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US-बांग्लादेश ट्रेड डील से भारत के टेक्सटाइल इंडस्ट्री को खतरा नहीं, SBI ने समझाया पूरा गेम

US-बांग्लादेश ट्रेड डील से भारत के टेक्सटाइल इंडस्ट्री को खतरा नहीं, SBI ने समझाया पूरा गेम
US-बांग्लादेश ट्रेड डील से भारत के टेक्सटाइल इंडस्ट्री को खतरा नहीं, SBI ने समझाया पूरा गेम

एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट

भारत और अमेरिका की अंतरिम डील के बाद बांग्लादेश ने भी अमेरिका के साथ डील साइन की, जिसमें यूएस ने बांग्लादेश पर टैरिफ की दरों को 1 प्रतिशत कम किया और अमेरिकी कॉटन पर जीरो प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही. इस डील के बाद से ही यह आशंका जताई जा रही थी कि भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट को काफी नुकसान होगा. मगर इस पर अब एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट आई है, जिसने दूध का दूध, पानी का पानी कर दिया है.

SBI रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और बांग्लादेश के बीच हाल ही में हुए ट्रेड एग्रीमेंट से भारत की एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस पर कोई खास असर पड़ने की उम्मीद नहीं है. मार्केट शेयर में संभावित नुकसान की चिंताओं को दूर करते हुए, रिपोर्ट में कहा गया है कि US-बांग्लादेश डील उतनी बड़ी डील नहीं है, जितना हल्ला मचा हुआ है उतना कुछ नुकसान नहीं होने वाला है क्योंकि कॉस्ट डायनामिक्स और प्रोडक्ट कंपोजिशन भारतीय एक्सपोर्टर्स के पक्ष में बने हुए हैं.

अमेरिका के साथ बांग्लादेश और भारत की डील

जहां US ने बांग्लादेशी सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ को पहले के 20% से घटाकर 19% कर दिया है. वहीं, भारत ने वॉशिंगटन के साथ अपने अंतरिम एग्रीमेंट के तहत 18% तक की बड़ी कटौती हासिल की है. हालांकि US भारत और बांग्लादेश दोनों से लगभग 7.5 बिलियन डॉलर का टेक्सटाइल इंपोर्ट करता है, लेकिन प्रोडक्ट मिक्स अलग है.

US बांग्लादेश से ज्यादा नॉन-निटेड कपड़े खरीदता है, जबकि दूसरे मेड-अप टेक्सटाइल में भारत का दबदबा है. US-बांग्लादेश डील में एक खास क्लॉज है, जो US कॉटन और मैन-मेड फाइबर से बने कुछ टेक्सटाइल और कपड़ों के प्रोडक्ट्स के लिए जीरो-टैरिफ एक्सेस की इजाजत देता है. इससे यह डर पैदा हुआ है कि बांग्लादेशी एक्सपोर्ट अमेरिकी मार्केट में ज्यादा कॉम्पिटिटिव हो सकता है.

भारत को नहीं होगा नुकसान

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की तुलना में US से कच्चा माल मंगाने की ज्यादा लागत किसी भी बड़े बदलाव को रोक देगी. SBI रिसर्च ने कहा कि US से इंपोर्ट करने की लागत भारत से इंपोर्ट करने की तुलना में बहुत ज्यादा होगी, इसलिए इससे भारत का कॉम्पिटिटिव फायदा कम नहीं होगा. रिपोर्ट में बांग्लादेश को कॉटन और फाइबर एक्सपोर्ट के जरिए भारत पर पड़ने वाले संभावित इनडायरेक्ट असर की भी जांच की गई है. अभी, बांग्लादेश भारत से लगभग $2.7 बिलियन का कॉटन मंगाता है, जो उसके कुल कॉटन इंपोर्ट का लगभग 31% है, जबकि भारत से मैन-मेड फाइबर इंपोर्ट लगभग $119 मिलियन है जो कि बांग्लादेश के कुल इंपोर्ट का लगभग 6% है.

बांग्लादेश से बेहतर है भारत की डील

अगर फैक्ट के हिसाब से सीधे तौर पर भारत और बांग्लादेश की अमेरिका से हुई डील की तुलना करें तो भारत बांग्लादेश के मुकाबले काफी आगे नजर आता है. सबसे बड़ा अंतर टैरिफ कटौती में है. भारत के निर्यात पर टैरिफ 50% से घटकर 18% हुआ है, जो काफी बड़ी कमी है, जबकि बांग्लादेश के लिए यह 20% से घटकर सिर्फ 19% हुआ है. इसके अलावा भारत की डील कई सेक्टरों में फैली हुई है, जिसमें औद्योगिक सामान, कृषि उत्पाद, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी शामिल हैं. खरीद प्रतिबद्धताओं के मामले में भी भारत का पैमाना बड़ा है, क्योंकि भारत ने लगभग 500 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा, आईटी, कोयला और अन्य उत्पाद खरीदने की मंशा जताई है, जबकि बांग्लादेश की कुल खरीद प्रतिबद्धता इससे काफी कम है.

साथ ही, भारत डिजिटल ट्रेड नियमों पर अलग से विस्तृत बातचीत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे दीर्घकालिक रणनीतिक फायदे मिल सकते हैं. दूसरी ओर बांग्लादेश की डील मुख्य रूप से टेक्सटाइल, कुछ कृषि उत्पादों और सीमित खरीद तक केंद्रित है. कुल मिलाकर साइज और इकोनॉमी के लिहाज से भारत की स्थिति इस समझौते में ज्यादा मजबूत और व्यापक नजर आती है.

Us Ban Vs Us India

US-Ban Vs Us India

EU ट्रेड डील होगी मददगार

ट्रेड डील के बाद एक डेटा खूब वायरल हुआ कि अमेरिका की ओर से बांग्लादेश को यूएस कॉटन खरीदने पर जीरो टैरिफ लगाने वाले ऑफर से भारत को काफी नुकसान होगा क्योंकि भारत बांग्लादेश को काफी एक्सपोर्ट करता है. यह दावा फैक्चुअली उतना सटीक नहीं है जितना दिख रहा है. SBI रिसर्च का अनुमान है कि अगर हालात बहुत खराब भी रहे तो भी भारत को सिर्फ लगभग $1 बिलियन का नुकसान होगा. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर US कॉटन हमारे कॉटन एक्सपोर्ट का 10% और बांग्लादेश को हमारे मैन-मेड फाइबर एक्सपोर्ट का 2% रिप्लेस कर देता है, तो भारत को सिर्फ और सिर्फ $1 बिलियन का नुकसान होगा.

मगर इस नुकसान की भरपाई बहुत आसानी से हो जाएगी क्योंकि यूरोपियन यूनियन के साथ भारत के हाल ही में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ने लगभग $260 बिलियन का टेक्सटाइल मार्केट खोल दिया है, जिसमें जीरो ड्यूटी एक्सेस है, जो बांग्लादेश को US में प्रेफरेंशियल शर्तें मिलने से होने वाले किसी भी मामूली असर को काफी हद तक कम कर सकता है.

Trade Data

Trade Data

भारत की जीडीपी बढ़ेगी

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के साथ भारत का अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट देश को US को सबसे कम टैरिफ वाले एशियाई एक्सपोर्टर्स में से एक बनाता है, जिससे टेक्सटाइल, लेदर, केमिकल्स, जेम्स और ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स और सीफूड जैसे खास सेक्टर्स में कॉम्पिटिटिवनेस वापस आ जाएगी. एसबीआई रिसर्च में कहा गया है कि डील के बाद US को भारत का गुड्स एक्सपोर्ट सालाना $100 बिलियन को पार कर सकता है और बाइलेटरल ट्रेड सरप्लस $90 बिलियन से ज्यादा होने की संभावना है, जिससे GDP में लगभग 1.1% की नेट बढ़ोतरी होगी.

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