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रिकॉर्ड गिरावट के बाद हल्की बढ़त, फिर भी वैश्विक बाजार में चांदी की कमी

रिकॉर्ड गिरावट के बाद हल्की बढ़त, फिर भी वैश्विक बाजार में चांदी की कमी

शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज (SHFE) पर चांदी का स्टॉक 10 साल के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद थोड़ा सुधरा है, लेकिन वैश्विक बाजार में फिजिकल चांदी की कमी अब भी चिंता का कारण बनी हुई है. 9 फरवरी को एक्सचेंज पर चांदी का स्टॉक घटकर 318.546 टन रह गया था, जो लगभग एक दशक का सबसे निचला स्तर है. इसके बाद 11 फरवरी को यह बढ़कर 342.102 टन हो गया.

हालांकि यह बढ़त राहत देने वाली लगती है, लेकिन मौजूदा स्टॉक 12 जनवरी 2021 के रिकॉर्ड 3,091.112 टन के मुकाबले करीब 89% कम है. यानी पिछले चार वर्षों में एक्सचेंज पर उपलब्ध चांदी के भंडार में भारी गिरावट आई है.

कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव

पिछले एक साल में चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी और गिरावट दोनों देखने को मिली हैं. निवेशकों की भारी खरीदारी से कीमतें दोगुनी से ज्यादा बढ़ीं और जनवरी में पहली बार 100 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गईं. इससे गोल्ड-टू-सिल्वर रेशियो 50 से नीचे आ गया, जो 2012 के बाद पहली बार हुआ.

हालांकि जनवरी के अंत में कीमतों में रिकॉर्ड एकदिवसीय गिरावट आई, जिससे बाजार में घबराहट फैल गई. बाद में कीमतें 80 डॉलर से नीचे आ गईं, लेकिन अब फिर से कुछ स्थिरता के संकेत मिल रहे हैं. फिर भी बाजार में अस्थिरता बनी हुई है.

छठे साल भी रहेगा घाटा

सिल्वर इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में वैश्विक चांदी बाजार लगातार छठे साल घाटे में रह सकता है. रिटेल निवेश की मांग 20% बढ़कर 227 मिलियन औंस तक पहुंचने का अनुमान है. वहीं ऊंची कीमतों के कारण ज्वेलरी और सिल्वरवेयर की मांग में गिरावट आ सकती है.

सप्लाई में 1.5% की बढ़ोतरी के बावजूद कुल उत्पादन 1.05 अरब औंस रहने का अनुमान है, जो मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा. रिपोर्ट के अनुसार करीब 67 मिलियन औंस का घाटा रह सकता है, जिससे बाजार में पहले से बनी तंगी और बढ़ सकती है.

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