भारत और UK में बिजनेस और इंडस्ट्री ग्रुप्स ने बुधवार से लागू होने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का स्वागत किया है. इससे टैरिफ में भारी कटौती होगी और सामान व सेवाओं के दोनों तरफ ज्यादा आवाजाही से आपसी व्यापार को बढ़ावा मिलेगा. पिछले साल जुलाई में, 14 दौर की बातचीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूके के उनके समकक्ष कीर स्टार्मर के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि उम्मीद है कि इससे 2030 तक दोनों देशों के बीच मौजूदा सालाना व्यापार कम से कम दोगुना हो जाएगा और लंबे समय में हर साल उनकी GDP में भी लगभग 5 बिलियन पाउंड की बढ़ोतरी होगी. ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा अलग से बताए गए UK सरकार के अनुमानों के अनुसार, लंबे समय में GDP को होने वाला फ़ायदा और भी ज़्यादा होगा. 2040 तक यह 4.8 बिलियन पाउंड तक पहुंच सकता है, साथ ही आपसी व्यापार में 25.5 बिलियन पाउंड की बढ़ोतरी का अनुमान है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ने इस मौके पर क्या कहा…

AEPC ने डील का किया स्वागत
अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ने भी भारतयूनाइटेड किंगडम फॉरेन ट्रेड एग्रीमेंट के लागू होने का स्वागत किया. इसे एक बड़ा बदलाव लाने वाला मील का पत्थर बताते हुए कहा गया कि इससे भारत के कपड़ों के निर्यात को काफी मजबूती मिलेगी, ग्लोबल वैल्यू चेन के साथ जुड़ाव गहरा होगा और इंटरनेशनल ब्रांड्स के लिए भारत एक पसंदीदा सोर्सिंग डेस्टिनेशन के तौर पर और मजबूत होगा. 15 जुलाई, 2026 से लागू हुए इस समझौते के तहत, यूनाइटेड किंगडम को होने वाले भारतीय निर्यात के लगभग 99 प्रतिशत हिस्से को ड्यूटीफ्री एक्सेस मिलेगा, जिससे भारत के लेबरइंटेंसिव कपड़ा सेक्टर को बड़ा कॉम्पिटिटिव फायदा मिलेगा. इस घटनाक्रम का स्वागत करते हुए AEPC के चेयरमैन डॉ. ए शक्तिवेल ने कहा कि भारतUK FTA का लागू होना भारत के टेक्सटाइल और अपैरल इंडस्ट्री के लिए एक अहम मोड़ है. इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को UK मार्केट में काफी कॉम्पिटिटिव बढ़त मिलेगी, मार्केट तक पहुंच बढ़ेगी, निवेश आएगा, रोजगार पैदा होंगे और ग्लोबल टेक्सटाइल और अपैरल वैल्यू चेन में भारत की स्थिति मजबूत होगी.
अपेरल इंडस्ट्री के लिए अहम है ये डील
डॉ. शक्तिवेल ने कहा कि भारत ट्रेड डिप्लोमेसी के एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है. ये समझौते सिर्फ टैरिफ कम करने के बारे में नहीं हैं—ये भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन के साथ और गहराई से जोड़ने और देश को ऐसे इंटरनेशनल ब्रांड्स के लिए पसंदीदा सोर्सिंग डेस्टिनेशन बनाने के बारे में हैं जो मजबूत, भरोसेमंद और टिकाऊ मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर की तलाश में हैं. भारत की खूबियों पर जोर देते हुए डॉ. शक्तिवेल ने कहा कि देश में दुनिया के कुछ गिनेचुने इंटीग्रेटेड फाइबरटूफैशन इकोसिस्टम में से एक है, जिसमें कपास की खेती, कताई, बुनाई, प्रोसेसिंग और गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग शामिल हैं. यह इंटीग्रेटेड वैल्यू चेन भारतीय एक्सपोर्टर्स को ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ की जरूरतों को ज्यादा बेहतर ढंग से पूरा करने में मदद करती है. साथ ही, यह सप्लाई चेन में ज़्यादा पारदर्शिता, ट्रेसेबिलिटी और भरोसेमंदता भी देती है—ऐसी खूबियाँ जिन्हें ग्लोबल खरीदार तेज़ी से पसंद कर रहे हैं.
भारत को होगा काफी फायदा
उन्होंने कहा कि आज के व्यापार के माहौल में, कॉम्पिटिटिवनेस सिर्फ टैरिफ़ तक सीमित नहीं है. ग्लोबल खरीदार ऐसे सप्लायर्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं जो नियमों का पालन, सस्टेनेबिलिटी, डिजिटल ट्रेसेबिलिटी, ज़िम्मेदार मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन की मज़बूती दिखा सकें. भारत का इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम और इंडियाUK FTA के फायदे देश को ग्लोबल सोर्सिंग में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने की मज़बूत स्थिति में लेकर आएंगे. डॉ. शक्तिवेल ने कहा कि सरकार की पहल जैसे PM MITRA पार्क, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम, लॉजिस्टिक्स में सुधार और व्यापार को आसान बनाने वाले उपाय भारत की कॉम्पिटिटिवनेस को और बढ़ाएंगे. डॉ. शक्तिवेल ने कहा कि इंडियाUK FTA सिर्फ एक ट्रेड डील नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक साधन है जो सोर्सिंग के फैसलों को नया रूप देगा, ग्लोबल वैल्यू चेन में भारत की भूमिका को मजबूत करेगा और एक्सपोर्ट से होने वाली ग्रोथ को तेज़ करेगा.