरीर में वायरस पाए जाने के बाद कई महीनों तक निगरानी रखी गई थी और पूरी तरह निगेटिव होने के बाद ही उसे घर भेजा गया. उन्होंने कहा कि इबोला में शुरुआत में सामान्य बुखार और कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं, लेकिन गंभीर मामलों में मुंह या मल के रास्ते ब्लीडिंग शुरू हो जाती है, जो जानलेवा साबित होती है.
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चमगादड़ों से इंसान में आता है ये वायरस
डॉ सिंह के अनुसार यह वायरस चमगादड़ों से इंसानों में आता है और फिर इंसान से इंसान में फैलता है. बुजुर्ग, बच्चे और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोग इसके सबसे ज्यादा खतरे में रहते हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों को सलाह दी है कि जिन देशों में इबोला का प्रकोप है वहां गैर जरूरी यात्रा से बचें. अगर यात्रा जरूरी हो तो संक्रमित या संदिग्ध लोगों के संपर्क में आने से बचें और लौटने के बाद अपनी सेहत की निगरानी करें.
सरकार की तैयारियां
सरकार की ओर से जॉइंट मॉनिटरिंग ग्रुप की बैठक हो चुकी है. स्वास्थ्य मंत्रालय, एनसीडीसी और राज्यों के अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं. देश के 33 एयरपोर्ट्स और एंट्री पॉइंट्स पर थर्मल स्क्रीनिंग, आइसोलेशन रूम और क्वॉरेंटाइन व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल भारत में इसके बड़े स्तर पर फैलने का खतरा कम है, लेकिन लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है, घबराने की नहीं.





