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बिना बम-बारूद बनाए इस डिफेंस कंपनी ने किया मालामाल, 1 साल में दिया 70% का रिटर्न

बिना बम-बारूद बनाए इस डिफेंस कंपनी ने किया मालामाल, 1 साल में दिया 70% का रिटर्न
बिना बम-बारूद बनाए इस डिफेंस कंपनी ने किया मालामाल, 1 साल में दिया 70% का रिटर्न

MTAR एक प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपनी है.Image Credit source: AI Generated

शेयर बाजार में अक्सर वही कंपनियां चर्चा में रहती हैं जो बड़े प्रोजेक्ट, बड़े ऑर्डर या भारी-भरकम विज्ञापनों के साथ नजर आती हैं. लेकिन कुछ कंपनियां ऐसी भी होती हैं जो चुपचाप देश के सबसे संवेदनशील मिशनों को संभालती हैं. न ये बम बनाती हैं, न मिसाइल दागती हैं, फिर भी इनके बिना डिफेंस, स्पेस और न्यूक्लियर प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सकते. MTAR Technologies ऐसी ही एक कंपनी है, जिसने पिछले एक साल में निवेशकों को करीब 70% का रिटर्न देकर सबका ध्यान खींचा है.

बीते कुछ वर्षों में कंपनी की आय लगभग 28% की दर से बढ़ी है. शेयर की कीमत में भी 1 महीने में करीब 16% की बढ़त हुई है. MTAR Technologies के शेयर ने पिछले साल में निवेशकों को करीब 70 फीसदी तक रिटर्न दिया है. ऑपरेटिंग मार्जिन 1520% के बीच बना हुआ है और कंपनी पर कर्ज भी बेहद कम है.

MTAR का असली काम क्या है?

MTAR एक प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपनी है. यह ISRO के लिए क्रायोजेनिक फ्यूल सिस्टम, डिफेंस प्लेटफॉर्म्स के लिए खास एक्ट्यूएटर, न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन के लिए अत्यंत संवेदनशील पुर्जे और Bloom Energy जैसी ग्लोबल ग्रीन एनर्जी कंपनियों के लिए हाई-क्वालिटी कंपोनेंट बनाती है. इन प्रोजेक्ट्स तक पहुंचना आसान नहीं होता. इसके पीछे सालों की टेस्टिंग, सख्त क्वालिटी चेक और लंबे समय में बना भरोसा होता है.

क्या करती है कंपनी?

MTAR Technologies हथियार नहीं बनाती, लेकिन ऐसे अहम पुर्जे तैयार करती है, जिनमें जरा-सी चूक पूरे मिशन को रोक सकती है. यहां मैन्युफैक्चरिंग माइक्रॉन लेवल पर होती है. यानी इंसानी बाल से भी कई गुना छोटी हुई तो बड़ा नुकसान हो सकता है. यही वजह है कि MTAR आज भारत के स्पेस, डिफेंस, न्यूक्लियर और ग्रीन एनर्जी प्रोग्राम का भरोसेमंद हिस्सा बन चुकी है. MTAR Technologies का काम बेहद नाजुक है. MTAR की सबसे बड़ी ताकत इसकी सटीकता है. कई बार एक सही पुर्जा बनाने में महीनों लग जाते हैं. यही कठिनाई कंपनी के लिए एक तरह का सुरक्षा कवच भी है, क्योंकि हर कोई इस लेवल की इंजीनियरिंग नहीं कर सकता.

डिफेंस सेक्टर में बढ़ती पकड़

पहले MTAR की कमाई का बड़ा हिस्सा स्पेस और न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स से आता था. अब धीरे-धीरे डिफेंस सेक्टर की हिस्सेदारी बढ़ रही है. यह बदलाव किसी एक बड़े ऐलान से नहीं, बल्कि लगातार मिलने वाले छोटे लेकिन लंबे समय के ऑर्डर से हुआ है. डिफेंस सेक्टर में एक बार सप्लायर चुन लिया जाए, तो उसे बदलना आसान नहीं होता. समय के साथ ऑर्डर बढ़ते हैं और रिश्ता मजबूत होता जाता है.

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