सोने में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2021-22 Series-I के लिए प्रीमैच्योर रिडेम्पशन प्राइस 15,840 रुपये प्रति यूनिट तय कर दिया है. इस कीमत पर निवेशकों को करीब 235 प्रतिशत का शानदार रिटर्न मिल रहा है. खास बात यह है कि यह फायदा सिर्फ सोने की कीमत बढ़ने से मिला है, इसमें सालाना 2.5 फीसदी ब्याज शामिल नहीं है. ऐसे में SGB एक बार फिर लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए मजबूत निवेश विकल्प बनकर उभरा है.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2021-22 Series-I के निवेशकों के लिए समय से पहले बॉन्ड भुनाने यानी प्रीमैच्योर रिडेम्पशन की कीमत घोषित कर दी है. RBI के मुताबिक, 25 मई 2026 से निवेशक अपने बॉन्ड को 15,840 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से रिडीम कर सकेंगे.
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RBI ने बताया कि यह रिडेम्पशन प्राइस 999 प्योरिटी वाले गोल्ड के पिछले तीन कारोबारी दिनों के औसत के अनुसार, निवेशक जारी होने की तारीख से पांच साल बाद बॉन्ड को समय से पहले भुना सकते हैं. हालांकि यह सुविधा केवल ब्याज भुगतान की तय तारीखों पर ही उपलब्ध होती है. SGB 2021-22 Series-I को ऑनलाइन खरीदने वाले निवेशकों ने 4,727 रुपये प्रति ग्राम के भाव पर निवेश किया था. वहीं ऑफलाइन निवेशकों के लिए कीमत 4,777 रुपये प्रति ग्राम थी. अब रिडेम्पशन प्राइस 15,840 रुपये पहुंचने से ऑनलाइन निवेशकों को प्रति ग्राम 11,113 रुपये का सीधा फायदा हुआ है.
235 फीसदी का तगड़ा रिटर्न
अगर प्रतिशत के हिसाब से देखें तो निवेशकों को करीब 235.1 फीसदी का तगड़ा रिटर्न मिला है. इसमें बॉन्ड पर मिलने वाला 2.5 फीसदी सालाना ब्याज शामिल नहीं है. यानी कुल रिटर्न इससे भी ज्यादा बैठता है. उदाहरण के तौर पर, अगर किसी निवेशक ने उस समय SGB में 1 लाख रुपये लगाए थे, तो उसकी निवेश राशि अब बढ़कर लगभग 3.35 लाख रुपये हो गई है. इससे साफ है कि लंबी अवधि में गोल्ड बॉन्ड ने निवेशकों को शानदार कमाई कराई है.
हालांकि अब SGB से जुड़े टैक्स नियमों में बदलाव हो चुका है. 1 अप्रैल 2026 से लागू नए नियमों के तहत प्रीमैच्योर रिडेम्पशन पर कैपिटल गेन टैक्स देना होगा. यह नियम उन निवेशकों पर भी लागू होगा जिन्होंने बॉन्ड सीधे सरकार के इश्यू में खरीदे थे. वहीं, टैक्स छूट का फायदा सिर्फ उन्हीं मूल निवेशकों को मिलेगा जो SGB को पूरी 8 साल की मैच्योरिटी तक होल्ड करेंगे. दूसरी तरफ सेकेंडरी मार्केट से बॉन्ड खरीदने वाले निवेशकों को मैच्योरिटी तक होल्ड करने पर भी टैक्स छूट नहीं मिलेगी.
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