
ग्रेटर नोएडा में गड्ढे में भरे पानी में डूबने से 3 साल के बच्चे की मौत
ग्रेटर नोएडा, जिसे हम उत्तर प्रदेश का ‘शो-विंडो’ और ‘स्मार्ट सिटी’ कहते हैं. जहां आसमान छूती इमारतें हैं और चौड़ी सड़कें हैं. लेकिन इसी स्मार्ट सिटी की चमक के ठीक नीचे, लापरवाही के वो खौफनाक अंधेरे गड्ढे हैं, जो अब मासूमों को निगलने लगे हैं. ग्रेटर नोएडा के दलेलगढ़ गांव से जो खबर आई है, वो सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि सिस्टम द्वारा की गई हत्या है. 3 साल का मासूम देवांश, जो अपनी मां के साथ नाना के घर खुशियां मनाने आया था, वो प्रशासन की अनदेखी की भेंट चढ़ गया. मंदिर के पास एक गड्ढा खोदा गया, उसकी मिट्टी बेची गई, वो पानी से भर गया, लेकिन उसे ढकने की जहमत किसी ने नहीं उठाई.
जो उम्र घुटनों के बल चलने और खिलौनों से खेलने की थी, उस उम्र में 3 साल का देवांश मौत के ‘खूनी गड्ढे’ का शिकार हो गया. ग्रेटर नोएडा के दलेलगढ़ गांव में पानी से लबालब गड्ढा कोई कुदरती तालाब नहीं… बल्कि सिस्टम की लापरवाही का वो ‘डेथ ट्रैप’ है जिसे खोदकर अधिकारी भूल गए. करीब 15 से 20 फीट गहरा ये गड्ढा आज से नहीं, बल्कि 6 साल पहले खोदा गया था.
…तो बच जाता देवांश
मिट्टी निकालने के नाम पर जमीन का सीना चीरा गया, लेकिन काम खत्म होने के बाद इसे भरना सिस्टम जरूरी नहीं समझा. पिछले 6 सालों से इस गड्ढे में लगातार पानी भरता रहा.
ग्रामीण चीखते रहे, अधिकारियों के दरवाजे खटखटाते रहे कि इसे भर दो या कम से कम चारदीवारी ही बना दो, ताकि कोई हादसा न हो. लेकिन साहबों की फाइलें नहीं हिलीं. अगर वक्त रहते इस गड्ढे को ढक दिया जाता या फेंसिंग कर दी जाती, तो आज अंजलि की गोद नहीं उजड़ती और देवांश हमारे बीच होता.
कल युवराज था, आज देवांश…
नाम बदल गए, जगह बदल गई, तारीखें बदल गईं… लेकिन ग्रेटर नोएडा में मासूमों की मौत का ‘पैटर्न’ नहीं बदला. कल सेक्टर 150 का युवराज था, आज दलेलगढ़ का देवांश है. याद करिए सेक्टर 150 की वो घटना, जहां खुले गड्ढे ने युवराज को निगल लिया था. तब प्रशासन ने बड़े-बड़े दावे किए थे, जांच की कसमें खाई थीं और सुरक्षित शहर का वादा किया था.
लेकिन वो दावे कितने खोखले थे, इसकी गवाही दलेलगढ़ का ये खूनी गड्ढा दे रहा है. यहां भी वही कहानी है, वही 15-20 फीट की गहराई, वही सिस्टम की खुदाई और वही मौत का खुला जाल. प्रशासन की फाइलें तब भी बंद थीं, और आज भी तभी खुलीं जब एक और चिराग बुझ गया. क्या ग्रेटर नोएडा का सिस्टम इतना संवेदनहीन हो चुका है कि उसे एक मौत से दूसरे मौत के बीच के सबक याद नहीं रहते?
देवांश की मौत, जिम्मेदार कौन?
सवाल सीधा है, जो गड्ढा 6 साल से मौत को दावत दे रहा था, उसे प्रशासन ने अनदेखा क्यों किया? क्या अब देवांश की मौत के बाद ही इस ‘खूनी गड्ढे’ को भरने की याद आएगी?
भंडारे में आया था मासूम
ग्रेटर नोएडा के दलेलगढ़ गांव में मंदिर के पास बने एक तालाब में डूबने से 3 साल के बच्चे की मौत हो गई. दरअसल, दलेलगढ़ गांव के रहने वाले अनिल की बेटी अंजलि कुछ दिन पहले अपने ससुराल सिकंदराबाद से अपने 3 साल के बेटे देवांश और बेटी के साथ मायके आई थी.
रविवार को घर के पास मंदिर में भंडारा था, जिसमें वह बच्चों के साथ शामिल हुई थी. इसी दौरान देवांश मंदिर के पास बने तालाब में खेलते-खेलते चला गया, जहां उसका पैर फिसल गया और वह तालाब में डूब गया.
बच्चा काफी देर तक नहीं मिला, इसके बाद उसकी तलाश शुरू की गई. बच्चे के तालाब की तरफ जाने की आशंका पर पुलिस और प्रशासन की टीम ने रेस्क्यू किया, लेकिन तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी.
4 जनवरी 2026 को की गई थी शिकायत
4 जनवरी 2026 को ग्राम दलेलगढ़ विकास समिति के ग्राम अध्यक्ष की ओर से गांव के आसपास बने गड्ढों को भरने और सड़कों के किनारे भरे पानी को हटाने की शिकायत भी दी गई थी. 14 फरवरी को दोपहर में हुए हादसे में मासूम की जान चली गई.
प्राधिकरण बोला- सरकारी तालाब नहीं…
दलेलगढ़ की घटना पर प्राधिकरण ने बयान जारी किया है कि गांव में मंदिर के पास एक गड्ढे में भरे पानी में डूबने से 3 साल के मासूम की मौत की सूचना मिली. इस पर संबंधित वर्क सर्कल की टीम तत्काल मौके पर पहुंची. टीम को पता चला कि यह जमीन गांव के ही एक किसान के नाम पर दर्ज है और यह सरकारी तालाब नहीं है. इसी जमीन पर गड्ढे में पानी भरा हुआ था, जिसमें डूबने से बच्चे की मौत हुई है.






