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Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी के दिन करें इस कथा का पाठ, शत्रुओं पर मिलेगी विजय

Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी के दिन करें इस कथा का पाठ, शत्रुओं पर मिलेगी विजय
Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी के दिन करें इस कथा का पाठ, शत्रुओं पर मिलेगी विजय

विजया एकादशी की कथा

Vijaya Ekadashi Vrat Katha In Hindi: आज विजया एकादशी का व्रत है. ये व्रत साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर रखा जाता है. एकादशी व्रत जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है. विजया एकादशी के दिन विधि-विधान से पूजा और नियमों का पालन करते हुए व्रत किया जाता है. मान्यताओं के अनुसार, विजया एकादशी के दिन पूजा और व्रत करने से भगवान विष्णु बहुत प्रसन्न होते हैं.

भगवान विष्णु के आशीर्वाद से जीवन में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है. सारे कष्ट कट जाते हैं. एकादशी के व्रत के प्रभाव से व्यक्ति मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्त करता है. विजया एकादशी के दिन पूजा के समय व्रत कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए. इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है. यही नहीं मान्यता है कि विजया एकादशी की कथा का पाठ करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, तो आइए पढ़ते हैं कथा.

विजया एकादशी की कथा (Vijaya Ekadashi Ki Katha)

कथा के अनुसार, पिता दशरथ के वचनों का मान रखने के लिए भगवान राम 14 सालों के लिए वन गए. उनके साथ माता सीता और भाई लक्ष्मण भी वनवास के लिए गए. भगवान राम वन में पंचवटी में सीता तथा लक्ष्मण के साथ रहने लगे. वहां रहते समय रावण ने प्रभु श्री राम की अर्धांगिनी माता सीता का हरण कर लिया. इससे प्रभु राम बहुत व्याकुल हो उठे. वो वन में इधर उधर माता सीता की तलाश करने लगे.

आगे बढ़ने पर श्री राम और लक्ष्मण को जटायु मिले. उन्होंने उनको बताया कि रावण माता सीता का हरण करके ले गया है. इसके बाद उनकी मित्रता सुग्रीव से हुई और श्रीराम के कार्य के लिए वानरों की विशाल सेना को एकत्र किया गया. बाद में हनुमान जी लंका जाकर माता सीता से मिले. वहां से लौटकर हनुमान जी ने लंका का पूरा हाल प्रभु श्रीरामचंद्र को कह सुनाया.

इसके बाद श्रीराम ने सुग्रीव से विचार-विमर्श किया और लंका पर चढ़ाई करने का फैसला किया, लेकिन उनकी राह में सबसे रोड़ा बनकर बह रह था विशाल समुद्र. समुद्र बहुत गहरा और जलचरों से भरा हुआ था. जब समुद्र को पार करने का कोई मार्ग न मिला तब लक्ष्मण जी ने भगवान को बकदाल्भ्य नामक मुनि के बारे में बताया, जिनका आश्रम समुद्र तट से आधे योजन की दूरी पर था.

लक्ष्मण की बात सुनकर भगवान राम बकदाल्भ्य मुनि के आश्रम पहुंचे. फिर उनको प्रणाम करने के बाद उनसे समुद्र को पार करने का उपाय पूछा. तब मुनि ने भगवान राम को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाले एकादशी व्रत और इसके पुण्य प्रभावों के बारे में बताया. साथ ही उन्होंने प्रभु से कहा कि इस व्रत के पुण्य प्रभावों से आप न सिर्फ समुद्र को पार कर सकेंगे, बल्कि आपको रावण पर विजय भी प्राप्त होगी.

श्रीराम ने मुनि के बताए अनुसार, विजया एकादशी का व्रत किया और उसी के प्रभाव से वो अपनी सेना सहित समुद्र को पार करने में सफल हुए. साथ ही युद्ध में विजयी हुए. उन्होंने रावण का वध किया और माता सीता को वापस प्राप्त किया. यही कारण है कि फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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