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देश को बचाने वाले नफरती बात कर रहे… डोभाल के ‘प्रतिशोध’ वाले बयान पर बोलीं महबूबा

देश को बचाने वाले नफरती बात कर रहे… डोभाल के ‘प्रतिशोध’ वाले बयान पर बोलीं महबूबा
देश को बचाने वाले नफरती बात कर रहे... डोभाल के 'प्रतिशोध' वाले बयान पर बोलीं महबूबा

एनएसए अजीत डोभाल,महबूबा मुफ्ती

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने रविवार को एनएसए अजीत डोभाल के ‘प्रतिशोध’ वाले बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि डोभाल जैसे हाई लेवल अधिकारी, जिनका काम देश को नापाक मंसूबों से बचाना है, वे नफरत की बात कर रहे हैं. मुफ्ती ने कहा कि 21वीं सदी में पुरानी बातों के नाम पर बदले की बात करना सही नहीं है.

मुफ्ती ने आगे कहा कि इससे गरीब और कम पढ़े-लिखे युवा उकसावे में आकर एक ऐसे अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बना सकते हैं, जो पहले से ही मुश्किलों का सामना कर रहा है. दरअसल, डोभाल ने कल यानी शनिवार को ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ के उद्घाटन समारोह में प्रतिशोध यानी ‘बदला’ शब्द का जिक्र किया था.

NSA अजीत डोभाल ने क्या कहा था?

अजीत डोभाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा था कि ड्रीम्स से जिंदगी नहीं बनती लेकिन ड्रीम्स लोगों को एक दिशा देती है. ड्रीम्स को डिसीजन में बदलने से सफलता मिलती है. भारत के युवाओं में आज बड़ी शक्ति है. आप लोग आजाद भारत में पैदा हुए. यह आजाद भारत हमेशा इतना आजाद नहीं था जितना अब दिखता है. हमारे पूर्वजों के कठिन संघर्ष, बलिदान और अपमान सहने का परिणाम है.

‘प्रतिशोध’ अपने आप में एक बड़ी ताकत

उन्होंने कहा कि कई लोगों को फांसी हुई. हमारे गांव जला दिए गए. हमारी सभ्यता नष्ट हो गई. हमारे मंदिरों को लूटा गया और हम बेबस होकर देखते रहे. यह इतिहास हमारे सामने एक चुनौती पेश करता है कि आज भारत के हर युवा के अंदर वह आग होनी चाहिए. ‘प्रतिशोध’ यानी बदला शब्द आदर्श नहीं है, लेकिन ‘प्रतिशोध’ अपने आप में एक बड़ी ताकत है. हमें अपने इतिहास का बदला लेना है. हमें इस देश को वापस उस जगह ले जाना है, जहां हम अपने अधिकारों, अपने विचारों और अपनी मान्यताओं के आधार पर एक महान भारत बना सकें.

उन्होंने आगे कहा कि हमारी एक बहुत विकसित सभ्यता थी. हमने किसी के मंदिर नहीं तोड़े. हम कहीं जाकर लूटपाट करने नहीं गए। जब ​​बाकी दुनिया बहुत पिछड़ी हुई थी, तब भी हमने किसी देश या किसी विदेशी लोगों पर हमला नहीं किया. लेकिन हम अपनी सुरक्षा और खुद पर आने वाले खतरों को समझने में नाकाम रहे. जब हम उनके प्रति लापरवाह रहे, तो इतिहास ने हमें एक सबक सिखाया. क्या हमने वह सबक सीखा? क्या हम वह सबक याद रखेंगे? अगर आने वाली पीढ़ियां वह सबक भूल गईं, तो यह इस देश के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी.

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