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Ramayan: क्या माता सीता थीं रावण की बेटी? रामायण की यह रहस्यमयी कथा चौंका देगी

Ramayan: क्या माता सीता थीं रावण की बेटी? रामायण की यह रहस्यमयी कथा चौंका देगी
Ramayan: क्या माता सीता थीं रावण की बेटी? रामायण की यह रहस्यमयी कथा चौंका देगी

माता सीता के जन्म की कहानीImage Credit source: AI

Ramayan Unknown Facts: रामायण की गाथा में हम सभी जानते हैं कि माता सीता राजा जनक की पुत्री थीं, जिन्हें वे हल चलाते समय भूमि से प्राप्त हुए थे.लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि माता सीता का संबंध रावण के परिवार से भी था? अद्भुत रामायण में एक ऐसी कथा मिलती है जो सीता जी को रावण और मंदोदरी की संतान बताती है. आइए जानते हैं क्या है इस रहस्यमयी जन्म के पीछे की पूरी कहानी.

ऋषियों का रक्त और वह घातक कलश

कथा के अनुसार, रावण अपनी शक्ति के मद में चूर होकर ऋषियों को प्रताड़ित करता था. वह ऋषियों की हत्या कर उनका रक्त एक कलश में इकट्ठा करता था. कहा जाता है कि ऋषि कुत्सा अपनी पुत्री के रूप में देवी लक्ष्मी को पाने के लिए विशेष मंत्रों के साथ दूध को एक कलश में अभिमंत्रित कर रहे थे. रावण ने उस दूध को भी अपने रक्त वाले कलश में मिला दिया. ऋषियों ने इस अत्याचार से दुखी होकर श्राप दिया था कि यही रक्त और कलश एक दिन रावण के विनाश का कारण बनेगा और उसकी ही पहली संतान उसके अंत का आधार होगी.

मंदोदरी का आत्मघाती कदम और गर्भधारण

रावण ने उस कलश को अपनी पत्नी मंदोदरी को सौंपते हुए कहा कि यह तीव्र विष है, इसे संभाल कर रखना. कुछ समय बाद, जब रावण के व्यवहार से दुखी होकर मंदोदरी ने अपने प्राण त्यागने का मन बनाया, तो उन्होंने विष समझकर उसी कलश का सारा रक्त और दूध पी लिया. विष से मृत्यु होने के बजाय, ऋषियों के मंत्रोच्चारित दूध और दैवीय संयोग के कारण मंदोदरी गर्भवती हो गईं. लोक-लाज और रावण के डर से कि वह इसे स्वीकार नहीं करेगा, मंदोदरी ने इस भ्रूण को कहीं दूर छोड़ने का फैसला किया.

मिथिला की भूमि और सीता नाम का रहस्य

मंदोदरी लंका से सुदूर मिथिला की भूमि पर पहुंचीं और वहां उन्होंने उस नवजात कन्या को एक कलश में रखकर जमीन में गाड़ दिया. उन्हीं दिनों मिथिला में भयंकर अकाल पड़ा था.ऋषियों की सलाह पर राजा जनक ने स्वयं हल चलाना शुरू किया. हल का अगला भाग जमीन में दबे उस कलश से टकराया. जब राजा जनक ने वह कलश निकाला, तो उसमें एक बहुत ही सुंदर कन्या मिली. हल के फल से टकराकर मिलने के कारण उस कन्या का नाम सीता रखा गया.

रावण के अंत का आधार बनीं सीता

अद्भुत रामायण के अनुसार, माता सीता रावण के ही कर्मों और ऋषियों के श्राप का परिणाम थीं. मंदोदरी के गर्भ से जन्म लेने के कारण वे तकनीकी रूप से रावण की पुत्री हुईं, लेकिन भूमि से प्रकट होने के कारण उन्हें भूमिसुता कहा गया. आखिर में जैसा ऋषियों ने श्राप दिया था, सीता जी ही रावण के विनाश का मुख्य कारण बनीं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी अद्भुत रामायण की जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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