Saturday, April 11, 2026
Health

World Health Day: 10 हजार कदम या मेथी दाना का पानी…हेल्दी रहने के मॉर्डन और देसी तरीके

अब जैसे मेडिकल साइंस ने तरक्की की है तो बीमारियां भी पहले से कहीं ज्यादा परेशान करने लगी हैं. कम उम्र में ही लोग अब उन बीमारियों का शिकार हो जाते हैं जो कभी बुढ़ापे की निशानी मानी जाती थीं. इसकी वजह है हमारे खानपान में बदलाव आना. मार्केट में मिलने वाली चीजों में मिलावट होना. हमारा रूटीन बहुत ही सुस्त रहना. इसी के साथ पॉल्यूशन भी बीमारियों की बड़ी वजह है. आज जहां बीमारियों से निपटने के लिए बेहतरीन ट्रीटमेंट से लेकर न्यूट्रिएंट्स की कमी पूरी करने के लिए सप्लीमेंट भी मौजूद हैं, तो वहीं पहले के टाइम में लोग अपनी हेल्थ को नेचुरल तरीके से दुरुस्त रखा करते थे.

World Health Day: 10 हजार कदम या मेथी दाना का पानी…हेल्दी रहने के मॉर्डन और देसी तरीके
World Health Day: 10 हजार कदम या मेथी दाना का पानी…हेल्दी रहने के मॉर्डन और देसी तरीके

आज की लाइफस्टाइल बहुत ही तेज-रफ्तार हो गई है. इस वजह से कई बार तो लोगों को इतना टाइम भी नहीं मिलता है कि वो सही से खाना भी कंप्लीट कर सकें. अब जहां ऑफलाइन तो चीजें मौजूद है ही. इसके अलावा डिजिटल हेल्थ ऐप्स और ऑनलाइन डाइट प्लान तक मिल जाते हैं. इस चेंज के बावजूद भी हेल्दी रहने के मूलमंत्र की बात करें तो ये पुराना रूल ही है, जिसे अगर अब भी फॉलो करें तो आप हेल्दी रह सकते हैं.

10 हजार कदम वॉक Vs पैदल ही जाना

आज के टाइम में कहा जाता है कि हेल्दी रहने के लिए रोजाना 10 हजार कदम वॉक करनी चाहिए. दरअसल इससे वेट भी कंट्रोल में रहता है और हार्ट, ब्रेन जैसे अंगों को फायदा भी मिलता है. दरअसल इसके पीछे की वजह है कि आज के टाइम में लोगों का दिन बहुत ही सुस्त रहता है. पहले के टाइम में लोग रोजाना काम की वजह से ही पैदल चल लिया करते थे. बाजार से सामान लाना हो या फिर खेत तक जाना हो, लोग या तो साइकिल यूज करते थे या फिर पैदल जाया करते थे.

वर्कआउट VS घर के काम

हेल्दी रहना हो तो फिजिकल एक्टिविटी बहुत जरूरी होती है. अब लोग वेट मैनेज करने के लिए जिम जॉइन कर लेते हैं, योगा क्लास या फिर जुंबा जैसी चीजें करते हैं. योग का नाता तो भारतीयों के साथ सदियों पुराना ही रहा है. फिलहाल अगर हम मॉर्डन और देसी तरीके से हेल्दी रहने की बात करें तो आज लोग सुबह या शाम वर्कआउट करते हैं, लेकिन पहले घरों में ही इतने काम हुआ करते थे कि लोग ऐसे ही कैलोरी बर्न कर लेते थे, जैसे हाथ वाली चक्की से आटा पीसना, दालों को दलना, धान कूटना. इसके अलावा बड़े-बड़ें आंगन हुआ करते थे जिसमें गोबर लगाने से लेकर बैठकर पोंछा लगाने जैसे काम भी खुद ही किए जाते थे.

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दवा Vs देसी नुस्खे

अब अगर थोड़ा सा दर्द हुआ तो इससे राहत पाने के लिए सबसे पहले पेनकिलर टेबलेट ली जाती है या फिर दर्द निवारक बाम लगाई जाती है. पहले के टाइम में लोग देसी चीजों पर ज्यादा भरोसा किया करते थे. जैसे सिरदर्द हो तो चंदन का लेप, दांत दर्द हो तो लौंग, पेट दर्द हो तो मेथी, अजवाइन और हींग. आज भी ये नुस्खे काफी कारगर रहते हैं.

पावर नैप VS सोने का सही समय

आज के टाइम में लोग देर रात तक सोते हैं और देर तक सुबह सोते हैं, फिर भी फ्रेशनेस नहीं होती है. ये हेल्थ के लिए भी बेहद नुकसानदायक होता है. इसका एक तरीका निकाला गया है, पावर नेप. कहा जाता है कि दिन में एक बार पावर नेप (कुछ देर के लिए सोना) ले लेनी चाहिए ताकि आप फ्रेश महसूस कर सकें और नींद कंप्लीट हो. पहले के टाइम में लोग जल्दी सो जाया करते थे और मॉर्निंग में जल्दी उठते थे. इससे नींद भी 7-8 घंटे की कंप्लीट हो जाती थी और एक्टिव भी ज्यादा रहते थे.

देसी खानपान-स्पेशल डाइट

अब लोग हेल्दी और फिट रहने के लिए कई बार एक्सपर्ट से डाइट बनवाते हैं, जैसे कितना फैट, कितने कार्ब्स, कितनी कैलोरी और कितना प्रोटीन-फाइबर लेना है. पहले के टाइम में लोग देसी घी, प्योर सरसों के तेल का यूज करते थे तो वहीं खाने में ऑर्गेनिक सब्जियां फल और खासतौर पर अनाज खूब खाए जाते थे. इस वजह से खाना बैलेंस होता था तो किसी एक्स्ट्रा डाइट या सप्लीमेंट की जरूरत नहीं पड़ती थी.

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