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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर अप्रैल से वाहन भरेंगे रफ्तार, 63Km का सफर 35 मिनट में होगा पूरा – Khabar Monkey

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर अप्रैल से वाहन भरेंगे रफ्तार, 63Km का सफर 35 मिनट में होगा पूरा – Khabar Monkey
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर अप्रैल से वाहन भरेंगे रफ्तार, 63Km का सफर 35 मिनट में होगा पूरा

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे जल्‍द शुरू होने वाला है.

उत्तर प्रदेश के दो बड़े और महत्वपूर्ण शहर लखनऊ और कानपुर लंबे समय से एक बेहतर, तेज और सुरक्षित सड़क मार्ग की उम्मीद में हैं. इसकी वजह है इन दोनों शहरों के बीच रोजाना सफर करने वाले वो हजारों लोग जो नौकरी, व्यापार, पढ़ाई, इलाज और अन्य जरूरी कामों के लिए यहां से आते-जाते हैं. इन लोगों का इंतजार अब लगभग खत्म होने वाला है, क्योंकि लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे अपने अंतिम चरण में है और अप्रैल 2026 तक इसके शुरू होने की उम्मीद है. यह एक्सप्रेसवे न सिर्फ यात्रा का समय घटाएगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास की रफ्तार बढ़ाने में भी मददगार साबित होगा.

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे छह लेन का आधुनिक और पूरी तरह एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है. इसका मतलब यह है कि इस सड़क पर अनियंत्रित कट, लोकल ट्रैफिक और अचानक आने-जाने वाले वाहन नहीं होंगे. इससे सड़क पर चलना ज्यादा सुरक्षित और तेज होगा. यह एक्सप्रेसवे लगभग 63 किलोमीटर लंबा है और लखनऊ के शहीद पथ को कानपुर के आजाद चौराहे, गंगा ब्रिज के पास से जोड़ेगा. यह परियोजना उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की उन बड़ी योजनाओं में से एक है, जिनका मकसद राज्य को तेज विकास की राह पर ले जाना है. इस एक्सप्रेसवे को नेशनल एक्सप्रेसवे-6 यानी NE-6 का दर्जा दिया गया है.

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यात्रा होगी सुरक्षित, बचेगा समय

आज की तारीख में लखनऊ से कानपुर का सफर सड़क से करने में ट्रैफिक और समय के अनुसार डेढ़ घंटे से लेकर तीन घंटे तक लग जाते हैं. त्योहारों, बारिश या वीआईपी मूवमेंट के समय यह समय और भी बढ़ जाता है. एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद यही दूरी मात्र 35 मिनट में पूरी की जा सकेगी. यह बदलाव खास तौर पर रोज सफर करने वालों, व्यापारियों, ट्रांसपोर्टर्स और आपातकालीन सेवाओं के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा. मरीजों को बड़े अस्पतालों तक जल्दी पहुंच मिल सकेगी और उद्योगों को समय पर कच्चा माल और तैयार सामान भेजने में आसानी होगी.

2019 में रखी गई थी आधारशिला

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की योजना कई साल पहले बनाई गई थी. इसकी आधारशिला पहली बार मार्च 2019 में रखी गई थी. बाद में इसे आधिकारिक रूप से दिसंबर 2020 में राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे का दर्जा दिया गया. इसके बाद जनवरी 2022 में निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ी. इस परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करने का काम एजिस इंडिया कंसल्टिंग इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया था. लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की कुल लागत लगभग 4700 करोड़ रुपये है. इस राशि में सड़क निर्माण के साथ-साथ बड़े और छोटे पुल, अंडरपास, फ्लाईओवर, सर्विस रोड, ड्रेनेज सिस्टम और सुरक्षा से जुड़े तमाम इंतजाम शामिल हैं. यह बजट केंद्र सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने दिया है.

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एक्सप्रेसवे में एडवांस टेक्नॉलजी का इतेमाल

इस एक्सप्रेसवे की खास बात यह है कि इसे एक नई और एडवांस टेक्नॉलजी से बनाया जा रहा है, जिसे AIMGC यानी ऑटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन गाइडेड कंस्ट्रक्शन कहा जाता है. यह तकनीक भारत में पहली बार किसी सड़क परियोजना में इस्तेमाल की जा रही है. इस तकनीक की मदद से सड़क की गुणवत्ता बेहतर होती है, निर्माण में मानवीय गलती कम होती है और सड़क की उम्र भी लंबी होती है. निर्माण एजेंसियों का दावा है कि यह एक्सप्रेसवे कम से कम दस साल तक बिना किसी बड़े मरम्मत कार्य के चलेगा.

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एक्सप्रेसवे के निर्माण में देरी का कारण

शुरुआत में इस एक्सप्रेसवे को नवंबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था. हालांकि कुछ तकनीकी और जमीन अधिग्रहण से जुड़ी परेशानी के कारणों से इसमें देरी हुई. खास तौर पर लखनऊ के स्कूटर इंडिया चौराहे के पास कुछ हिस्सों में काम में देरी हुई. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक अब अधिकतर काम पूरा किया जा चुका है और केवल अंतिम चरण का काम बाकी है. मौजूदा स्थिति को देखते हुए कहा जा रहा है कि अप्रैल 2026 तक इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा.

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शहरों के अंदर का ट्रैफिक में होगा हल्का

एक्सप्रेसवे के शुरू होने से लखनऊ और कानपुर दोनों शहरों के अंदर का ट्रैफिक काफी हद तक कम हो जाएगा. भारी वाहन, बसें और लंबी दूरी के यात्री सीधे एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करेंगे, जिससे शहर की सड़कों पर भीड़ कम होगी. इससे न केवल जाम की समस्या घटेगी, बल्कि प्रदूषण भी कम होगा. शहर का वातावरण बेहतर होगा और आम लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में राहत मिलेगी.

लखनऊ-कानपुर की दूरी और मौजूदा विकल्प

लखनऊ से कानपुर की सड़क दूरी लगभग 93 किलोमीटर है, जबकि हवाई दूरी 77 किलोमीटर के आसपास है. लोग अभी सड़क, रेल और सीमित हवाई सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं. सड़क मार्ग से एनएच-27 सबसे आम रास्ता है, लेकिन ट्रैफिक के कारण यहां समय ज्यादा लगता है. ट्रेन से यात्रा करने पर सबसे तेज सेवा तेजस एक्सप्रेस है, जो करीब एक घंटे दस मिनट में यह दूरी तय करती ह. हवाई सेवा सीमित है और आम लोगों के लिए इसका इस्तेमाल न के बराबर किया जाता है.

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