
इनकम टैक्स कानून
New Income Tax Act: भारत के कर (Tax) इतिहास में एक बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है. केंद्र सरकार ने 64 साल पुराने ‘इनकम टैक्स एक्ट 1961’ को अब इतिहास के पन्नों में दर्ज करने का फैसला कर लिया है. आगामी 1 अप्रैल 2026 से देश में एक बिल्कुल नया, आधुनिक और सरल इनकम टैक्स कानून लागू होगा. सरकार का स्पष्ट मानना है कि पुराने कानून की जटिलताओं ने आम करदाता को उलझा कर रखा था, जिसे अब बदलने का वक्त आ गया है. इस नए बदलाव का सीधा असर आपकी जेब, आपकी निवेश की आदतों और रिटर्न भरने के तरीके पर पड़ने वाला है. नए कानून में पारदर्शिता पर जोर दिया गया है, लेकिन कुछ नियम सख्त भी किए गए हैं. आइए समझते हैं कि आखिर वो कौन से बड़े बदलाव हैं जो आम आदमी की जिंदगी को प्रभावित करेंगे.
टैक्स कैलेंडर में बड़ा बदलाव
इनकम टैक्स भरते समय सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन सालों के गणित को लेकर होता था. आम करदाता अक्सर ‘प्रीवियस ईयर’ (जिस साल कमाई हुई) और ‘असेसमेंट ईयर’ (जिस साल टैक्स भरा गया) के फेर में उलझ जाते थे. 1961 के पुराने कानून में यह शब्दावली काफी पेचीदा थी.
नए कानून ने इस समस्या का स्थायी समाधान निकाल दिया है. अब ‘टैक्स ईयर’ (Tax Year) की एक ही व्यवस्था लागू होगी. इसका सीधा मतलब है कि 1 अप्रैल से लेकर 31 मार्च के बीच आप जो भी कमाई करेंगे, उसकी गणना और टैक्स फाइलिंग उसी वर्ष के दायरे में मानी जाएगी. इससे टैक्स कैलकुलेशन की प्रक्रिया बेहद सीधी और सपाट हो जाएगी, जिससे पहली बार टैक्स भरने वालों को भी किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
क्या इंस्टाग्राम पोस्ट से पकड़ी जाएगी टैक्स चोरी?
पिछले कुछ समय से यह चर्चा जोरों पर थी कि क्या टैक्स विभाग अब लोगों के बेडरूम और छुट्टियों तक डिजिटल झांक-तांक करेगा? क्या आपके व्हाट्सएप चैट और इंस्टाग्राम की रील पर अधिकारियों की नजर होगी? नए कानून में इसको लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है. यह सच है कि नए एक्ट में टैक्स अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्य जुटाने की शक्ति दी गई है, लेकिन इसका दायरा सीमित है.
यह प्रावधान केवल उन मामलों के लिए है जहां ‘सीरियस टैक्स इवेशन’ यानी भारी-भरकम टैक्स चोरी का संदेह हो. कोई भी अधिकारी बिना किसी ठोस आधार या सर्च वारंट के किसी आम नागरिक का सोशल मीडिया अकाउंट या निजी संदेश नहीं खंगाल सकता. इसके लिए विभाग को एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा. यानी अगर आप एक ईमानदार करदाता हैं, तो आपको अपनी सोशल मीडिया एक्टिविटी को लेकर डरने की कोई आवश्यकता नहीं है.
लेट रिटर्न पर भी नहीं डूबेगा TDS का पैसा
नौकरीपेशा और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह बदलाव किसी खुशखबरी से कम नहीं है. पुराने नियमों के मुताबिक, अगर आप किसी कारणवश 31 जुलाई (या निर्धारित तिथि) तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल नहीं कर पाते थे, तो आप अपने रिफंड का हक खो देते थे. आपकी मेहनत का पैसा सरकारी खजाने में चला जाता था.
नए इनकम टैक्स एक्ट ने इस कठोर नियम को बदल दिया है. अब अगर आप ‘बिलेटेड रिटर्न’ यानी देरी से भी ITR भरते हैं, तो भी आप अपना टीडीएस (TDS) रिफंड क्लेम कर सकेंगे. हालांकि, अनुशासन बनाए रखने के लिए सरकार ने लेट फीस का प्रावधान रखा है. 5 लाख रुपये से कम आय वालों को 1,000 रुपये और इससे अधिक आय वालों को 5,000 रुपये जुर्माना देना होगा. जुर्माना भरकर ही सही, लेकिन अब आपका बड़ा रिफंड डूबने से बच जाएगा.
गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने वालों को झटका
अब तक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) को टैक्स बचाने और सुरक्षित निवेश का सबसे बेहतरीन साधन माना जाता था, लेकिन नए नियमों ने इसकी चमक थोड़ी फीकी कर दी है. नए एक्ट के अनुसार, अगर आप सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को स्टॉक मार्केट (सेकेंडरी मार्केट) से खरीदते हैं, तो उससे होने वाले मुनाफे पर अब आपको टैक्स देना होगा.
नियमों के मुताबिक, ऐसे मुनाफे पर 12.5% की दर से टैक्स वसूला जाएगा. पहले यह श्रेणी पूरी तरह से टैक्स-फ्री मानी जाती थी. यह बदलाव उन निवेशकों के लिए एक झटका है जो शेयर बाजार के जरिए गोल्ड बॉन्ड में ट्रेडिंग करते थे. हालांकि, जो निवेशक बॉन्ड को उसकी पूरी अवधि (मैच्योरिटी) तक होल्ड करके रखेंगे, उनके लिए राहत के प्रावधान जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन सेकेंडरी मार्केट के खरीदारों को अब अपनी जेब ढीली करनी होगी.






