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Viral: इंसानियत शर्मसार! मौत से लड़ रहे कर्मचारी को नहीं मिली पेड लीव, वायरल हुई रुला देने वाली कहानी – Khabar Monkey

Viral: इंसानियत शर्मसार! मौत से लड़ रहे कर्मचारी को नहीं मिली पेड लीव, वायरल हुई रुला देने वाली कहानी – Khabar Monkey
Viral: इंसानियत शर्मसार! मौत से लड़ रहे कर्मचारी को नहीं मिली पेड लीव, वायरल हुई रुला देने वाली कहानी

सांकेतिक तस्वीरImage Credit source: Getty Images

आज के दौर में जहां कंपनियां वर्क लाइफ बैलेंस (Work Life Balance) और अनलिमिटेड पेड़ लीव (Unlimited Paid Leave) का ढोल पीटती हैं, वहीं टायलर वेल्स (Tyler Wells) नाम के एक अमेरिकी व्यक्ति की आपबीती ने इन तमाम दावों की कलई खोल दी है. एक एडवर्टाइजिंग एजेंसी में लाखों के पैकेज पर काम करने वाले टायलर को जब पता चला कि उन्हें ब्रेन कैंसर है, तो उनके पैरों तले मानो जमीन ही खिसक गई. लेकिन असली त्रासदी अस्पताल में नहीं, बल्कि उनके ऑफिस वाले ई-मेल के इनबॉक्स में शुरू हुई.

माइक्रो ब्लॉगिंग साइट X (पहले ट्विटर) पर @tylerdw नाम के हैंडल से टायलर ने एक लंबी चौड़ी पोस्ट लिखकर बताया कि उनकी कंपनी में ‘अनलिमिटेड पेड टाइम ऑफ’ (PTO) की पॉलिसी थी. कीमोथेरेपी की थकावट और दर्द के बीच जब उन्होंने महीने में कुछ दिन की छुट्टी मांगी, तो मैनेजमेंट ने जो जवाब दिया, वो चौंकाने वाला था.

कंपनी ने उनकी बीमारी के लिए मांगी गई लीव को न केवल नियमों का गलत इस्तेमाल करार दिया, बल्कि साफ शब्दों में यह भी कह दिया कि पेड लीव नहीं मिलेगी. अगर ट्रीटमेंट कराना है, तो बिना सैलरी के घर बैठें. यही नहीं, बीमारी की हालत में टायलर के वर्क लोड कम करने की मांग को भी सिरे से खारिज कर दिया. ये भी पढ़ें: Viral: जब हार गई मेडिकल साइंस, तब काम आया ये ‘स्पेशल मैसेज’; 55 दिन बाद कोमा से ऐसे लौटा 8 साल का मासूम

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

फिर क्या था? कंपनी के रवैये के आगे हार मानकर टायलर ने जॉब से रिजाइन कर दिया. जब उन्होंने लिंक्डइन सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपना दर्द साझा किया, तो दुनिया भर से कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा. लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या कॉरपोरेट सिस्टम के लिए एम्प्लॉई सिर्फ एक मशीन है. ये भी पढ़ें: Viral Video: क्या वाकई एक लड़की ने दोस्त की गरीबी का उड़ाया मजाक? जानें क्या है ‘पिज्जा डिलीवरी बॉय’ वाले वीडियो का सच

एक यूजर ने कमेंट किया, जब एम्प्लॉई मौत से लड़ रहा हो, तब उसे काम के दबाव और आर्थिक तंगी के दोहरे बोझ तले दबाना कहां की इंसानियत है. दूसरे ने कहा, यह बहुत दुखद है. कॉरपोरेट सिस्टम के काले सच पर खुलकर बोलने के लिए धन्यवाद. ये भी पढ़ें:Viral Video: व्यूज का लालच या बेशर्मी की हद? वायरल होने के लिए लड़कियों ने कैब ड्राइवर के साथ की ऐसी हरकत

टायलर का पोस्ट

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