
मकर संक्रांति पर सूर्य देव की पूजाImage Credit source: AI ChatGpt
Makar Sankranti Surya Puja Vidhi: सनातन धर्म में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश अत्यंत विशेष और पुण्यदायी माना जाता है. वर्ष 2026 में सूर्यदेव 14 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है. इसी दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं और शुभ कार्यों का आरंभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य का यह गोचर न केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत देता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य और आत्मबल को भी बढ़ाता है. यही कारण है कि इस दिन सूर्य पूजा और अर्घ्य का विशेष महत्व बताया गया है.
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश क्यों है खास
मकर संक्रांति के दिन प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ और सात्विक वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है. इसके पश्चात खुले स्थान, घर की छत या आंगन में पूर्व दिशा की ओर मुख कर सूर्यदेव का ध्यान करते हुए पूजा की जाती है. तांबे के पात्र में स्वच्छ जल, लाल फूल, अक्षत और गुड़ डालकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना शास्त्रसम्मत माना गया है. अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्रों का जप करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है. धार्मिक मान्यता है कि इस विधि से की गई सूर्य पूजा से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं और भक्त को यश, उत्तम स्वास्थ्य, आत्मबल तथा समाज में मान-सम्मान प्रदान करते हैं.
सूर्य को अर्घ्य देने का शुभ समय
मकर संक्रांति के दिन सूर्य को अर्घ्य देने का सर्वोत्तम समय सूर्योदय के बाद का माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, सूर्योदय से लेकर सूर्य के मध्यान्ह तक अर्घ्य देना शुभ होता है. इस समय किया गया अर्घ्य आत्मशुद्धि और मानसिक बल प्रदान करता है. मान्यता है कि नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देने से नेत्र दोष, आत्मविश्वास की कमी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी लाभ मिलता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर राशि में सूर्यदेव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में आत्मबल, स्वास्थ्य और कार्यक्षमता बढ़ती है. यह पूजा मानसिक तनाव को कम करती है और जीवन में नई दिशा प्रदान करती है. मकर संक्रांति का पर्व हमें प्रकृति, सूर्य और अनुशासित जीवनशैली से जुड़ने का संदेश देता है, जिससे जीवन संतुलित और ऊर्जावान बनता है.
मकर संक्रांति पर सूर्यदेव की विशेष पूजा विधि
- मकर संक्रांति के दिन प्रातःकाल स्नान कर शरीर और मन को शुद्ध करना शुभ माना जाता है.
- स्नान के बाद स्वच्छ और सात्विक वस्त्र धारण करने की परंपरा है.
- पूजा के लिए खुले स्थान, आंगन या घर की छत का चयन करना उत्तम माना जाता है.
- पूर्व दिशा की ओर मुख कर सूर्यदेव का ध्यान करते हुए पूजा आरंभ करनी चाहिए.
- तांबे के पात्र में स्वच्छ जल भरकर उसमें लाल फूल, अक्षत और गुड़ डालें.
- निर्धारित विधि से सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना शास्त्रसम्मत माना गया है.
- अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्रों का जाप करना विशेष फलदायी होता है.
- मान्यता है कि इस पूजा से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं.
- सूर्य पूजा से यश, उत्तम स्वास्थ्य और समाज में सम्मान की प्राप्ति होती है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी प्रकार के सुझाव के लिए astropatri.comपर संपर्क करें.






