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गोल्ड के दाम में ‘झटके’, ज्वेलरी शोरूम्स पर ‘धक्के’! इस दिग्गज ने बताया, सोने का पीछा क्यों नहीं छोड़ रहे लोग?

गोल्ड के दाम में ‘झटके’, ज्वेलरी शोरूम्स पर ‘धक्के’! इस दिग्गज ने बताया, सोने का पीछा क्यों नहीं छोड़ रहे लोग?
गोल्ड के दाम में 'झटके', ज्वेलरी शोरूम्स पर 'धक्के'! इस दिग्गज ने बताया, सोने का पीछा क्यों नहीं छोड़ रहे लोग?

सोने की खरीदारी को लेकर टाइटन कंपनी के एमडी ने बड़ा बयान दिया है.

भले ही रिटर्न देने के मामले में सोना 2025 में चांदी से पीछे रह गया हो, लेकिन साल 2026 में गोल्ड की कीमतों की तेजी ने सभी को हैरान कर दिया है. खास बात तो ये है कि लगातार उतार चढ़ाव के बीच सोने की डिमांड में कोई कमी नहीं है. वैसे कुछ दिनों में गोल्ड की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है. लेकिन ज्वेल्री शोरूम में गोल्ड के लिए भारी भीड़ इस बात का सुबूत है कि गोल्ड निवेश के मामले में आज भी नंबर 1 बना हुआ है. इस बात की तस्दीक खुद टाइटन कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) अजय चावला ने की है. उन्होंने कहा कि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भारतीय खरीदारों को प्रभावित नहीं किया है. उन्होंने कहा कि ग्राहक अब कीमतों में गिरावट को अवसर मानकर बाजार में प्रवेश कर रहे हैं, बिलकुल शेयर निवेशकों की तरह. आइए आपको भी विस्तार से बताते हैं कि आखिर उन्होंने क्या कहा…

लोगों ने शुरू की खरीदारी

टाइटन कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) अजय चावला ने कहा कि पहले कई ग्राहक महंगी कीमतों के कारण सोना खरीदने में देरी करते थे, लेकिन अब उन्होंने अपनी रणनीति बदल ली है और कीमत गिरने पर सोना खरीदना शुरू कर दिया है, बजाय इसके कि अनिश्चित समय तक इंतजार करें. चावला ने बताया कि लोगों ने लंबे समय तक इंतजार करने में नुकसान उठाया है, इसलिए अब वे हर कीमत गिरावट का फायदा उठाकर सोने की खरीद कर रहे हैं, जैसे शेयर बाजार में करते हैं. उन्होंने माना कि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन मांग मजबूत बनी हुई है. चावला ने कहा कि ग्राहक इसमें हिस्सा लेने की कोशिश करेंगे. जो लोग पिछड़ गए, वे अब खरीदने आएंगे. उन्होंने कहा कि इससे लोगों की सोने के प्रति मजबूत रुचि और विश्वास का पता चलता है.

गिरावट में खरीदारी सही समय

टाइटन की आभूषण कारोबार इकाई इस रुझान से लाभान्वित हुई है. टाइटन की आभूषण इकाई में प्रमुख ब्रांड तानिष्क शामिल है. सोने की कीमतों में फरवरी, 2026 की शुरुआत में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया. 10 ग्राम के लिए कीमतें करीब 1.61 लाख रुपए येतक बढ़ीं और फिर वैश्विक संकेतों और मुनाफा निकालने के कारण हाल ही में गिरावट आई. चावला के अनुसार, कई लोग जिन्होंने साल के पहले छह महीनों में सोने की खरीद में देरी की थी, उन्होंने त्योहारी और शादी के सीजन से पहले सोना खरीदना शुरू कर दिया क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि कीमतें अब और नहीं गिरेंगी. चावला ने सुझाव दिया कि यह अनुभवजन्य प्रवृत्ति कई घरों में देखने को मिल रही है, जहां महिलाएं आभूषणों को एक सुरक्षित निवेश के रूप में स्थापित कर रही हैं, जिससे पुरुष थोड़े संयमित हो रहे हैं.

फोमो ने बढ़ाई डिमांड

उन्होंने आगे कहा कि FOMO (कुछ छूट जाने का डर) की भावना ने भी मांग को बढ़ाया. चावला ने कहा कि FOMO (कुछ छूट जाने का डर) की भावना थी. लोग तुरंत खरीदारी करने लगे, यह सोचकर कि बाद में पछताने से बेहतर है कि अभी खरीद लें. और यह सिलसिला, मुझे लगता है, जनवरी तक चलता रहा. हालांकि, उन्होंने भविष्यवाणियां करने से भी आगाह किया, और पिछले दो-तीन वर्षों में आई अस्थिरता की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा कि कभी-कभी आप यह अनुमान नहीं लगा सकते कि एक महीना कैसा जाएगा.

पहला आधा हिस्सा बहुत अच्छा जा सकता है, और दूसरे आधे हिस्से में आपको कुछ मंदी देखने को मिल सकती है, और इसका उल्टा भी हो सकता है. उन्होंने बताया कि कंपनी का अप्रोच मजबूत मांग के समय अधिकतम लाभ कमाना रहा है. चावला ने कहा कि जब हालात अच्छे हों, जब खरीदारी का मौका हो, चाहे शादी हो या त्योहार, हमें पूरी कोशिश करनी चाहिए, इसका भरपूर फायदा उठाना चाहिए क्योंकि हमें नहीं पता कि एक महीने बाद या 15 दिन बाद क्या होगा.

भविष्यवाणी करना सही नहीं

उन्होंने बताया कि सोने की कीमतें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक तरलता जैसे व्यापक मैक्रोइकॉनॉमिक कारकों से जुड़ी रहती हैं. चावला ने कहा कि हम इसकी भविष्यवाणी नहीं कर सकते, लेकिन… हमने कई निवेश सलाहकारों और फाइनेंशियल सेक्टर से जुड़े कई लोगों से जो सुना है, उनका मानना ​​है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों को जोखिम कम करने की स्थायी आवश्यकता है और इसलिए वे सोने को एक स्ट्रक्चरल निवेश के रूप में देखते हैं. साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि अस्थिरता “अपरिहार्य” है क्योंकि किसी भी वस्तु की कीमत में समय-समय पर कुछ सुधार होंगे. उन्होंने आगे कहा कि सुधार होंगे, उतार-चढ़ाव होंगे, अस्थिरता होगी. मेरा मतलब है, यह जोखिम भरा हो सकता है, लेकिन यदि आप दीर्घकालिक निवेश कर रहे हैं, तो शायद इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

दिसंबर में अच्छा रेवेन्यू

दिसंबर तिमाही के बारे में पूछे जाने पर, चावला ने कहा कि यह “शानदार” रही और इस वृद्धि का नेतृत्व टाइटन के ज्वेलरी सेक्शन ने किया, जिसने अपने राजस्व में 45.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज करते हुए 23,492 करोड़ रुपए का रेवेन्यू जेनरेट किया. चावला ने कहा कि टाइटन ने दिसंबर तिमाही में त्योहारी और शादी के मौसम के दौरान इन्वेंट्री, खुदरा निवेश या मार्केटिंग में कोई समझौता नहीं किया. चावला ने कहा कि वास्तव में, हमने मार्केटिंग पर बहुत अधिक खर्च किया. हमने सोचा कि यही बाज़ार में हिस्सेदारी बढ़ाने का समय है. इसलिए हमने मार्केटिंग पर बहुत आक्रामक रुख अपनाया, जिसमें दृश्यता, नवीनता, नवाचार और मशहूर हस्तियों को शामिल करना शामिल था. आभूषण सेक्शन के भविष्य के बारे में उन्होंने कहा कि अब तक तो स्थिति अच्छी है, लेकिन अस्थिरता बनी रहेगी.

कैसे रहे तिमाही आंकड़े

उन्होंने कहा कि एक अच्छा महीना यह गारंटी नहीं देता कि अगला महीना भी बहुत अच्छा होगा. अब जबकि सोने की कीमतें लगातार ऊपर की ओर बढ़ने के बजाय ऊपर-नीचे हो रही हैं, हम इंतजार करेंगे और देखेंगे. अभी तक तो स्थिति ठीक-ठाक है. अच्छी है. मैं इससे नाखुश नहीं हूं. टाइटन का ज्वेलरी सेक्शन रेवेन्यू में सबसे बड़ा योगदान देता है. वित्त वर्ष 2025 में, टाटा ग्रुप और तमिलनाडु सरकार के ज्वाइंट वेंचर टाइटन का ऑपरेशनल रेवेन्यू 57,339 करोड़ रुपए था, जिसमें इसके ज्वेलरी सेक्शन का योगदान 46,571 करोड़ रुपए देखने को मिला था, जो 81 फीसदी से अधिक है.

Khabar Monkey
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