
भगवान शिव की विशेष कृपा पाने के लिए प्रदोष व्रत रखा जाता है। लेकिन आपको यह नहीं पता कि फरवरी में प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा। तो परेशान न हों, इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि इस बार प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा और इस दिन कौन से विशेष योग बन रहे हैं?
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है। इससे जीवन में विशेष फल मिलता है और सुख समृद्धि बनी रहती है। माना जाता है कि प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है और शिव कृपा प्राप्त होती है
शनि प्रदोष व्रत 2026 का महत्व
भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार, वर्ष 2026 में फाल्गुन मास का पहला प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ रहा है। शनिवार को पड़ने के कारण इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ शनि देव की भी विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
शनि प्रदोष व्रत तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के मुताबिक, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर यह व्रत रखा जाएगा।
- व्रत की तारीख: 14 फरवरी 2026 (शनिवार)
- त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 14 फरवरी को दोपहर 4 बजकर 02 मिनट से
- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 15 फरवरी को शाम 5 बजकर 04 मिनट तक
- प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 6 बजकर 10 मिनट से रात 8 बजकर 44 मिनट तक
- पूजा अवधि: लगभग 2 घंटे 34 मिनट
क्यों खास माना जाता है शनि प्रदोष व्रत?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शनि प्रदोष व्रत रखने से शनि देव के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। जिन जातकों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो। उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत, पूजा और दान करने से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
शनि प्रदोष व्रत की पूजा विधि
- प्रदोष व्रत की पूजा मुख्य रूप से सूर्यास्त के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है।
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
- प्रदोष काल में शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें
- भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, भस्म और सफेद चंदन अर्पित करें।
- शनि प्रदोष होने के कारण पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
- “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें।
- अंत में प्रदोष व्रत कथा पढ़कर शिव आरती करें।
विशेष योग का संयोग
इस साल विशेष बात यह है कि 14 फरवरी को प्रदोष व्रत रखा जायेगा और अगले ही दिन 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का व्रत रखा जायेगा। ऐसे में शिव भक्तों के लिए यह समय अत्यंत शुभ माना जा रहा है। इसके साथ ही सिद्ध योग और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का संयोग बन रहा है, जो पूजा और व्रत के फल को कई गुना बढ़ाने वाला माना जाता है।






