
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के पहले चरण में उत्तर बिहार के जिलों का दौरा कर रहे हैं. इस दौरान उन्होंने बिहार को 2030 तक विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने का बड़ा दावा किया है, जिसे लेकर राज्य की सियासत गरमा गई है. मुख्यमंत्री का यह बयान जहां सत्ता पक्ष के लिए एक महत्वपूर्ण एजेंडा है, वहीं विपक्ष इसे केवल एक चुनावी जुमला करार दे रहा है. विपक्ष का कहना है कि मुख्यमंत्री 20 वर्षों से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बाद अब अगले पांच वर्षों में बिहार को विकसित बनाने की बात कह रहे हैं, जबकि राज्य आर्थिक विकास के सभी मानकों पर देश के अन्य राज्यों से काफी पीछे है.
कांग्रेस नेता ऋषि मिश्रा ने मुख्यमंत्री के इस दावे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि आर्थिक विकास के विभिन्न मापदंडों पर बिहार देश के राज्यों में बीसवें स्थान या उससे भी नीचे है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य में इथेनॉल जैसी फैक्टरियां भी बंद हो रही हैं, तो बिहार कैसे विकसित राज्य बनेगा? ऋषि मिश्रा ने मुख्यमंत्री से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा. वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) भी 2030 तक विकसित राज्य के बयान पर लगातार निशाना साध रही है, उनके मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव ने इस दावे को खोखला बताया है. विपक्ष का तर्क है कि बिहार में प्रति व्यक्ति आय सबसे कम है और सरकार की नीतियों के कारण लगे उद्योग भी बंद हो रहे हैं, ऐसे में नए उद्योग लगाने का झांसा दिया जा रहा है.
हालांकि, मुख्यमंत्री के इस बयान का बचाव करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. सत्ता पक्ष का कहना है कि 2005 के बाद से बिहार की तस्वीर लगातार बदली है. भाजपा नेता सुरेश रूंगटा और जदयू विधायक मीना कुमारी जैसे नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले पांच वर्षों में उद्योग पर विशेष ध्यान दिया गया है और एक करोड़ नौकरी के लक्ष्य के माध्यम से आर्थिक समृद्धि आएगी, जिससे उपभोक्ता वस्तुओं की मांग में भी वृद्धि होगी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी यात्रा के दौरान यह भी दोहराया है कि बिहार में अधिक से अधिक युवाओं को नौकरी और रोजगार मिले, यह सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए राज्य के सभी जिलों में उद्योग लगाए जाएंगे तथा युवाओं को दक्ष बनाया जाएगा ताकि उन्हें आसानी से रोजगार मिल सके.
इस तरह, 2030 तक बिहार को विकसित राज्य बनाने के मुद्दे पर सत्ता पक्ष अपनी दावेदारी पेश कर रहा है, तो वहीं विपक्ष मुखर होकर इसका विरोध कर रहा है. यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में यह राजनीतिक बहस क्या मोड़ लेती है और मुख्यमंत्री के दावे को हकीकत में बदलने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं. राज्य में विकास और रोजगार का मुद्दा लगातार राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बना हुआ है.






