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Ramadan 2026: खजूर खाकर ही क्यों तोड़ा जाता है रोजा, जानिए रमजान में फास्टिंग का असली उद्देश्य क्या?

Ramadan 2026: खजूर खाकर ही क्यों तोड़ा जाता है रोजा, जानिए रमजान में फास्टिंग का असली उद्देश्य क्या?
Ramadan 2026: खजूर खाकर ही क्यों तोड़ा जाता है रोजा, जानिए रमजान में फास्टिंग का असली उद्देश्य क्या?

इफ्तार में खजूर क्यों? Image Credit source: PTI

Ramadan fasting Spiritual Meaning: रमजान का पाक महीना शुरू होने वाला है और इस महीने का मुस्लिम समुदाय में बेहद खास महत्व होता है. रमजान में रोजा रखना, नमाज अदा करना, दान-पुण्य करना और आत्मसंयम रखना बेहद पुण्य कार्य माना जाता है. इस दौरान सहरी (सुबह का भोजन) और इफ्तार (शाम को रोजा खोलना) की विशेष अहमियत होती है.

इफ्तार के समय अक्सर देखा जाता है कि मुस्लिम समुदाय के लोग सबसे पहले खजूर खाकर रोजा खोलते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर रोजा खजूर से ही क्यों खोला जाता है? इसके पीछे धार्मिक मान्यता के साथ-साथ वैज्ञानिक कारण भी जुड़े हुए हैं. आइए विस्तार से जानते हैं.

खजूर से रोजा खोलने की धार्मिक मान्यता

इस्लामिक मान्यता के अनुसार, रोजा खजूर खाकर खोलना सुन्नत माना जाता है. सुन्नत का मतलब होता है पैगंबर की बताई या अपनाई गई परंपरा. माना जाता है कि हजरत मुहम्मद को खजूर बेहद प्रिय था और वे रोजा खोलते समय सबसे पहले खजूर का सेवन करते थे. इसी वजह से मुस्लिम समुदाय में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी लोग इफ्तार की शुरुआत खजूर से करना शुभ और पुण्यकारी मानते हैं.

खजूर से रोजा खोलने के वैज्ञानिक कारण

धार्मिक महत्व के अलावा खजूर का सेवन स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद माना जाता है.

तुरंत ऊर्जा देता है

पूरा दिन रोजा रखने के बाद शरीर में ग्लूकोज की मात्रा कम हो जाती है. खजूर में प्राकृतिक शुगर होती है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देती है और कमजोरी दूर करती है.

पाचन तंत्र को करता है मजबूत

खजूर में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो लंबे समय तक खाली पेट रहने के बाद पाचन प्रक्रिया को सामान्य बनाने में मदद करता है.

शरीर को हाइड्रेट रखने में मददगार

रोजा के दौरान लंबे समय तक पानी नहीं पिया जाता, जिससे शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है. खजूर शरीर को जरूरी पोषक तत्व देकर इसे संतुलित रखने में मदद करता है.

सिरदर्द और थकान से राहत

रोजा रखने के बाद कई लोगों को सिरदर्द और थकान महसूस होती है. खजूर में मौजूद विटामिन और मिनरल्स शरीर को ताकत देकर इन समस्याओं को कम करने में सहायक होते हैं.

रमजान में रोजा रखने का असली उद्देश्य

रमजान केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि इसका आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व भी होता है.रोजा रखने से व्यक्ति अपने मन और इच्छाओं पर नियंत्रण रखना सीखता है.क्योंकि रमजान का महीना आत्मचिंतन और अल्लाह की इबादत का समय माना जाता है, जिससे आत्मिक शांति मिलती है. इस महीने में जकात और दान का विशेष महत्व होता है, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद की जाती है. रोजा व्यक्ति को धैर्य रखना और कठिन परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखना भी सिखाता है.

साल 2026 में कब शुरू होगा रमजान?

इस्लामिक कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होता है, इसलिए रमजान की सही तारीख चांद दिखाई देने के बाद तय होती है. मान्यता के अनुसार, अगर भारत में 18 फरवरी 2026 की शाम को चांद दिखाई देता है, तो 19 फरवरी 2026 से पहला रोजा रखा जाएगा.

ये भी पढ़ें: रोज़े के दौरान क्या करें और क्या नहीं? रमजान शुरू होने से पहले जान लें पाक महीने के जरूरी नियम

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी इस्लामिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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