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Phulera Dooj 2026: फुलेरा दूज के दिन क्यों नहीं देखा जाता शादी का मुहूर्त? जानें इस दिन की अनोखी परंपरा

Phulera Dooj 2026: फुलेरा दूज के दिन क्यों नहीं देखा जाता शादी का मुहूर्त? जानें इस दिन की अनोखी परंपरा
Phulera Dooj 2026: फुलेरा दूज के दिन क्यों नहीं देखा जाता शादी का मुहूर्त? जानें इस दिन की अनोखी परंपरा

फुलेरा दूज 2026Image Credit source: PTI

Phulera Dooj 2026 Date: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, फाल्गुन महीने में आने वाली फुलेरा दूज को सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है. यह दिन न केवल भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के प्रेम का प्रतीक है, बल्कि इसे अबूझ मुहूर्त यानी बिना मुहूर्त देखे काम करने वाला दिन भी कहा जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन शादी करने के लिए किसी पंडित से मुहूर्त निकलवाने की जरूरत क्यों नहीं पड़ती? आइए जानते हैं फुलेरा दूज की तिथि, महत्व और इससे जुड़ी अनोखी परंपराओं के बारे में.

फुलेरा दूज 2026 की तिथि और शुभ समय

  • द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में फुलेरा दूज की तिथि इस प्रकार है.
  • द्वितीया तिथि का आरंभ: 18 फरवरी 2026, शाम 4 बजकर 57 मिनट से.
  • द्वितीया तिथि का समापन: 19 फरवरी 2026, दोपहर 3 बजकर 58 मिनट पर.
  • उदया तिथि के अनुसार: फुलेरा दूज 19 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी.

क्यों नहीं देखा जाता इस दिन शादी का मुहूर्त?

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, विशेषकर विवाह के लिए ग्रहों और नक्षत्रों की चाल देखी जाती है. लेकिन फुलेरा दूज के दिन को अबूझ मुहूर्त की श्रेणी में रखा गया है. इसके पीछे मुख्य कारण ये हैं.

दोषमुक्त दिन: माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा और सूर्य की स्थिति ऐसी होती है कि पूरा दिन हर प्रकार के दोषों से मुक्त रहता है.

श्री कृष्ण का आशीर्वाद: पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने फूलों के साथ होली खेलने की परंपरा शुरू की थी. उनके आशीर्वाद से यह दिन इतना पवित्र हो गया कि इसमें किसी विशेष मुहूर्त की आवश्यकता नहीं रहती.

शादियों का सीजन: अगर किसी जोड़े की कुंडली में ग्रहों का मेल नहीं बैठ रहा हो या शादी के लिए कोई शुभ तिथि नहीं मिल रही हो, तो फुलेरा दूज के दिन बिना सोचे-समझे विवाह संपन्न किया जा सकता है.

फुलेरा दूज की अनोखी परंपरा

इस दिन की सबसे खूबसूरत परंपरा ब्रज क्षेत्र (मथुरा, वृंदावन) में देखने को मिलती है.

  • फूलों से श्रृंगार: मंदिरों में भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी का फूलों से भव्य श्रृंगार किया जाता है.
  • फूलों की होली: लोग रंगों के बजाय एक-दूसरे पर फूलों की पंखुड़ियां फेंकते हैं. इसे फूलों वाली होली कहा जाता है.
  • पकवानों का भोग: इस दिन घरों और मंदिरों में विशेष रूप से मालपुआ और खीर का भोग लगाया जाता है.

महत्व की बात: फुलेरा दूज को सर्दियों के मौसम के अंत और वसंत के आगमन का सूचक भी माना जाता है. यही कारण है कि इस दिन प्रकृति भी खिली-खिली रहती है.

क्या करें इस दिन?

  • यदि आप नया व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं या गृह प्रवेश करना चाहते हैं, तो यह दिन सर्वश्रेष्ठ है.
  • राधा-कृष्ण की एक साथ पूजा करें, इससे वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है.
  • भक्ति भाव से फूलों का दान करें, इससे घर में खुशहाली आती है.

ये भी पढ़ें: 18 या 19 फरवरी, कब है फुलेरा दूज? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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