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अगर चंद्र दोष से हैं परेशान तो सोमवार को जरूर करें ये काम, कुंडली में चंद्रमा की स्थिति होगी मजबूत

Chandra Dosh Upay Aur Lakshan: अगर व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा कमजोर रहता है उसे मानसिक अशांति के साथ ही दूसरी कई दिक्कतें झेलनी पड़ती है। चंद्र दोष से पीड़ित व्यक्ति को छोटी-छोटी बातें विचलित कर देती है। चंद्रमा को ‘मन का कारक’ माना गया है। यदि कुंडली में चंद्रमा कमजोर है तो व्यक्ति मानसिक अस्थिरता, घबराहट और नकारात्मक विचारों से घिरा रहता है। तो आइए जानते हैं कि चंद्र दोष दूर करने के लिए क्या उपाय करने चाहिए।

Khabar Monkey

अगर चंद्र दोष से हैं परेशान तो सोमवार को जरूर करें ये काम, कुंडली में चंद्रमा की स्थिति होगी मजबूत
अगर चंद्र दोष से हैं परेशान तो सोमवार को जरूर करें ये काम, कुंडली में चंद्रमा की स्थिति होगी मजबूत

कुंडली में चंद्रमा मजबूत करने के लिए सोमवार को करें ये उपाय

  1. भगवान शिव का जलाभिषेक- चंद्र दोष दूर करने के लिए महादेव की पूजा अत्यंत फलदायी होता है। सोमवार के दिन शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करें। अभिषेक करते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘ॐ सों सोमाय नमः’ का जाप करें। इस उपाय से कुंडली में चंद्रमा मजबूत होगा।

  2. चांदी धारण करें- चांदी को चंद्रमा का धातु माना गया है। ऐसे में सोमवार के दिन दाहिने हाथ की कनिष्ठा उंगली में चांदी की अंगूठी पहनें या गले में चांदी का चंद्रमा लॉकेट धारण करें।

  3. चंद्र दर्शन- सोमवार की रात चंद्रोदय के समय चंद्रमा का अर्घ्य दें और दर्शन करें। मान्यता है कि ऐसा करने मन की व्याकुलता शांत होती है और सकारात्मक विचारों का संचार होता है।

  4. सफेद वस्तुओं का दान- सोमवार के दिन किसी जरूरतमंद को चावल, चीनी, दूध, सफेद चंदन या सफेद वस्त्रों का दान करें। इन चीजों का दान करने से चंद्र दोष दूर होता है और चंद्रमा की स्थिति कुंडली में मजबूत होती है।

  5. मंत्र का जाप- सोमवार की रात को चंद्रमा के मंत्र ‘ॐ सों सोमाय नमः’ का जाप करें। इस मंत्र का जाप करने से चंद्र दोष का प्रभाव कम होता है।

  6. सोमवार व्रत: सोमवार के दिन व्रत रखें। इस दिन नमक का सेवन न करें तो और भी बेहतर है। सोमवार का व्रत करने भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और कुंडली में चंद्रमा भी मजबूत होता है।

चंद्र दोष के लक्षण क्या होता है?

  • एकाग्रता में कमी आना
  • सर्दी-जुकाम की समस्या बने रहना
  • बिना कारण मन में घबराहट या भय रहना
  • बहुत ज्यादा भावुक होना
  • माता के साथ वैचारिक मतभेद होना
  • डिप्रेशन (अवसाद) जैसी स्थिति बनी रहना

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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