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Makar Sankranti 2026: पितामह भीष्म ने प्राण त्यागने के लिए क्यों किया मकर संक्रांति का इंतजार, क्या इस दिन मरने पर मिल जाता है मोक्ष?

Makar Sankranti 2026: पितामह भीष्म ने प्राण त्यागने के लिए क्यों किया मकर संक्रांति का इंतजार, क्या इस दिन मरने पर मिल जाता है मोक्ष?
Makar Sankranti 2026: पितामह भीष्म ने प्राण त्यागने के लिए क्यों किया मकर संक्रांति का इंतजार, क्या इस दिन मरने पर मिल जाता है मोक्ष?

पितामह भीष्म ने मकर संक्रांति पर ही क्यों त्यागे प्राणImage Credit source: AI ChatGpt

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का त्योहार आने वाला है. 14 जनवरी को सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे. इसी दिन ये पावन पर्व मनाया जाएगा. मकर संक्रांति सिर्फ एक पर्व नहीं है, बल्कि अध्यात्मिक दृष्टि से भी इसके कई विशेष पहलू हैं. इस दिन मकर राशि में सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं. शास्त्रों में इसको देवताओं का काल माना गया है. बताया जाता है कि सूर्य देव जब उत्तरायण होते हैं, तो स्वर्ग के द्वार खुल जाते हैं.

लोक मान्यताएं हैं कि उत्तरायण में मरने वालों को मोक्ष मिलता है, जबकि दक्षिणायन के सूर्य में मृत्यु होने वालों को जन्म-मरण के चक्र से गुजरना होता है. तीज-त्योहारों पर मृत्यु हो जाने पर लोगों में भ्रम की स्थिति देखी जाती है. कई बार लोगों के मन में ये सवाल भी उठता है कि अगर मकर संक्रांति के दिन किसी के मृत्यु हो जाती है, तो इसके मायने क्या हैं?

मकर संक्रांति पर मृत्यु होने पर मिल जाता है मोक्ष

शास्त्रों के जानकारों के अनुसार, अगर मकर संक्रांति या सूर्य देव के उत्तरायण होने पर किसी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके लिए स्वर्ग के द्वार खुले होते हैं. मकर संक्रांति पर जिनकी मृत्यु होती है, उनकी आत्माएं बड़ी पुण्य मानी जाती हैं और ऐसी आत्माओं को स्वत: मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है. ये भगवान के दिन माने जाते हैं, इसलिए मृत्यु के बाद आत्मा सीधे भगवान के चरणों में जगह पाती है.

ये बात महाभारत के पितामह भीष्म की काहनी से बेहतर समझी जा सकती है. पितामह भीष्म को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था. महाभारत के 10वें दिन पितामह भीष्म के शरीर को अर्जुन के बाणों ने बुरी तरह से भेद दिया था. इसके बाद वो घायल होकर रणभूमि पर गिर गए. बाणों की शय्या पर लेटे भीष्म असहनीय पीड़ा सह रहे थे, लेकिन उन्होंने तुरंत प्राण नहीं त्यागे. क्योंकि उस समय सूर्य देव दक्षिणायन में थे.

बाणों की शय्या पर किया था भीष्म ने इंतजार

शास्त्रों में ये अवधि प्राण त्यागने के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती. ये बाद पितामह भीष्म जानते थे. इसलिए उन्होंने प्राण त्यागने के लिए सूर्य देव के उत्तरायण होने का इंतजार किया था. इसके बाद मकर संक्रांति पर जब सूर्य देव उत्तरायण हो गए तब उन्होंने प्राण त्यागे. ऐसा माना जाता है कि इस समय प्राण जाने पर आत्मा को परमागति प्राप्त होती है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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