
बीपी और हार्ट प्रॉब्लम्सImage Credit source: Getty Images
पिछले कुछ समय से देश के कई हिस्सों में मौसम तेजी से बदल रहा है. कभी ठंड, कभी नमी तो कभी हल्की गर्मी महसूस हो रही है. ऐसा उतार-चढ़ाव शरीर के सामान्य संतुलन को बिगाड़ सकता है, जिसका असर बीपी और हार्ट मरीजों पर ज्यादा दिखता है. इस दौरान कई मरीजों को सिर दर्द, चक्कर आना, अचानक थकान, घबराहट, सीने में भारीपन, सांस लेने में दिक्कत, पसीना ज्यादा आना या दिल की धड़कन असामान्य लग सकती है. कुछ लोगों को नींद की परेशानी और बेचैनी भी महसूस होती है.
कई मामलों में भूख कम लगना, शरीर में कमजोरी और काम में मन न लगना जैसे संकेत भी सामने आते हैं. सुबह उठते ही भारीपन या दिन भर सुस्ती रहना भी आम समस्या बन सकती है. ये संकेत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि शरीर बदलते माहौल के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहा है. ऐसे में इन लक्षणों को हल्के में लेना नुकसानदेह हो सकता है और समय पर सतर्क रहना बेहद जरूरी हो जाता है.
बदलता मौसम बीपी और हार्ट मरीजों को कैसे नुकसान पहुंचाता है?
राजीव गांधी हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में डॉ. अजीत जैन बताते हैं कि मौसम में बदलाव के साथ शरीर को खुद को ढालने में मेहनत करनी पड़ती है. ठंड, गर्मी और नमी का अचानक आना-जाना हार्ट पर अधिक दबाव डाल सकता है. तापमान में अंतर से ब्लड प्रेशर असंतुलित हो सकता है, जिससे हाई या लो बीपी की समस्या बढ़ जाती है.
ज्यादा नमी में हार्ट को शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए तेजी से काम करना पड़ता है, जिससे थकान और सांस फूलने की शिकायत हो सकती है. वहीं, पसीना ज्यादा आने पर शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी हो जाती है, जो हार्ट हेल्थ के लिए ठीक नहीं मानी जाती. मौसम बदलने से दिनचर्या, खानपान और नींद भी प्रभावित होती है और यही आदतें लंबे समय में हार्ट से जुड़ी परेशानियों को बढ़ा सकती हैं.
कैसे करें बचाव?
बदलते मौसम में बीपी और हार्ट मरीजों को अपनी दिनचर्या संतुलित रखनी चाहिए. पर्याप्त पानी पीना जरूरी है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो. हल्का, घर का बना और कम नमक वाला भोजन फायदेमंद रहता है.
मौसम के अनुसार कपड़े पहनें और अचानक ठंड या गर्मी से बचें. रोजाना हल्की एक्सरसाइज या वॉक करें, लेकिन ज्यादा थकावट होने पर आराम भी जरूरी है. तनाव से दूर रहने की कोशिश करें और खुद को शांत रखें.
सावधानियां भी जानें
बीपी और हार्ट मरीजों को नियमित रूप से अपना ब्लड प्रेशर और पल्स चेक करते रहना चाहिए. दवाइयों को समय पर लें और बिना सलाह के कोई बदलाव न करें. पर्याप्त नींद लेना और देर रात तक जागने से बचना जरूरी है.
अगर सीने में तेज दर्द, ज्यादा घबराहट, बेहोशी या सांस लेने में गंभीर दिक्कत महसूस हो, तो तुरंत ध्यान दें. बदलते मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है, इसलिए सतर्क रहना ही सबसे बेहतर उपाय है.






