शनिवार, 1 अगस्त 2026 ब्रेकिंग
अजिंक्य रहाणे के संन्यास के बाद अब ये खिलाड़ी संभाल सकता है IPL 2027 में KKR की कप्तानी​ | Litton Das की Australia टेस्ट में वापसी, Bangladesh क्रिकेट का बड़ा दांव​ | PF Withdrawal Rules 2026: बेरोजगार होने पर कितना पैसा मिलेगा, कितना रहेगा लॉक?​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Viral

अब तो सुन लो सरकार… आजादी के 78 साल बाद भी नहीं बना पक्का पुल, जान हथेली में रखकर पार करते हैं नदी​

Kanpur News: एक तरफ देश में विकास की नई इबारत लिखने के दावे किए जा रहे हैं. एक्सप्रेसवे, हाईवे और आधुनिक पुलों का जाल बिछाया जा रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात का एक गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है. आजादी के 78 साल बाद भी रसूलाबाद विकासखंड […]

Kanpur News: एक तरफ देश में विकास की नई इबारत लिखने के दावे किए जा रहे हैं. एक्सप्रेसवे, हाईवे और आधुनिक पुलों का जाल बिछाया जा रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात का एक गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है. आजादी के 78 साल बाद भी रसूलाबाद विकासखंड की ग्राम पंचायत मिर्जापुर लकोठिया के मजरा बंदरहा में पांडु नदी पर स्थायी पुल नहीं बन सका है. मजबूरी में यहां के ग्रामीण लकड़ी और बांस के सहारे बने जर्जर अस्थायी पुल से अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को विवश हैं.

जानकारी के मुताबिक, मामला कानपुर देहात का है, जहां बंदरहा, बकीठिया, लकोठिया, कोला और पछियान पुरवा समेत दर्जनों गांवों के हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी इसी अस्थायी पुल पर निर्भर है. वर्षों पहले ग्रामीणों ने आरसीसी के खंभों पर लकड़ी और बांस रखकर यह पुल तैयार किया था. समय के साथ यह पुल जर्जर होता गया, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.

जर्जर पुल से गुजरने को मजबूर

ग्रामीणों का कहना है कि यदि वे इस पुल का इस्तेमाल न करें तो उन्हें मूलभूत सुविधाओं तक पहुंचने के लिए करीब 15 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है. ऐसे में हर दिन लोग अपनी जान हथेली पर रखकर इस पुल से गुजरते हैं. सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को होती है. बरसात के मौसम में पुल और भी खतरनाक हो जाता है. बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक रोज उन्हें पुल तक छोड़ने आते हैं और स्कूल की छुट्टी के समय वापस पुल पर पहुंचकर उनका इंतजार करते हैं. कई बार मातापिता बच्चों के बैग अपने कंधों पर उठाकर उन्हें सुरक्षित पुल पार कराते हैं.

महिलाओंबुजुर्गों को होती है परेशानी

मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह रास्ता किसी परीक्षा से कम नहीं है. आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुंचने में देरी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है. वहीं किसान भी अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने के लिए इसी पुल पर निर्भर हैं, जिससे उन्हें हर दिन जोखिम उठाना पड़ता है.

ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि बड़ेबड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव की समस्याएं भुला दी जाती हैं. विकास के तमाम दावों के बीच कानपुर देहात का यह गांव आज भी एक स्थायी पुल का इंतजार कर रहा है. अब ग्रामीणों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द पांडु नदी पर मजबूत पुल का निर्माण कराए, ताकि हजारों लोगों की जिंदगी रोजरोज खतरे में न पड़े.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY