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गड्ढे ले रहे जान! 5 साल में इतना बढ़ा आंकड़ा, यूपी में सबसे ज्यादा मौतें

गड्ढे ले रहे जान! 5 साल में इतना बढ़ा आंकड़ा, यूपी में सबसे ज्यादा मौतें
गड्ढे ले रहे जान! 5 साल में इतना बढ़ा आंकड़ा, यूपी में सबसे ज्यादा मौतें

सांकेतिक तस्वीर

हाल ही में खुदे गड्ढे में गिरने से कई लोगों के मौत की खबरें सामने आई हैं. हाल ही में 6 फरवरी को ही 25 साल के बैंक कर्मचारी की दिल्ली के जनकपुरी और नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत हो गई थी. इसी बीच सरकार ने भी गड्ढे में गिरने वाले लोगों के आंकड़ों को संसद में पेश किया. आंकड़ों के मुताबिक, सरकार ने संसद को बताया कि पिछले पांच सालों में गड्ढों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में 53 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

2020 और 2024 के बीच देश भर में 9,438 लोगों की मौत हुई. इनमें से 54 परसेंट से ज्यादा मौतें अकेले उत्तर प्रदेश में हुईं. ये सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य बनकर उभरा है. रोड ट्रांसपोर्ट और हाईवे मिनिस्टर नितिन गडकरी के लिखित जवाब में शेयर किए गए डेटा से पता चलता है कि 2021 में मौतों में थोड़ी कमी आई, लेकिन तब से वे लगातार बढ़ी हैं और 2024 में 2,385 मौतों के पीक पर पहुंच गईं.

हर साल कितनी मौतें?

हालांकि सालाना मौतों की संख्या 2020 में 1,555 से 2021 में 1,481 तक थोड़ी कम हुई, लेकिन तब से यह हर साल बढ़ी है. 2022 में मौतें बढ़कर 1,856 हो गईं, 2023 में 2,161 और 2024 में 2,385 पर पहुंच गईं. उत्तर प्रदेश में लगातार सबसे ज्यादा मौतें हुईं. वहीं 2020 और 2024 के बीच 5,127 मौतें हुईं. अकेले 2024 में राज्य में गड्ढों से जुड़ी 1,369 मौतें हुईं. ये देश भर में हुई कुल मौतों के आधे से ज्यादा हैं. जबकि 2023 में यह संख्या 1,320 और 2022 में 1,030 थी.

मध्य प्रदेश में पांच सालों में कुल 969 मौतें हुईं, जिसमें 2024 में 277 मौतें शामिल हैं. इसी समय में तमिलनाडु में 612 मौतें हुईं, जबकि पंजाब में 414 मौतें हुईं.

किन राज्यों में मौत की कोई सूचना नहीं?

मंत्रालय को सौंपी गई राज्य पुलिस रिपोर्ट से लिए गए डेटा से पता चला कि आंध्र प्रदेश, बिहार और गोवा जैसे कुछ राज्यों ने पांच साल के समय में गड्ढों से जुड़ी कोई दुर्घटना या मौत की सूचना नहीं दी. इस दौरान, देश भर में गड्ढों से जुड़े 23,056 एक्सीडेंट हुए. इनमें 19,956 लोग घायल हुए. जिनमें से 9,670 को गंभीर चोटों की कैटेगरी में रखा गया.

गडकरी ने कहा कि नेशनल हाईवे के डेवलपमेंट और मेंटेनेंस के लिए केंद्र जिम्मेदार हैं, जबकि संबंधित राज्य सरकारें अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली सड़कों के लिए जिम्मेदार हैं. उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने मौजूदा NH नेटवर्क के मेंटेनेंस को प्राथमिकता दी है और यह पक्का करने के लिए एक सिस्टम बनाया है कि सभी सेक्शन की मरम्मत जिम्मेदार मेंटेनेंस एजेंसियों की तरफ से किया जाए.

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