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World Parkinson’s Day: क्यों होती है यह बीमारी, आज तक क्यों नहीं मिल पाया इसका इलाज?

हर साल World Parkinson’s Day के मौके पर इस गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जाता है. पार्किंसन एक ऐसी स्थिति है जो धीरे-धीरे दिमाग और शरीर की मूवमेंट को प्रभावित करती है. समय के साथ इसके लक्षण बढ़ते जाते हैं, जिससे मरीज की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है. इसके कारणों की बात करें तो यह बीमारी मुख्य रूप से दिमाग में डोपामिन नामक केमिकल की कमी से जुड़ी होती है, जो शरीर की मूवमेंट को कंट्रोल करता है.

World Parkinson’s Day: क्यों होती है यह बीमारी, आज तक क्यों नहीं मिल पाया इसका इलाज?
World Parkinson’s Day: क्यों होती है यह बीमारी, आज तक क्यों नहीं मिल पाया इसका इलाज?

इसके अलावा बढ़ती उम्र, , दिमाग के सेल्स का धीरे-धीरे नष्ट होना और पर्यावरण में मौजूद हानिकारक तत्व जैसे प्रदूषण या केमिकल्स का असर भी इसके पीछे जिम्मेदार माने जाते हैं. कई मामलों में सिर की चोट या लंबे समय तक टॉक्सिन्स के संपर्क में रहना भी जोखिम बढ़ा सकता है. हालांकि, इसके सटीक कारण अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, जिससे इसे समझना और कंट्रोल करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. आइए जानते हैं कि इस बीमारी का आज तक इलाज क्यों नहीं मिल पाया है.

आज तक क्यों नहीं मिल पाया पार्किंसन बीमारी का इलाज?

दिल्ली में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राजेश कुमार बताते हैं कि पार्किंसन बीमारी का इलाज आज तक पूरी तरह संभव नहीं हो पाया है, क्योंकि यह सीधे दिमाग की जटिल संरचना और उसकी कार्यप्रणाली से जुड़ी होती है. इस बीमारी में दिमाग की वे सेल्स प्रभावित होती हैं, जो डोपामिन बनाती हैं, लेकिन इन सेल्स के नष्ट होने की असली वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है. यही कारण है कि वैज्ञानिक एक सटीक और स्थायी इलाज विकसित करने में सफल नहीं हो पाए हैं.

इसके अलावा यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती लक्षण इतने हल्के होते हैं कि अक्सर समय पर पहचान नहीं हो पाती. जब तक इसका पता चलता है, तब तक दिमाग को काफी नुकसान हो चुका होता है. वर्तमान में उपलब्ध दवाइयां केवल लक्षणों को कंट्रोल करती हैं, बीमारी को पूरी तरह खत्म नहीं कर पातीं, जिससे इलाज की राह और कठिन हो जाती है.

क्या हैं लक्षण?

पार्किंसन के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं और समय के साथ बढ़ते जाते हैं. सबसे आम लक्षण हाथों या उंगलियों में कंपन होना है, जो शुरुआत में हल्का होता है लेकिन धीरे-धीरे बढ़ सकता है. इसके अलावा शरीर में जकड़न, मूवमेंट का धीमा होना और संतुलन बनाए रखने में दिक्कत भी इसके संकेत हैं. मरीज का चलने का तरीका बदल सकता है और छोटे-छोटे कदमों से चलना पड़ता है.

कई बार बोलने में बदलाव, चेहरे के भाव कम होना और लिखावट छोटी हो जाना भी देखा जाता है. इसके साथ ही नींद की समस्या, थकान और मानसिक बदलाव जैसे डिप्रेशन भी हो सकते हैं, जो स्थिति को और जटिल बना देते हैं.

कैसे करें सावधानी?

पार्किंसन से पूरी तरह बचाव संभव नहीं है, लेकिन कुछ सावधानियां अपनाकर जोखिम को कम किया जा सकता है. संतुलित डाइट लेना, नियमित एक्सरसाइज करना और दिमाग को एक्टिव रखना फायदेमंद होता है. योग और मेडिटेशन से मानसिक तनाव कम किया जा सकता है, जिससे दिमाग स्वस्थ रहता है.

पर्याप्त नींद लेना और अनहेल्दी आदतों से दूर रहना भी जरूरी है. प्रदूषण और हानिकारक केमिकल्स के संपर्क से बचना चाहिए. अगर शुरुआती लक्षण नजर आएं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए, ताकि समय पर सही देखभाल और उपचार शुरू किया जा सके.

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