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Makar Sankranti 2026: ‘मकर संक्रांति पर्व में विधवाओं को करें शामिल’, बोले सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद झिंजाडे

Makar Sankranti 2026: ‘मकर संक्रांति पर्व में विधवाओं को करें शामिल’, बोले सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद झिंजाडे
Makar Sankranti 2026: 'मकर संक्रांति पर्व में विधवाओं को करें शामिल', बोले सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद झिंजाडे

मकर संक्रांति 2026Image Credit source: AI ChatGpt

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक बड़ा ही पावन पर्व है. ये पर्व भगवान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है. ये त्योहार पूरे देश में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. सभी ये त्योहार बड़े उल्लास से मनाते हैं, लेकिन महाराष्ट्र समेत कई जगहों पर विधवा महिलाओं को इससे व अन्य त्योहारों और शुभ कामों से दूर रखा जाता था. अब भी कुछ जगहों पर ऐसा किया जाता है.

अब इसी को लेकर महाराष्ट्र के एक सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद झिंजाडे ने समाज और लोगों से अपील की है. उन्होंने कहा कि कि मकर संक्रांति के पारंपरिक अनुष्ठानों में विधवा महिलाओं को भी शामिल किया जाए. प्रमोद झिंजाडे महात्मा फुले समाज सेवा मंडल के प्रमुख हैं. वो समाज की बुरी परंपराओं को खत्म करने के लिए काम करते हैं. उन्होंने कहा कि विधवाओं को त्योहारों से बाहर रखना भेदभावपूर्ण और पिछड़ापन है.

‘विधवाओं को उत्सवों से बाहर रखना सामाजिक अन्याय’

उन्होंने कहा, “विधवा महिलाओं को अशुभ बताकर उन्हें ऐसे उत्सवों से बाहर रखना सामाजिक अन्याय है. अगर कोई खुद को धार्मिक मानता है, तो विधवा महिलाओं को मंदिरों या घर के पूजा स्थलों में दीपक जलाने और देवी-देवताओं को प्रार्थना और भोजन अर्पित करने की अनुमति देकर उनका सम्मान किया जाना चाहिए.” यही नहीं प्रमोद झिंजाडे ने उन गांवों का स्वागत किया जहां विधवाओं को पहले से ही त्योहारों के अनुष्ठानों में शामिल किया जा रहा है.

ये हैं कुछ पुरानी मान्यताएं

उन्होंने शिक्षित और साहसी विधवा महिलाओं से अपील की कि वे मकर संक्रांति पर अपने गांवों में अन्य विधवाओं के लिए हल्दी-कुमकुम और तिलगुल कार्यक्रम आयोजित करें. बता दें कि महाराष्ट्र समेत देश के कई राज्यों में पहले विधवा महिलाओं को मकर संक्रािति या अन्य त्योहारों और शुभ कामों से दूर रखा जाता है. विधवा महिलाओं को ‘अशुभ’ माना जाता था.

अब भी ऐसा किया जा रहा है. दरअसल, पहले पति की मृत्यु के बाद विधवा महिलाओं से ये अपेक्षा की जाती थी कि वो सांसारिक सुखों का त्याग कर दें. यही कारण हैं कि उन्हें मकर संक्रांति और अन्य त्योहार से दूर रहने के लिए कहा जाता था.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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