रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सेंट्रल बोर्ड में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं. केंद्र सरकार ने बोर्ड में तीन नए गैरआधिकारिक सदस्यों को शामिल किया है. इन तीन नए नामों में पूर्व राजनयिक सैयद अकबरुद्दीन, अर्थशास्त्री जन्मेजय कुमार सिन्हा के साथ पूर्व वरिष्ठ वित्त मंत्रालय अधिकारी एनी जॉर्ज मैथ्यू शामिल हैं. कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 8 के तहत इन नियुक्तियों को मंजूरी दी है. ये फैसला शनिवार को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा जारी आदेश के बाद तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है.

दिग्गजों से भरी है नई टीम
जिन तीन हस्तियों को ये जिम्मेदारी मिली है, वे अपनेअपने क्षेत्रों के दिग्गज माने जाते हैं. 66 वर्षीय सैयद अकबरुद्दीन संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि रह चुके हैं. सैयद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के रूप में भी अपनी शानदार सेवाएं दे चुके हैं. फिलहाल वे हैदराबाद के कौटिल्य स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी से जुड़े हुए हैं.
दूसरे सदस्य 66 वर्षीय जन्मेजय कुमार सिन्हा एक जानेमाने अर्थशास्त्री तथा मैनेजमेंट कंसल्टेंट हैं. सिन्हा बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप में वरिष्ठ नेतृत्व वाले पदों पर रहे हैं. उन्होंने बीसीजी एशियापैसिफिक के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया है. वे वित्तीय क्षेत्र के सुधारों से संबंधित कई सरकारी समितियों से भी जुड़े रहे हैं.
तीसरी सदस्य 62 वर्षीय एनी जॉर्ज मैथ्यू हैं. वे वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग में विशेष सचिव रह चुकी हैं. वर्तमान में मैथ्यू सोलहवें वित्त आयोग की पूर्णकालिक सदस्य हैं. भारतीय लेखा परीक्षा तथा लेखा सेवा की अधिकारी रहीं मैथ्यू के पास पब्लिक फाइनेंस, वित्तीय प्रबंधन तथा सरकारी ऑडिट में तीन दशक से ज्यादा का लंबा अनुभव है.
बोर्ड में संख्या बढ़कर 14 हुई
इन तीन नए नामों के जुड़ने से आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड की ताकत काफी बढ़ गई है. अब तक गवर्नर समेत कुल सदस्यों की संख्या 11 थी. नई नियुक्तियों के बाद ये आंकड़ा 14 पर पहुंच गया है. सरकार द्वारा चुने गए ये सभी नए सदस्य चार साल की अवधि तक अपने पद पर बने रहेंगे. या फिर सरकार के अगले आदेश तक इनकी नियुक्ति मान्य रहेगी. भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में इन सदस्यों का अहम रोल होगा.
पिछले हफ्ते भी हुई थी नियुक्ति
सरकार लगातार बोर्ड को मजबूत करने का काम कर रही है. बीते हफ्ते ही सरकार ने अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के चेयरमैन एस. सोमनाथ को इस बोर्ड में शामिल किया था. उनके साथ ही महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा को भी आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड में जगह दी गई थी. इस तरह की नियुक्तियों से बोर्ड में अलगअलग क्षेत्रों की विशेषज्ञता जुड़ती है. आरबीआई का सेंट्रल बोर्ड केंद्रीय बैंक के कामकाज की देखरेख करने में एक बड़ी भूमिका निभाता है. इन सदस्यों के जुड़ने से मौद्रिक, वित्तीय तथा आर्थिक नीतियों के निर्धारण में काफी मदद मिलती है.