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Somnath Swabhiman Parv: पीएम मोदी ने किया जलाभिषेक, जानें सोमनाथ मंदिर की वो बातें, जो इसे बनाती हैं दुनिया में सबसे खास

Somnath Swabhiman Parv: पीएम मोदी ने किया जलाभिषेक, जानें सोमनाथ मंदिर की वो बातें, जो इसे बनाती हैं दुनिया में सबसे खास
Somnath Swabhiman Parv: पीएम मोदी ने किया जलाभिषेक, जानें सोमनाथ मंदिर की वो बातें, जो इसे बनाती हैं दुनिया में सबसे खास

सोमनाथ मंदिर Image Credit source: PTI

Somnath Temple: सौराष्ट्र के सागर तट पर स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ के आंगन में आज भक्ति और श्रद्धा का सैलाब उमड़ा है. सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के इस विशेष अवसर पर मंदिर पीएम मोदी ने भगवान सोमनाथ का जलाभिषेक किया और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं. जो इस पर्व की गरिमा को और बढ़ा रहे हैं. आइए जानते हैं आखिर क्यों सोमनाथ मंदिर दुनिया भर के मंदिरों में इतना खास है और इसकी वास्तुकला में क्या रहस्य छिपे हैं.

सोमनाथ मंदिर की इतिहास और पौराणिक महत्व

प्रथम ज्योतिर्लिंग: जहां चंद्रदेव को मिली थी श्राप से मुक्ति

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सोमनाथ को 12 आदि ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है. इस स्थान को प्रभास तीर्थ कहा जाता है. कथा है कि प्रजापति दक्ष के श्राप से मुक्ति पाने के लिए चंद्रदेव (सोम) ने इसी स्थान पर भगवान शिव की घोर तपस्या की थी. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें पुनर्जीवन दिया, इसीलिए इस मंदिर का नाम सोमनाथ पड़ा, जिसका अर्थ है चंद्रमा के स्वामी.

वास्तुकला की भव्यता: सोने की चमक और समुद्र की गूंज

वर्तमान सोमनाथ मंदिर अपनी वास्तुकला के कारण आधुनिक इंजीनियरिंग और प्राचीन शिल्प का बेजोड़ नमूना है:

ऊंचाई और कलश: मंदिर के शिखर की ऊंचाई 150 फीट है. इसके सबसे ऊपरी हिस्से पर 10 टन भारी विशाल कलश स्थापित है.

स्वर्ण आभा: पूरा मंदिर परिसर 1,666 स्वर्ण-मंडित कलशों से जगमगा रहा है. मंदिर की ध्वजा 27 फीट ऊंची है, जो दूर समुद्र से ही दिखाई देती है.

ढांचा: मंदिर को तीन मुख्य हिस्सों में बांटा गया है. गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप. यहां की नक्काशी भारतीय संस्कृति की बारीकियों को जीवंत करती है.

सोमनाथ धाम की विशिष्टताएं

अखंड ज्योति: मंदिर में एक अखंड ज्योति जलती रहती है, जिसे शिव के स्थायी स्वरूप का प्रतीक माना जाता है.

अद्वितीय स्थापत्य: वर्तमान मंदिर चालुक्य शैली की वास्तुकला में बना है. इसकी भव्यता और नक्काशी देखते ही बनती है.

बाण स्तम्भ (बाण-स्तंभ): यह मंदिर की दक्षिण दिशा में स्थापित एक स्तम्भ है. इस पर संस्कृत में एक शिलालेख है, जो कहता है कि इस बिंदु से दक्षिण ध्रुव तक पृथ्वी पर कोई भूभाग नहीं है.

कपिल कुण्ड: मंदिर के पास कपिल मुनि द्वारा स्थापित कपिल कुण्ड है, जहां स्नान को पवित्र माना जाता है.

ये प्राचीन प्रथम ज्योतिर्लिंग शिवभक्तों के लिए बेहद मायने रखता है, इसलिए आंकड़े बताते हैं कि हर साल करीब 92 से 97 लाख श्रद्धालु सोमनाथ महादेव के दर्शन करने पहुंचते हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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