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‘घटना के बाद ही क्यों अधिकारी हरकत में आते हैं’, चाइनीज मांझे से मौतों पर UP हाई कोर्ट सख्त, सरकार को क्या दिए निर्देश? – Khabar Monkey

‘घटना के बाद ही क्यों अधिकारी हरकत में आते हैं’, चाइनीज मांझे से मौतों पर UP हाई कोर्ट सख्त, सरकार को क्या दिए निर्देश? – Khabar Monkey
'घटना के बाद ही क्यों अधिकारी हरकत में आते हैं', चाइनीज मांझे से मौतों पर UP हाई कोर्ट सख्त, सरकार को क्या दिए निर्देश?

चाइनीज मांझे पर यूपी हाई कोर्ट सख्त.

उत्तर प्रदेश में सरकारी मांझे से होने वाली मौतों और लोगों के घायल होने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राज्य सरकार से पूछा- घटना के बाद ही क्यों अधिकारी हरकत में आते हैं. जबकि इन घटनाओं पर आसानी से लगाम लगाई जा सकती है. कोर्ट ने सरकार से पूछा कि प्रदेश में चाइनीज मांझे पर रोक के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?

हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने इसके लिए सरकारी वकील को 11 मार्च तक जवाब दाखिल करने को कहा है. साथ ही सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि अभिभावकों समेत बच्चों में खतरनाक मांझे की जागरुकता फैलाई जाए. चाइनीज मांझे की बिक्री और प्रयोग पर प्रतिबंध लगाया जाए. इस पर सख्ती से कार्रवाई जाए. पीड़ितों को मेडिकल समेत मुआवजा दिए जाने पर विचार किया जाए. कोर्ट ने कहा कि चाइनीज मांझे से भविष्य में किसी भी प्रकार की कोई घटना न हो, इसके लिए दिए निर्देशों का पालन किया जाए.

अगली सुनवाई 11 मार्च को, सरकारी वकील क्या बोले?

कोर्ट ने इसकी रोकथाम के लिए राज्य सरकार को ठोस कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए हैं. जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने बुधवार को यह आदेश अधिवक्ता मोतीलाल यादव की वर्ष 2018 में दाखिल जनहित याचिका पर दिया है जिसमें प्रदेश में चाइनीज मांझे पर सख्त प्रतिबंध लगाने की गुजारिश की गई है.

उधर, राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थाई अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने खुद चाइनीज मांझे पर सख्ती से प्रतिबंध लगाने को कारवाई की है. आदेश जारी किए हैं. कोर्ट ने सरकारी वकील को मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देकर अगली सुनवाई 11 मार्च को तय की है.

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में खोली सरकार की पोल

याचिकाकर्ता ने मीडिया में चली खबरों को कोर्ट के सामने रखते हुए कहा कि हाल ही में करीब 10 लोग लगातार चाइनीज मांझे से जख्मी हुए हैं. इनमें से कुछ की मौत भी हो गई है. इस पर कोर्ट ने सरकारी वकील से पूछा कि आखिर लोगों की जान जाने या घायल होने पर ही सरकारी अमला क्यों कार्यशील होता है. इसके मद्देनजर, कोर्ट ने सरकार को इसकी रोकथाम के लिए स्थाई ठोस कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया. ताकि, ऐसी घटनाएं न हों.

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