हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने लोगों के बीच चर्चा और बहस दोनों को जन्म दे दिया है. इस वीडियो में ट्रेन के एक डिब्बे को पूरी तरह मंदिर जैसा रूप देते हुए दिखाया गया है. फूलों की मालाओं से सजा हुआ कोच, भजन-कीर्तन की गूंज और पूजा-पाठ में लीन यात्री ये नजारा कुछ लोगों को गहरी आस्था का प्रतीक लग रहा है, जबकि कई लोग इसे नियमों के उल्लंघन के रूप में देख रहे हैं. इसी बहस के कारण ये वीडियो इंटरनेट पर तेजी से फैल रहा है और लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.

वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि ट्रेन के एक कोच को पूरी तरह से धार्मिक माहौल में बदल दिया गया है. कोच की अपर बर्थ को मंदिर जैसा स्वरूप दिया गया है, जहां देवी-देवताओं की तस्वीरें स्थापित की गई हैं. चारों तरफ फूलों की सजावट है और वातावरण में भक्ति का रंग घुला हुआ नजर आता है. कुछ यात्री आरती करते दिखाई दे रहे हैं, तो कुछ भजन गाने में मग्न हैं. पूरा माहौल ऐसा लगता है जैसे किसी धार्मिक समारोह का आयोजन हो रहा हो, न कि लोग सफर कर रहे हों.
क्यों दो हिस्सों में बंटे लोग?
इस वीडियो को देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स की राय दो हिस्सों में बंटी हुई दिखाई दे रही है. एक वर्ग ऐसा है जो इसे श्रद्धा और भक्ति की अभिव्यक्ति मानता है. उनका कहना है कि यदि लोग शांतिपूर्वक अपनी आस्था का पालन कर रहे हैं और किसी को नुकसान नहीं पहुंचा रहे, तो इसमें आपत्ति करने की कोई जरूरत नहीं है. उनके अनुसार, यह भारतीय संस्कृति की झलक है, जहां लोग हर जगह अपने धार्मिक भाव को जीते हैं.
वहीं दूसरी ओर, एक बड़ा वर्ग इस घटना को लेकर असहज नजर आ रहा है. उनका मानना है कि ट्रेन एक पब्लिक ट्रांसपोर्ट का साधन है, जहां हर धर्म, वर्ग और विचारधारा के लोग यात्रा करते हैं. ऐसे में किसी एक धर्म विशेष के आयोजन को इस तरह खुले तौर पर करना दूसरों के लिए असुविधा का कारण बन सकता है. कुछ लोगों ने यह भी कहा कि यात्रियों ने टिकट आराम से सफर करने के लिए लिया होता है, न कि किसी धार्मिक कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए.
कई यूजर्स ने इस पर नाराजगी जताते हुए रेलवे प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि इस तरह के आयोजन से न केवल नियमों का उल्लंघन होता है, बल्कि इससे अन्य यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है. कुछ लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि अगर हर कोई अपने-अपने धार्मिक कार्यक्रम ट्रेन में करने लगे, तो स्थिति को संभालना मुश्किल हो जाएगा.
यह वीडियो NCIB Headquarters नाम के एक एक्स अकाउंट से शेयर किया गया है, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया. अब यह चर्चा का विषय बन चुका है कि सार्वजनिक स्थानों पर व्यक्तिगत आस्था की अभिव्यक्ति की सीमा क्या होनी चाहिए और इसे किस हद तक स्वीकार किया जा सकता है.
यहां देखिए वीडियो
यह पूर्णतः गलत है।
किसी भी यात्री ट्रेन में (तीर्थ यात्रा स्पेशल ट्रेन या पूरा कोच बुकिंग को छोड़कर) इस प्रकार पूजा-अर्चना करना उचित नहीं है।
यात्रा एक साझा स्थान होती है, जहाँ हर यात्री अपनी सुविधा और शांति के साथ सफर करना चाहता है। इस तरह की गतिविधियाँ अन्य यात्रियों के लिए pic.twitter.com/FckEphRQF8
— NCIB Headquarters (@NCIBHQ) April 12, 2026





