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फोन पर बात करना अब होगा और भी महंगा; Jio, Airtel और Vi यूजर्स तैयार रखें एक्स्ट्रा पैसे, जानिए कितना बढ़ेगा बोझ

फोन पर बात करना अब होगा और भी महंगा; Jio, Airtel और Vi यूजर्स तैयार रखें एक्स्ट्रा पैसे, जानिए कितना बढ़ेगा बोझ


भारत में मोबाइल यूज़र्स के लिए आने वाला समय थोड़ा महंगा साबित हो सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जून 2026 से मोबाइल रिचार्ज प्लान्स की कीमतों में करीब 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. यह बढ़ोतरी करीब दो साल बाद होने जा रही है, क्योंकि इससे पहले टेलीकॉम कंपनियों ने बड़े स्तर पर टैरिफ में बदलाव नहीं किया था. एनालिस्ट्स का मानना है कि इस फैसले से टेलीकॉम सेक्टर की कमाई की रफ्तार FY27 तक दोगुनी से भी ज्यादा हो सकती है.

क्यों बढ़ रहे हैं मोबाइल टैरिफ?
इन्वेस्टमेंट फर्म Jefferies की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मोबाइल टैरिफ जून 2026 में 15 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह टाइमलाइन इंडस्ट्री के पुराने ट्रेंड्स के हिसाब से बिल्कुल फिट बैठती है. सिर्फ रिचार्ज की कीमतें ही नहीं बढ़ रही हैं, बल्कि देश में डेटा का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. ज्यादा लोग इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हैं, पोस्टपेड प्लान्स की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं और हर यूज़र पहले से ज्यादा डेटा खर्च कर रहा है. इन सभी कारणों से टेलीकॉम कंपनियों की प्रति यूज़र कमाई, यानी ARPU, लगातार ऊपर जा रही है.

FY27 में टेलीकॉम सेक्टर की कमाई को मिलेगा बड़ा बूस्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, रिचार्ज प्राइस हाइक और स्मार्ट प्राइसिंग स्ट्रैटेजी की वजह से FY27 में टेलीकॉम सेक्टर की रेवेन्यू ग्रोथ 16 प्रतिशत सालाना तक पहुंच सकती है. FY26 में यह ग्रोथ करीब 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है. अगर जून 2026 में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो FY27 में ARPU में करीब 14 प्रतिशत की सालाना बढ़त देखी जा सकती है. हालांकि, रिपोर्ट यह भी चेतावनी देती है कि महंगे रिचार्ज की वजह से नए सब्सक्राइबर्स की संख्या ज्यादा न बढ़े और कुछ यूज़र्स खर्च कम करने की कोशिश करें.

Jio और Vodafone Idea पर क्या होगा असर?
रिचार्ज प्राइस हाइक का असर सभी बड़ी टेलीकॉम कंपनियों पर अलग-अलग तरीके से पड़ेगा. रिपोर्ट के अनुसार, Reliance Jio अपने मोबाइल रेट्स में 10 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकता है. इसका मकसद Bharti Airtel के बराबर अपनी वैल्यूएशन को लाना और निवेशकों को बेहतर रिटर्न देना है. वहीं, Vodafone Idea की स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. कंपनी पर भारी कर्ज है और उसे FY27 से FY30 के बीच मोबाइल सर्विस रेट्स में कुल मिलाकर करीब 45 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है, ताकि वह अपने सरकारी बकाया चुका सके.

Vodafone Idea की मुश्किलें अभी खत्म नहीं
फिलहाल सरकार ने Vodafone Idea के Adjusted Gross Revenue यानी AGR बकाया को 87,695 करोड़ रुपये पर फ्रीज कर रखा है. इस रकम का भुगतान FY32 से शुरू होकर FY41 तक चलेगा. अगर सरकार पांच साल का मोरेटोरियम देती है, तो FY30 तक कंपनी पर तत्काल दबाव 35 से 85 प्रतिशत तक कम हो सकता है. इसके बावजूद, Vodafone Idea को अपने नेटवर्क में निवेश जारी रखने के लिए बड़े पैमाने पर टैरिफ बढ़ाने और अतिरिक्त कर्ज या इक्विटी फंडिंग की जरूरत पड़ेगी.

5G निवेश के बाद अब मार्जिन सुधरने की उम्मीद
रिचार्ज प्राइस हाइक और 5G रोलआउट के बड़े चरण के पूरा होने के बाद टेलीकॉम कंपनियों के मार्जिन में सुधार देखने को मिल सकता है. एनालिस्ट्स का मानना है कि 5G इंफ्रास्ट्रक्चर में सबसे ज्यादा खर्च वाला दौर अब खत्म हो चुका है. FY27 तक कैपेक्स यानी पूंजीगत खर्च सीमित स्तर पर रहने की उम्मीद है, जिससे कंपनियों की कमाई पर पॉजिटिव असर पड़ेगा.

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