दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी ने अमेरिका में एक बड़ी जीत हासिल की है. अमेरिकी न्याय विभाग (Justice Department) ने उनके खिलाफ चल रहे सभी कानूनी विवादों को वापस लेने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया है. यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब अडानी समूह ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पंख लगाने के लिए वहां 10 अरब डॉलर के निवेश की योजना पेश की है.

10 अरब डॉलर के इन्वेस्टमेंट ने बदली तस्वीर?
ट्रंप प्रशासन ने सोमवार को गौतम अडानी और उनकी कंपनियों के खिलाफ चल रही सभी पुरानी कानूनी अड़चनों को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में तेजी से काम किया है. दुनिया के सबसे प्रभावशाली उद्योगपतियों में शुमार गौतम अडानी की यह जीत उनके बेदाग व्यापारिक दृष्टिकोण को दर्शाती है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी समूह अमेरिका में 10 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश कर वहां के बुनियादी ढांचे और विकास में बड़ी भूमिका निभाना चाहता है. इस मेगा-इन्वेस्टमेंट को धरातल पर उतारने के लिए इन पुराने कानूनी मामलों का खत्म होना बहुत जरूरी था, जिस पर अब अमेरिकी प्रशासन ने भी अपनी सकारात्मक मुहर लगा दी है.
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अमेरिकी एजेंसियों के साथ हुए अहम और पारदर्शी समझौते अपने वैश्विक विस्तार को नई रफ्तार देते हुए, अडानी समूह ने वित्तीय और नागरिक मामलों को भी पूरी तरह से सुलझा लिया है. अमेरिकी वित्त विभाग (Department of Treasury) के साथ सोमवार को 275 मिलियन डॉलर का एक अहम समझौता तय हुआ है. इसके साथ ही, ‘सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन’ (SEC) के साथ चल रहे एक पुराने विवाद को भी कंपनी ने पूरी पारदर्शिता के साथ आपसी सहमति से हल कर लिया है, जिसे अब बस अमेरिकी अदालत से औपचारिक रूप से मंजूरी मिलनी बाकी है.
बाजार के लिए इसके क्या मायने हैं?
निवेशक के तौर पर यह समझना बहुत जरूरी है कि अमेरिका जैसे सख्त और कड़े नियमों वाले देश में सभी कानूनी प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक पार करना किसी भी भारतीय कंपनी के लिए बहुत बड़े गर्व की बात है. इन अंतरराष्ट्रीय बाधाओं के पूरी तरह खत्म होने से न सिर्फ अडानी समूह की ग्लोबल साख और ज्यादा मजबूत होगी, बल्कि विदेशी बाजार में उनके अटके हुए प्रोजेक्ट्स अब दोगुनी रफ्तार से आगे बढ़ेंगे. जब 10 अरब डॉलर का यह भारी निवेश अमेरिकी बाजार में पहुंचेगा, तो यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत और अडानी समूह की धाक को और मजबूत करेगा.





