कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी की ओर से रविवार को कालीघाट में बुलाई गई बैठक पूरी तरह से विफल रही। सूत्रों के अनुसार, तृणमूल के 80 विधायकों में से केवल 20 विधायक ही मौजूद थे। जिलों से आए कई विधायक दिन की बैठक में शामिल नहीं हो पाए। अधिकांश विधायकों की अनुपस्थिति के कारण बैठक को रद्द करने का फैसला लिया गया। वहीं टीएमसी ने सोमवार को हर क्षेत्र, ब्लॉक और वार्ड में विरोध रैलियां आयोजित करने का आह्वान किया गया है। इसके साथ ही ममता बनर्जी 2 जून को रानी राशमोनी रोड पर धरना प्रदर्शन करने वाली हैं।

ममता ने बुलाई थी बैठक
दरअसल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के बाद कालीघाट में तृणमूल सुप्रीमो के दफ्तर में हर सप्ताह बैठकें हो रही हैं। कभी जीतने वाले विधायकों को बुलाया जाता है, तो कभी हारे हुए उम्मीदवारों को। इसके अलावा कभी-कभी दूसरे जन-प्रतिनिधियों को भी बुलाया जाता है। रविवार को टीएमसी के सभी विधायकों को बुलाया गया था। चूंकि इस बार तृणमूल के उम्मीदवारों ने 80 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि बीजेपी 208 सीटों पर विजयी रही।
तीन-चौथाई विधायक गैर-हाजिर
हालांकि टीएमसी के 80 विधायकों में से इस खास बैठक में तीन-चौथाई विधायक गैर-हाजिर रहे। नतीजतन ममता बनर्जी की तय बैठक नहीं हो पाई। दरअसल चुनावी हार के बाद से ही तृणमूल के अंदर ‘बगावत’ के संकेत साफ नजर आने लगे हैं। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या आज विधायकों की गैर-हाजिरी असल में उसी बगावत का एक रूप है।
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टीएमसी ने दी सफाई?
हालांकि टीएमसी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि शनिवार को सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हुए भयानक हमले को देखते हुए अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के विधायक इस समय अलग-अलग संगठनात्मक कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। कई इलाकों में पुलिस ने हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया है और उन्हें धमकियां दी हैं। विधायकों ने खुद ही गुजारिश की थी कि उन्हें कुछ समय की छुट्टी दी जाए। इसलिए, दोपहर करीब 3:00 बजे हमने तय किया कि जो लोग आए हैं, उनसे ही मिला जाए और बैठक को कुछ समय के लिए टाल दिया जाए। हालांकि उन्होंने आगे यह भी ऐलान किया कि तृणमूल पार्टी सोमवार से सड़कों पर उतरेगी।











