अरबपति मुकेश अंबानी की कैंपा कोला, कोका कोला और पेप्सिको के बीच मार्केट शेयर की लड़ाई दुनिया के सबसे बड़े कंज्यूमर मार्केट में लगातार तीखी होती जा रही है. इस जंग को जीतने के लिए तीनों जाएंट किसी भी हद से गुजरने को तैयार हैं. अब तो पेप्सिको और कोक ने दुकानदारों को फ्री में फ्रिज भी देना शुरू कर दिया है. साथ ही रिलायंस भी अपने कंजयूमर गुड्स यूनिट को आगे बढ़ाने के लिए कुछ ऐसा ही कदम उठा रहा है.

जानकारी के अनुसार रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंज्यूमर गुड्स यूनिट और अमेरिकी कोला दिग्गज अपने एक्सपेंशन कैंपेन पर हैं, और पूरे भारत में छोटी-बड़ी दुकानों में कमर्शियल रेफ्रिजरेटर लगा रहे हैं. ब्लू स्टार लिमिटेड में यूनिटरी कूलिंग प्रोडक्ट्स के ग्रुप प्रेसिडेंट मोहित सूद ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा कि इन तथाकथित ‘विजी-कूलर्स’ (visi-coolers) की ग्रोथ के पीछे यह भी एक वजह है. सूद ने कहा कि इस सेगमेंट में एक खास तरह की तेजी है और साथ ही यह भी जोड़ा कि यह कैटेगरी ब्लू स्टार की सालाना ग्रोथ से भी ज्यादा तेजी से बढ़ रही है.
कमर्शियल कूलर्स का मार्केट
आईमार्क ग्रुप के मुताबिक, भारत में कमर्शियल फ्रिज का मार्केट-जिसमें विजी-कूलर्स भी शामिल हैं—2025 के 2.8 बिलियन से बढ़कर 2034 तक 3.9 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. भारत में कोला वॉर का यह नया दौर, खरीदारों का ध्यान खींचने की दशकों पुरानी मार्केटिंग रणनीति को फिर से तेज कर रहा है और वो है सेल्स बढ़ाने के लिए फ्रिज पर कब्जा करना. भारत के तेजी से बढ़ते बेवरेज मार्केट में तीन दशकों के बाद मुकाबला और भी कड़ा हो गया है. इसका कारण है रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के 10 रुपए ($0.1) वाले फिजी ड्रिंक कैंपा ने अमेरिकी सोडा दिग्गजों के दबदबे वाले बाजार में हलचल मचा दी है.
क्यों जरूरी है विजी-कूलर्स
इससे रेफ्रिजरेटर बनाने वाली कंपनियों के लिए भी एक समानांतर तेजी आई है—ब्लू स्टार और टाटा ग्रुप की वोल्टास से लेकर हायर एपलायंसिस जैसी ग्लोबल कंपनियों और वेस्टर्न रेफ्रिजेरेशन तक की सेल्स में इजाफा देखने को मिल रहा है. रिटेल आउटलेट इन शीशे के दरवाज़ों वाले डिस्प्ले यूनिट्स में बेवरेज को प्रमुखता से दिखाते हैं. ये यूनिट्स मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन के साधनों के तौर पर काम करती हैं. पेप्सिको की भारत में बॉटलिंग करने वाली कंपनी वरुण बेवरेजेस के चेयरमैन रवि जयपुरिया ने पिछले हफ्ते एक अर्निंग्स कॉल में कहा कि हम लगभग पांच लाख या उससे भी ज्यादा चिलिंग इक्विपमेंट जोड़ रहे हैं—जो कैंपा, कोक और हमारे बीच बंटे हुए हैं. उन्होंने आगे कहा कि इसके अलावा, अलग-अलग आउटलेट अपनी तरफ से भी 400,000 से 500,000 कूलर खरीद रहे हैं.
वरुण बेवरेजेस ने शुरू किया ज्वाइंट वेंचर
जयपुरिया ने कहा कि जो कोई भी बाजार में उतरने की अच्छी रणनीति अपनाएगा और जो कोई भी अपने डिस्ट्रीब्यूशन का विस्तार कर पाएगा, वही यह बाजी जीतेगा. वरुण ने पिछले साल एवरेस्ट इंटरनेशनल होल्डिंग्स के साथ मिलकर विजी-कूलर और फ्रिज बनाने के लिए एक जॉइंट वेंचर शुरू किया था. भारत की तेज गर्मी में आस-पड़ोस की किराना दुकानों का दबदबा – खासकर छोटे कस्बों और गांवों में – बड़ी कंज्यूमर कंपनियों की डिस्ट्रीब्यूशन स्ट्रेटेजी में कूलर्स को अहम बना देता है.
विकसित बाजारों के बड़े सुपरमार्केट के उलट, इन किराना दुकानों या छोटी खाने की जगहों पर रेफ्रिजरेशन के लिए जगह और पैसा कम होता है. इसलिए, कूलर लगाना सिर्फ एक मार्केटिंग टूल न होकर, रिटेल के लिए एक जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बन जाता है. कंसल्टेंसी फर्म ‘द नॉलेज कंपनी’ के चेयरमैन अरविंद सिंघल कहते हैं कि हर ब्रांड इसे लगाना चाहता है, चाहे वह कोक हो या पेप्सी. वे आगे कहते हैं कि जाहिर है, जब मार्केट शेयर के लिए मुकाबला होता है, तो इससे मदद मिलती है.
देश का चौथा सबसे बड़ा सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड
पिछले महीने पेश की गई एक इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन के मुताबिक, रिलायंस के ‘कैंपा’ ब्रांड ने 31 मार्च को खत्म हुए साल में 47 अरब रुपए (493 मिलियन डॉलर) से ज्यादा की सेल्स की. इसके साथ ही, यह देश का चौथा सबसे बड़ा ‘कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक्स’ ब्रांड बन गया है, जिसका अहम बाजारों में मार्केट शेयर दो अंकों में है. फाइनेंशियल डेटा प्लेटफॉर्म ‘टोफ्लर’ के आंकड़ों के अनुसार, कोका-कोला इंडिया ने मार्च 2025 को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में 51.7 अरब रुपए का सालाना रेवेन्यू दर्ज किया.
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वॉर बनेगा रुकावट
भारत के कोला सेगमेंट में मार्केट शेयर के लिए चल रही होड़ ने हाल के महीनों में इन फ्रिज बनाने वाली कंपनियों को काफी फायदा पहुंचाया है, लेकिन ईरान में चल रहे युद्ध के कारण पैदा हुई अनिश्चितता और सप्लाई चेन में आई रुकावटों से इस ग्रोथ को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है. हालांकि, इस साल भारत में गर्मी ज्यादा पड़ने और लंबे समय तक रहने के अनुमान से, इन फिजी ड्रिंक्स की मांग बढ़ने की उम्मीद है. पिछले महीने जारी ‘क्रिसिल रेटिंग्स’ के एक बयान के मुताबिक, इससे बेवरेज बनाने वाली कंपनियों को अपनी प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने और विजी-कूलर्स की संख्या में इजाफा करने पर लगातार खर्च करने का मौका मिलेगा.





