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इंसान को किस तरह के पहनने चाहिए जूते-चप्पल, जो माने जाते हैं सबसे शुभ

इंसान को किस तरह के पहनने चाहिए जूते-चप्पल, जो माने जाते हैं सबसे शुभ
इंसान को किस तरह के पहनने चाहिए जूते-चप्पल, जो माने जाते हैं सबसे शुभ

जूते-चप्पलों को लेकर वास्तु नियम

मंदिरों में जाते समय चप्पलें बाहर छोड़ना हमारी आम प्रथा है. इस कार्य के पीछे अहंकार त्याग का गहरा अर्थ छिपा है. मंदिर में अहंकार और अभिमान को त्यागना ईश्वर के समक्ष विनम्र समर्पण का प्रतीक है. गुरु से मिलते समय या बड़ों को प्रणाम करते समय चप्पलें एक तरफ रखना भी विनम्रता का प्रतीक है, ऐसा प्रसिद्ध ज्योतिषी डॉ. बसवराज गुरुजी ने अपने कहा है.

गुरुजी कहते हैं कि पुराणों में भी जूतों के महत्व का उल्लेख मिलता है. रामायण में, जब भरत वनवास गए तो उन्होंने राम के जूते सिंहासन पर रखे और राम के नाम पर शासन करते हुए निरंतर उनकी पूजा की. यह इस बात का अच्छा उदाहरण है कि जूते किस प्रकार किसी व्यक्ति का प्रतीक हो सकते हैं, जो उनकी शक्ति और प्रतिष्ठा को दर्शाते हैं. आज भी शिरडी के साईं बाबा मंदिर और कई मठों में गुरु के जूतों की पूजा की जाती है. यह पादुका पूजा गुरु के प्रति आदर व्यक्त करने और उनकी शक्ति प्राप्त करने का प्रतीक है.

उन्होंने कहा कि जूते-चप्पल अनुशासन का प्रतीक भी हैं. पूरे पैर को ढकने वाले जूते-चप्पल पहनना बहुत शुभ माना जाता है. जूते-चप्पल दान करना एक विशेष परोपकारी कार्य है. ऐसा माना जाता है कि शनि दोष से पीड़ित लोगों को सोमवार, बुधवार या शनिवार को जूते-चप्पल दान करने से आशीर्वाद प्राप्त होता है. भिक्षुओं द्वारा लकड़ी के जूते-चप्पल पहनना आध्यात्मिक पवित्रता और सादगीपूर्ण जीवन का प्रतीक है.

घर में सही ढंग से रखें जूते-चप्पल

गुरुजी ने कहा कि हम घर से बाहर जाते या अंदर आते समय अपने जूतों पर नजर डालते हैं. उन्हें साफ-सुथरा और एक-दूसरे के पास रखना बहुत जरूरी है. एक जूता एक जगह और दूसरा दूसरी जगह फेंकना ठीक नहीं है. जूतों में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की ऊर्जा होती है. गुरुजी ने सलाह दी है कि जूतों को सही ढंग से रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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