चीन ने अपने संवेदनशील शिनजियांग प्रांत में एक नया काउंटी (शहर) बनाया है, जिसका नाम सेनलिंग रखा गया है. यह इलाका शिनजियांग में है और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अफगानिस्तान बॉर्डर के पास स्थित है. माना जा रहा है कि चीन ने यह कदम सीमा सुरक्षा मजबूत करने और उइगर उग्रवादियों की घुसपैठ रोकने के लिए उठाया है. चीन में काउंटी एक प्रशासनिक इकाई होती है, जिसे भारत के जिले जैसा समझा जा सकता है. यह प्रांत और प्रीफेक्चर स्तर के शहर के नीचे आता है. इसके तहत कई छोटे शहर, कस्बे और गांव शामिल होते हैं. काउंटी का काम स्थानीय प्रशासन चलाना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सरकारी योजनाओं को लागू करना होता है.

यह नया काउंटी काराकोरम पहाड़ियों के पास है और अफगानिस्तान के वाखान कॉरिडोर से जुड़ा हुआ है. वाखान कॉरिडोर एक पतली जमीन की पट्टी है, जो शिनजियांग को अफगानिस्तान से जोड़ती है. चीन को लंबे समय से डर है कि उइगर उग्रवादी इसी रास्ते से उसके इलाके में घुस सकते हैं. खासकर ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM) जैसे संगठनों को लेकर चीन सतर्क रहता है.
एक साल में बनाई तीसरी काउंटी
चीन ने पिछले एक साल में शिनजियांग में यह तीसरी नई काउंटी बनाई है. इससे पहले उसने हीन और हेकांग काउंटी बनाए थे. भारत ने इन पर विरोध जताया था, क्योंकि इनका कुछ हिस्सा लद्दाख यूनियन टेरेटरी में आता है. हीन काउंटी में अक्साई चिन का बड़ा हिस्सा शामिल है, जो 1962 के युद्ध के बाद से चीन के कब्जे में है और भारत-चीन विवाद का अहम मुद्दा है.
सेनलिंग काउंटी की घोषणा 26 मार्च को की गई थी, लेकिन इसकी सीमाएं और प्रशासनिक जानकारी अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं की गई है. इसे काशगर प्रीफेक्चर के तहत रखा जाएगा. काशगर एक ऐतिहासिक शहर है, जो पुराने सिल्क रूट पर है और चीन को दक्षिण और मध्य एशिया से जोड़ता है.
काशगर से CPEC की शुरुआत
काशगर से ही चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) प्रोजेक्ट की शुरुआत होती है. यह करीब 60 अरब डॉलर का बड़ा प्रोजेक्ट है, जो PoK से होकर गुजरता है और भारत इसका विरोध करता रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि नया काउंटी बनाना चीन की रणनीति का हिस्सा है, जिससे वह सीमा क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है.
फुदान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लिन मिनवांग के अनुसार, यह कदम दिखाता है कि चीन इस इलाके की अहमियत को और ज्यादा समझ रहा है. वहीं, स्टिम्सन सेंटर की विशेषज्ञ यून सन का कहना है कि इससे स्थानीय स्तर पर प्रशासन मजबूत होगा और सीमावर्ती इलाकों में स्थिरता आएगी. इन इलाकों में पहले से जातीय तनाव और बाहरी घुसपैठ का खतरा रहता है.
चीन की हरकत पर MEA का बयान
चीन की ओर से जगहों को काल्पनिक नाम दिए जाने के मुद्दे पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि भारत ऐसे किसी भी शरारती प्रयास को पूरी तरह खारिज करता है, जिसमें चीन भारत के हिस्सों को नए या गलत नाम देने की कोशिश करता है. उन्होंने कहा कि इस तरह के झूठे दावे और मनगढ़ंत कहानियां सच्चाई नहीं बदल सकतीं. अरुणाचल प्रदेश सहित ये सभी इलाके पहले भी भारत का हिस्सा थे, आज भी हैं और हमेशा रहेंगे. जायसवाल ने यह भी कहा कि चीन की ऐसी हरकतें दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य करने की कोशिशों को नुकसान पहुंचाती हैं और आपसी समझ को कमजोर करती हैं.





