कनाडा अब दुनिया के तेल बाजार में एक बड़ी ताकत बनने की तैयारी कर रहा है. प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने देश के कच्चे तेल को दुनिया भर में पहुंचाने के लिए एक बड़े प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है. इस प्रोजेक्ट का नाम पैसिफिक लिंक पाइपलाइन है. इसके जरिए हर दिन 10 लाख बैरल कच्चा तेल प्रशांत तट तक पहुंचाया जाएगा. अभी तक कनाडा अपने कच्चे तेल के निर्यात के लिए पूरी तरह से अमेरिका पर निर्भर था. लेकिन अब इस नई पाइपलाइन से तेल सीधे एशिया के बड़े बाजारों में भेजा जाएगा. सरकार ने इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय हित का करार दिया है. तेल व्यापार के जरिए अब कनाडा अपनी अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा देना चाहता है.

तेल बाजार में अमेरिका का दबदबा होगा खत्म
आज के समय में कनाडा के अल्बर्टा प्रांत का करीब 90 प्रतिशत तेल सिर्फ अमेरिका को बेचा जाता है. सरकार इसे तेल व्यापार की सबसे बड़ी कमजोरी मानती है. पैसिफिक लिंक पाइपलाइन शुरू होने के बाद तेल के मामले में अमेरिका पर निर्भरता 65 से 70 प्रतिशत तक कम हो जाएगी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की व्यापारिक नीतियों ने कनाडा को काफी परेशान किया है. इसी वजह से पीएम कार्नी अमेरिका के आर्थिक चंगुल से बाहर निकलकर एशिया में अपना तेल बेचना चाहते हैं. ये नई पाइपलाइन अल्बर्टा के ब्रूडरहाइम से शुरू होकर ब्रिटिश कोलंबिया के डेल्टा बंदरगाह तक बिछाई जाएगी. इसकी कुल लंबाई 1250 किलोमीटर होगी.
अल्बर्टा के तेल उद्योग को मिलेगी नई उड़ान
ये पूरी खबर सिर्फ तेल बेचने की नहीं है, बल्कि देश की राजनीति से भी जुड़ी है. कनाडा का अल्बर्टा प्रांत कच्चे तेल का सबसे बड़ा गढ़ है. यहां के लोग काफी समय से शिकायत कर रहे हैं कि सरकार उनके तेल उद्योग को बढ़ने नहीं दे रही है. इसी नाराजगी में अल्बर्टा के लोग कनाडा से अलग होने की मांग कर रहे हैं. इसके लिए 19 अक्टूबर को एक जनमत संग्रह भी होने वाला है. अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ का कहना है कि पुरानी सरकार ने तेल व्यापार को बहुत नुकसान पहुंचाया. अब इस नई पाइपलाइन के जरिए सरकार अल्बर्टा के तेल को विदेशी बाजार तक पहुंचाना चाहती है, ताकि वहां का तेल उद्योग फलेफूले और देश टूटने से बच जाए.
भारी निवेश के सामने कई बड़ी चुनौतियां
कच्चे तेल को समंदर तक पहुंचाने वाले इस प्रोजेक्ट की लागत 25 से 31 अरब डॉलर के बीच होगी. संघीय सरकार शुरुआत में 2.8 अरब डॉलर का निवेश कर रही है. इसमें पेम्बिना पाइपलाइन कॉर्प जैसी प्राइवेट कंपनी भी पैसा लगाएगी. सरकार का दावा है कि इस तेल पाइपलाइन से टैक्स देने वाले आम लोगों को भी बहुत बड़ा मुनाफा होगा.
हालांकि इतनी बड़ी तेल पाइपलाइन बिछाना आसान काम नहीं है. इलाके के मूल निवासी और पर्यावरण समूह इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं. सरकार ने इन मूल निवासियों की नाराजगी दूर करने के लिए उन्हें प्रोजेक्ट में 10 प्रतिशत मालिकाना हक देने का ऑफर दिया है. इसके अलावा तेल का उत्पादन बढ़ने से प्रदूषण बढ़ने का भी खतरा है. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ, तो ये तेल पाइपलाइन 2032 या 2033 तक पूरी तरह से काम करना शुरू कर देगी.